भारत में अवैध रूप से घुसपैठ करने और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने के आरोपी एक अमेरिकी नागरिक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अदालत में अपना पहला आरोपपत्र प्रस्तुत कर दिया है। एनआईए ने यह चार्जशीट आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत दाखिल की है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि आव्रजन नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में जांच पूरी होने के कारण यह कदम उठाया गया है, जबकि इन सभी आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत चल रही आतंकवादी साजिश की जांच अभी समाप्त नहीं हुई है।
आव्रजन कानून के तहत आरोपपत्र और यूएपीए की स्थिति
एनआईए ने 8 सितंबर को विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में सात विदेशी नागरिकों के खिलाफ अपनी चार्जशीट पेश की। इस आरोपपत्र में आरोपियों पर आव्रजन एवं विदेशी नागरिक अधिनियम की धारा 21 और 23 के तहत मुकदमे की सिफारिश की गई है। मामले की कानूनी समय-सीमा के अनुसार, आरोपियों की 180 दिनों की न्यायिक हिरासत अवधि 8 सितंबर 2026 को समाप्त हो रही थी। एनआईए ने समय-सीमा के भीतर उन अपराधों पर चार्जशीट दायर करना आवश्यक माना जिनकी जांच प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, आव्रजन अधिनियम के तहत चार्जशीट पेश करने का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि यूएपीए के तहत दर्ज मुख्य मामले को बंद कर दिया गया है। यदि यूएपीए से जुड़ी जारी जांच में भविष्य में कोई नए साक्ष्य या दस्तावेज सामने आते हैं, तो एनआईए अदालत के समक्ष पूरक चार्जशीट (सप्लीमेंट्री चार्जशीट) दाखिल करने का अधिकार सुरक्षित रखती है।
म्यांमार सीमा से घुसपैठ और भाड़े के लड़ाके होने का आरोप
इस मामले में गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक के अलावा छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं, जिनके नाम कामिन्स्की विक्टर, हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन और होंचारुक मक्सिम हैं। इन सभी सात विदेशी नागरिकों को एनआईए ने इस वर्ष 13 मार्च को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला है कि इस समूह ने कथित तौर पर म्यांमार के रास्ते मिजोरम सीमा से भारतीय सीमा में अवैध प्रवेश किया था। इसके बाद वे देश के विभिन्न घरेलू हवाई अड्डों पर पकड़े गए थे।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह पूरा समूह भाड़े के लड़ाकों के रूप में कार्य कर रहा था। एनआईए ने शुरुआती जांच में पाया कि ये आरोपी भारत और म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों की सहायता कर रहे थे। इसके अलावा, उन पर इन विद्रोही गुटों को ड्रोन उड़ाने और उनका परिचालन करने का तकनीकी प्रशिक्षण देने का भी गंभीर आरोप है। इन्हीं गंभीर आरोपों के आधार पर एनआईए ने शुरुआती दौर में उनके खिलाफ यूएपीए और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
कानूनी प्रक्रिया की समय-सारणी और राजनयिक संदर्भ
गिरफ्तारी के बाद एनआईए ने 16 मार्च को सभी सातों आरोपियों को अदालत में पेश किया था, जहां से उन्हें 11 दिनों की एनआईए कस्टडी में भेजा गया था। पूछताछ की अवधि पूरी होने के पश्चात अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश जारी किए थे। तब से सभी आरोपी जेल में बंद हैं और उनसे लगातार पूछताछ की जाती रही है।
इस मामले के दौरान अमेरिकी राजनयिकों द्वारा मैथ्यू एरॉन वैन डाइक के विषय में भारतीय अधिकारियों से संपर्क साधने की बात भी सामने आई है। इस पर स्पष्ट किया गया कि जब भी कोई विदेशी नागरिक किसी अन्य देश में गिरफ्तार होता है, तो संबंधित देश का दूतावास कांसुलर एक्सेस लेने, कानूनी सहायता सुनिश्चित करने और मानवीय व्यवहार की मांग करने के लिए स्थानीय प्राधिकारियों से संपर्क करता है। इसे एक सामान्य राजनयिक और कांसुलर प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।



















