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नोएडा में खस्ताहाल सड़कों पर सीईओ का बड़ा एक्शन, 2022 से जारी 500 करोड़ रुपये के सभी टेंडरों की होगी जांचउत्तर प्रदेश
14 अग॰ 2026, 8:03 am (30 दिन पहले)· 3

नोएडा में खस्ताहाल सड़कों पर सीईओ का बड़ा एक्शन, 2022 से जारी 500 करोड़ रुपये के सभी टेंडरों की होगी जांच

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने सड़कों के जल्द टूटने और घटिया निर्माण की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए वर्ष 2022 से अब तक के सभी सड़क टेंडरों की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। जांच में दोषी मिलने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है।

उत्तर प्रदेश के हाईटेक शहर नोएडा में सड़कों की बदहाली और घटिया पैचवर्क को लेकर नोएडा प्राधिकरण ने अब सख्त रुख अपना लिया है। शहर की प्रमुख सड़कों पर रिसर्फेसिंग और निर्माण के कुछ ही दिनों बाद गड्ढे उभरने, गिट्टी उखड़ने और धूल उड़ने की लगातार मिल रही शिकायतों के बीच व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने वर्ष 2022 से लेकर अब तक जारी किए गए सड़क निर्माण और रखरखाव से जुड़े सभी टेंडरों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। प्राधिकरण की इस सख्त पहल से ठेकेदारों और गुणवत्ता की अनदेखी करने वाले विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। शहरवासियों को रोजाना उखड़ी सड़कों और उड़ती धूल के कारण हादसे का शिकार होना पड़ रहा है, जिससे बाइक और ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

500 करोड़ रुपये के टेंडर और ठेकेदारों के बहाने

नोएडा शहर में सुगम आवाजाही बनाए रखने के लिए प्राधिकरण की ओर से सर्किल-1 से लेकर सर्किल-5 तक बड़े पैमाने पर सड़कों की मरम्मत, रिसर्फेसिंग और नए निर्माण कार्य कराए गए थे। इन कार्यों के तहत लगभग 150 किलोमीटर लंबी सड़कों को सुधारने के लिए करीब 500 करोड़ रुपये के टेंडर अलग-अलग कार्यदायी एजेंसियों और ठेकेदारों को जारी किए गए थे। हालांकि, निर्माण प्रक्रिया के दौरान कई प्रमुख मार्गों पर काम में अत्यधिक देरी देखने को मिली। जब प्राधिकरण ने देरी पर जवाब तलब किया तो ठेकेदारों ने पश्चिम एशिया यानी गल्फ देशों में जारी संकट का हवाला दिया। ठेकेदारों का दावा था कि अंतरराष्ट्रीय संकट के कारण बिटुमिन और तारकोल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई, जिससे कच्चे माल की कमी पैदा हो गई और काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। इसके बावजूद, भारी भरकम बजट खर्च होने के बाद भी सड़कों की धरातलीय स्थिति जस की तस बनी हुई है।

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इन प्रमुख मार्गों पर खस्ताहाल सड़कों से हादसे की आशंका

शहर के कई व्यस्ततम और महत्वपूर्ण संपर्क मार्गों पर इस समय आवाजाही करना जोखिम भरा बना हुआ है। सेक्टर-18 से सेक्टर-37 और सेक्टर-51 की तरफ जाने वाले मुख्य मार्ग पर सड़क की सतह उखड़ चुकी है। सेक्टर-49 से 12/22 चौकी तक का मार्ग, सेक्टर-31 के सामने की सड़क तथा स्टेडियम चौक से सेक्टर-49 तक का पूरा स्ट्रैच बेहद बदहाल स्थिति में है। बॉटेनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के ठीक सामने स्थित व्यस्त मुख्य मार्ग पर बिखरी हुई गिट्टी के कारण आए दिन दोपहिया वाहन फिसल रहे हैं और दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसके अलावा सेक्टर-5 में पानी की टंकी के पास और सेक्टर-62 के विभिन्न हिस्सों में भी नवनिर्मित सड़कें टूटने लगी हैं। सबसे चौंकाने वाला मामला एआरटीओ (ARTO) कार्यालय के सामने देखने को मिला, जहां महज 20 दिन पहले किया गया पैचवर्क पूरी तरह उखड़ गया और वहां गहरे गड्ढे बन गए हैं।

जांच के दायरे में टेंडर शर्तें, सामग्री और भुगतान रिकॉर्ड

प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुसार, वर्ष 2022 के बाद से स्वीकृत सभी टेंडरों की फाइलें खंगाली जाएंगी। इस जांच में मुख्य रूप से यह परखा जाएगा कि सड़क निर्माण के समय निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के नियमों का सख्ती से पालन किया गया था या नहीं। टेंडर के नियमों के मुताबिक किसी भी सड़क के निर्माण या रिसर्फेसिंग के बाद उसकी एक निश्चित टिकाऊ अवधि (गारंटी अवधि) तय होती है, जो सामान्यतः 4 वर्ष तक होनी चाहिए। लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि 4 साल तो दूर, 40 दिन और कई जगह 20 दिन भी मरम्मत कार्य टिक नहीं पा रहा है। जांच टीम टेंडर की शर्तों, इस्तेमाल की गई निर्माण सामग्री की लैब टेस्ट रिपोर्ट, निर्माण गुणवत्ता, सड़क बनने के बाद के रख-रखाव रिकॉर्ड और ठेकेदारों को जारी किए गए भुगतान के विवरण की गहराई से पड़ताल करेगी।

