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नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी को दिया समर्थन, अधीर रंजन ने उठाए सवालभारत
20 सित॰ 2026, 4:18 pm (11 दिन पहले)· 1

नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी को दिया समर्थन, अधीर रंजन ने उठाए सवाल

नंदीग्राम सीट पर अपनी प्रत्याशी के हटने के बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान का समर्थन किया है, जिस पर अधीर रंजन चौधरी ने तीखी टिप्पणी की है।

पश्चिम बंगाल की सियासत में नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव को लेकर एक अप्रत्याशित मोड़ सामने आया है। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस के आंतरिक संकट और अपने उम्मीदवार के हटने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी कांग्रेस के प्रत्याशी मिलन प्रधान की दावेदारी का खुला समर्थन कर दिया है। राजनीतिक जानकारों की नजर में यह फैसला केवल एक सीट पर भाजपा विरोधी वोटों का बिखराव रोकने की कवायद भर नहीं है, बल्कि अपनी कमजोर पड़ती संगठनात्मक स्थिति के बीच विपक्ष की गोलबंदी को नया आकार देने का दांव भी है।

मैदान से उम्मीदवार का हटना और बदला चुनावी गणित

नंदीग्राम उपचुनाव के लिए मतदान छह अक्टूबर को तय किया गया है। शुरुआत में ममता बनर्जी के धड़े ने संचिता प्रधान डे को अपना उम्मीदवार बनाकर चुनावी समर में उतारा था। हालांकि, कोलकाता में मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी के साथ हुई एक बैठक के तुरंत बाद संचिता प्रधान डे ने अचानक अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। अपने ही प्रत्याशी के पीछे हट जाने के कारण बनर्जी के धड़े के सामने चुनावी अखाड़े में शून्य पैदा हो गया, जिसके बाद उन्होंने अलग से दूसरा प्रत्याशी उतारने के बजाय कांग्रेस प्रत्याशी की पीठ थपथपाने का रास्ता चुना।

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ममता ने कांग्रेस को बताया स्वाभाविक सहयोगी

इस अप्रत्याशित कदम का ऐलान अठारह सितंबर को करते हुए ममता बनर्जी ने कांग्रेस को एक स्वाभाविक और अहम सहयोगी के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने अपने इस निर्णय को देश के बड़े हितों और विपक्षी 'इंडिया' मोर्चे को ताकत देने वाला बताया। उनका तर्क था कि बंगाल की धरती से यह एकजुटता पूरे देश के विपक्षी खेमे के लिए एक स्पष्ट संदेश साबित होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय बाद राज्य के भीतर भाजपा के खिलाफ बनाई जा रही रणनीति में कांग्रेस को इतने केंद्रीय स्थान पर रखकर बनर्जी ने एक बड़ा राजनीतिक बदलाव दिखाया है।

घोषणा के तुरंत बाद कांग्रेस प्रत्याशी की गिरफ्तारी

इस पूरे चुनावी घटनाक्रम में उस वक्त नया तनाव जुड़ गया जब ममता बनर्जी के समर्थन के तुरंत बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। यह गिरफ्तारी वर्ष 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले के सिलसिले में की गई, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने इस पुलिसिया कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। पार्टी नेता राहुल गांधी ने इस गिरफ्तारी को राजनीतिक दुर्भावना करार देते हुए संकल्प जताया कि उनकी पार्टी लड़ेगी और जीतेगी।

गठबंधन और कड़वाहट का पुराना इतिहास

दोनों दलों का सियासी सफर दशकों से आपसी टकराव और मजबूरी के गठबंधनों का मिला-जुला इतिहास रहा है। नब्बे के दशक के अंतिम वर्षों में ममता बनर्जी ने वाम मोर्चे के खिलाफ कांग्रेस के रुख को नरम मानते हुए अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बावजूद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने पर दोनों दलों ने 2001 का विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा और फिर 2009 के आम चुनाव में भी साझा मंच बनाया। वर्ष 2011 में इस साझेदारी ने राज्य से वाम दलों के चौतीस साल पुराने शासन को उखाड़ फेंका था। हालांकि, सत्ता में आने के बाद मंत्रालयों, नीतियों और सीट बंटवारे पर पैदा हुए तनाव के कारण यह गठबंधन बिखर गया था।

अधीर रंजन चौधरी का तंज और प्रदेश कांग्रेस का रुख

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी की इस नई राजनीतिक दरियादिली पर गंभीर संदेह जताया है। चौधरी ने कहा कि वह कांग्रेस को “गिरे हुए पत्ते की तरह कमजोर न समझें, बल्कि उसे बरगद की तरह मजबूत मानकर उसका साथ दें।” उन्होंने समर्थन के समय पर उंगली उठाते हुए कहा कि तृणमूल के गुटीय विवाद के बाद चुनाव आयोग से आवंटित फुटबॉल खिलाड़ी चुनाव चिह्न तो उनके पास है, मगर मैदान में उतारने के लिए कोई खिलाड़ी नहीं बचा। दूसरी तरफ, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने अधिक व्यावहारिक रुख अपनाते हुए कहा कि पार्टी राज्य की सभी धर्मनिरपेक्ष और भाजपा विरोधी शक्तियों की तरफ से मिलने वाले समर्थन का स्वागत करती है, जिससे भविष्य में विपक्ष की एकता के नए द्वार खुल सकते हैं।