लापरवाह ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने और अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

नोएडा प्राधिकरण के सीईओ ने साफ कर दिया है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और जनसुरक्षा से खिलवाड़ को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में यदि किसी ठेकेदार या निर्माण एजेंसी की ओर से सामग्री में मिलावट या गुणवत्ता में लापरवाही पाई जाती है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे ठेकेदारों को नोएडा प्राधिकरण के भविष्य के सभी टेंडरों से अलग कर दिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा। इसके साथ ही, यदि जांच के दौरान प्राधिकरण के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत, सुपरविजन में लापरवाही या गलत भुगतान की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कड़े विभागीय कदम उठाए जाएंगे। हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कों का बार-बार टूटना अब प्रशासनिक जवाबदेही के दायरे में आ गया है।

सवाल-जवाब

नोएडा प्राधिकरण ने किन टेंडरों की जांच के आदेश दिए हैं?
सीईओ कृष्णा करुणेश ने वर्ष 2022 से अब तक जारी किए गए सभी सड़क निर्माण और रिसर्फेसिंग टेंडरों की जांच का आदेश दिया है।
नोएडा में सड़क निर्माण के लिए कितना बजट आवंटित किया गया था?
प्राधिकरण ने सर्किल-1 से सर्किल-5 तक की 150 किमी सड़कों की रिसर्फेसिंग और मरम्मत के लिए करीब 500 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए थे।
ठेकेदारों ने काम में देरी और खराबी का क्या कारण बताया था?
ठेकेदारों ने पश्चिम एशिया (गल्फ देशों) के संकट के कारण तारकोल और बिटुमिन की कमी का हवाला दिया था।
जांच में दोषी पाए जाने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
दोषी ठेकेदारों को आगे काम नहीं मिलेगा और उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा, जबकि लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·29 दिन पहले

यह प्रशासनिक लापरवाही केवल प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों और एथलीटों की आवाजाही पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। जब शहर के प्रमुख स्टेडियमों और मार्गों के पास सड़कें महज 20 दिनों में उखड़ जाती हैं, तो यह ट्रेनिंग के लिए आने वाले खिलाड़ियों की सुरक्षा और समय प्रबंधन के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। इस 500 करोड़ रुपये के घोटाले जैसी स्थिति में यदि सख्त मॉनिटरिंग नहीं हुई, तो भविष्य के खेल बुनियादी ढांचे पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

यह प्रशासनिक कार्रवाई केवल ठेकेदारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसके दायरे में उन तकनीकी अधिकारियों और इंजीनियरों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए जिन्होंने मौके पर बिना गुणवत्ता जांचे बिल पास किए। 500 करोड़ रुपये के इस सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति बाधाओं की आड़ में किए गए भ्रष्टाचार की यह उच्चस्तरीय जांच यदि निष्पक्ष रही, तो यह उत्तर प्रदेश के अन्य औद्योगिक शहरों के लिए भी एक कड़ा प्रशासनिक संदेश साबित होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

रविकेश गुप्ता के अनुसार, 500 करोड़ रुपये के इस बुनियादी ढांचा घोटाले की वित्तीय और कॉरपोरेट स्तर पर व्यापक जांच आवश्यक है। ठेकेदारों द्वारा गल्फ संकट और बिटुमिन की आपूर्ति का बहाना बनाकर घटिया सामग्री का उपयोग और समय पर काम न करना गहरे वित्तीय कुप्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला नियंत्रण की विफलता को दर्शाता है। यदि इस मामले में मनी ट्रेल, टेंडर आवंटन की पारदार्शिता और फंड के उपयोग की गहराई से फोरेंसिक ऑडिट नहीं की गई, तो सार्वजनिक धन की यह बर्बादी कॉरपोरेट जवाबदेही पर बड़ा सवालिया निशान लगाती रहेगी। भविष्य में ऐसे टेंडरों के लिए थर्ड-पार्टी ऑडिट और डिजिटल ट्रैकिंग अनिवार्य होनी चाहिए ताकि शहर के आर्थिक विकास और निवेश माहौल पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितता और मिलीभगत का है। 2022 से अब तक के 500 करोड़ रुपये के टेंडरों की फोरेंसिक ऑडिट और मैटेरियल सैंपलिंग जरूरी है। ठेकेदारों द्वारा गल्फ संकट का बहाना बनाना और सिर्फ 20 दिन में पैचवर्क उखड़ना गुणवत्ता जांच पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि इस जांच में विजिलेंस या एंटी-करप्शन ब्यूरो की एंट्री होती है, तो कई जूनियर और सीनियर इंजीनियरों पर गाज गिर सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

यह मामला महज सड़कों के टूटने तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश के शहरी विकास और लोक नीति की प्राथमिकताओं पर बड़ा सवाल है। यदि 500 करोड़ के बजट और 150 किलोमीटर के दायरे में हुए इन कार्यों की जमीनी हकीकत का स्वतंत्र तकनीकी परीक्षण नहीं हुआ, तो भविष्य में होने वाले शहरी बुनियादी ढांचे के विकास और टेंडर प्रक्रियाओं से नागरिकों का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

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