सवाल-जवाब

नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव का मतदान किस तारीख को होना है?
नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान छह अक्टूबर को तय किया गया है।
ममता बनर्जी के खेमे की मूल उम्मीदवार कौन थीं और उन्होंने नाम क्यों वापस लिया?
संचिता प्रधान डे मूल उम्मीदवार थीं, जिन्होंने कोलकाता में मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी से मुलाकात करने के बाद अपना नाम वापस ले लिया।
ममता बनर्जी ने नंदीग्राम में किस पार्टी के उम्मीदवार का समर्थन किया है?
ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान का समर्थन करने की आधिकारिक घोषणा की है।
कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को किस मामले में गिरफ्तार किया गया?
मिलन प्रधान को वर्ष 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े एक पुराने मामले में गिरफ्तार करके जेल भेजा गया है।
अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी के समर्थन पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वह कांग्रेस को गिरा हुआ पत्ता न समझें बल्कि बरगद मानकर साथ दें, और तंज कसा कि उनके पास चुनाव चिह्न तो है मगर कोई खिलाड़ी नहीं बचा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार की इस फैसले पर क्या राय रही?
शुभंकर सरकार ने कहा कि कांग्रेस राज्य की सभी भाजपा विरोधी और धर्मनिरपेक्ष ताकतों से मिलने वाले समर्थन का खुले दिल से स्वागत करती है।
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टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·10 दिन पहले

नंदीग्राम का यह घटनाक्रम भारत के प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर के गठबंधनों के बीच के गहरे अंतर्विरोधों को दर्शाता है। समर्थन के तुरंत बाद ऐतिहासिक भूमि आंदोलन से जुड़े मामले में कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी यह स्पष्ट करती है कि क्षेत्रीय राजनीति और पुरानी वैमनस्यता को राष्ट्रीय गठबंधन के साझा लक्ष्यों से ऊपर रखा जा रहा है। वैश्विक विश्लेषक ऐसे विरोधाभासों को बहुत बारीकी से देखते हैं क्योंकि क्षेत्रीय दलों की यह अस्थिरता भारत की राष्ट्रीय नीति निरंतरता और भविष्य के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

नंदीग्राम का यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल में 'इंडिया' गठबंधन की मजबूरियों और आंतरिक विरोधाभासों को उजागर करता है। अपने प्रत्याशी के हटने के बाद ममता बनर्जी द्वारा कांग्रेस को समर्थन देना किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि एक तात्कालिक संगठनात्मक संकट का परिणाम है। वहीं, समर्थन के तुरंत बाद कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी दर्शाती है कि स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के बीच कड़वाहट और अविश्वास की खाई कितनी गहरी है। यह अस्थिरता राज्य में भाजपा विरोधी मोर्चे को मजबूत करने के बजाय राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है।

Ananya Iyer@ananya-iyer·10 दिन पहले

रविकेश के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गहरा असर मतदाताओं के मानस पर पड़ेगा। एक तरफ नए गठबंधन का ऐलान और ठीक बाद प्रत्याशी की गिरफ्तारी, विपक्ष की रणनीतिक लाचारी को दर्शाती है। वर्तमान सत्तापक्ष इस अफरातफरी और विरोधाभास का इस्तेमाल विपक्ष को अवसरवादी साबित करने में करेगा। राष्ट्रीय स्तर पर 'इंडिया' गठबंधन भले ही एकजुटता का दावा करे, लेकिन जमीनी स्तर पर समन्वय की यह कमी और असमंजस भाजपा-विरोधी मतदाताओं के भरोसे को कमजोर करेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

नंदीग्राम उपचुनाव के बीच कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान की गिरफ्तारी कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली के राजनीतिक इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठाती है। वर्ष 2007 के भूमि आंदोलन से जुड़े सत्रह साल पुराने मामले को ऐन चुनावी मोड़ पर सक्रिय करना पुलिस की कार्यप्रणाली को संदेह के घेरे में लाता है। एक तरफ जहां पुराना आपराधिक रिकॉर्ड कानून के तहत जांच का विषय है, वहीं ऐन वक्त पर ऐसी त्वरित कार्रवाई निष्पक्ष न्याय व्यवस्था के बजाय राजनीतिक हित साधने का औजार अधिक प्रतीत होती है। यह घटना दर्शाती है कि संवेदनशील क्षेत्रों में चुनाव के दौरान पुराने मुकदमों का इस्तेमाल चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

नंदीग्राम का यह घटनाक्रम विपक्षी एकजुटता के व्यावहारिक अंतर्विरोधों को उजागर करता है। एक तरफ ममता बनर्जी 'इंडिया' गठबंधन की दुहाई देकर कांग्रेस को समर्थन दे रही हैं, तो दूसरी तरफ पुरानी फाइलों के खुलने से स्थानीय स्तर पर अविश्वास की खाई और चौड़ी हो रही है। इस गिरफ्तारी से पैदा हुआ तनाव कांग्रेस और तृणमूल के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच चुनावी तालमेल को बेहद मुश्किल बनाएगा। इसका सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है। यह उपचुनाव अब बंगाल में भविष्य के विपक्षी गठजोड़ की व्यावहारिक क्षमता को परखने वाला एक बड़ा लिटमस टेस्ट बन गया है।

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