दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर 49 में स्थित बरौला गांव इन दिनों नागरिक सुविधाओं के बदहाल ढांचे की मार झेल रहा है। बुनियादी जरूरतों के अभाव में यहां के स्थानीय लोगों का जीवन पूरी तरह दूभर हो चुका है। स्थिति यह है कि हल्की बारिश के बाद गलियों में जलभराव हो जाता है, जिससे लोगों का अपने घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नालियों और सीवर का दूषित पानी सड़कों पर आम दिनों में भी बहता रहता है, लेकिन नोएडा प्राधिकरण का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी उनकी इस गंभीर समस्या को सुनने को तैयार नहीं है।
कागजों पर टेंडर, लेकिन धरातल पर शून्य काम: बीसी प्रधान
बरौला गांव के रहने वाले बीसी प्रधान ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे लगातार कई बार नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को इन समस्याओं से अवगत करा चुके हैं। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि गांव की सबसे बड़ी मुसीबत यहां की जर्जर और टूटी हुई सड़कें हैं, जिन पर सीवर और नालियों का गंदा पानी लगातार जमा रहता है। इससे राहगीरों और वाहनों को गुजरने में भारी दिक्कत आती है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रशासन द्वारा विभिन्न कार्यों के लिए टेंडर तो जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं दिखाई देता। इस लापरवाही का खामियाजा यहां रहने वाले मूल ग्रामीणों के साथ-साथ किराएदारों को भी भुगतना पड़ रहा है।
किराएदार तो चले जाएंगे, लेकिन मूल निवासी कहां जाएं: कर्मवीर गुर्जर
युवा विकास समिति बरौला के अध्यक्ष कर्मवीर गुर्जर ने स्थानीय हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि गांव के मूल निवासी तो अपनी जमीन और घर होने के कारण मजबूरी में इस नारकीय स्थिति को झेल रहे हैं। लेकिन जो बाहरी लोग रोजगार या बेहतर जिंदगी का सपना लेकर नोएडा आते हैं और यहां के हालात देखते हैं, वे बेहद निराश होते हैं। ऐसे लोग अक्सर यही कहते हैं कि इससे सौ गुना बेहतर तो उनके अपने गांव थे, जहां कम से कम ऐसी गंदगी और समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता था। कर्मवीर गुर्जर का कहना है कि किराएदार तो परेशान होकर दूसरी जगहों पर कमरा ले लेंगे, लेकिन अपनी पुश्तैनी जमीन होने के कारण गांव के मूल निवासियों के पास घर छोड़ने का कोई विकल्प नहीं है। नालियों और सीवर की हालत बेहद बदतर हो चुकी है और कई दिनों तक शिकायत दर्ज कराने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी इस संकट को समझने को तैयार नहीं हैं।
सीवर लाइन बदलने, पीने के पानी और डंपिंग यार्ड पर उठते सवाल: शालिनी सिंह
स्थानीय निवासी शालिनी सिंह ने कई अन्य ज्वलंत मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि नोएडा के विभिन्न क्षेत्रों में बनाए गए डंपिंग यार्ड्स में अक्सर आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं, जिससे पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। उन्होंने मांग की कि बरौला गांव में सीवर व्यवस्था काफी पुरानी हो चुकी है, इसलिए पूरी सीवर लाइन को नए सिरे से बिछाया जाना चाहिए ताकि निवासियों को इस नियमित जलभराव से हमेशा के लिए निजात मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने पीने के पानी की गुणवत्ता और उसकी आपूर्ति की मात्रा को भी दुरुस्त करने की मांग की। शालिनी सिंह ने आरोप लगाया कि नोएडा प्राधिकरण की ही जमीन पर कई अवैध बैंकट हॉल खड़े हो गए हैं, लेकिन उनके खिलाफ प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे आम जनता को कठिनाई होती है और अधिकारी बेपरवाह बने हुए हैं।
पार्क की बदहाली और बारिश के दिनों में नर्क बनते हालात
गांव के निवासी मोहित बैसोया ने बताया कि समस्याओं की सूची बहुत लंबी है। उन्होंने पानी की सुचारू सप्लाई और गांव के पार्क की साफ-सफाई को लेकर कई बार प्राधिकरण के आला अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगती। इसी तरह, स्थानीय निवासी अंकित गुप्ता ने बताया कि थोड़ी सी भी बारिश होने पर गांव की हर एक गली तालाब में तब्दील हो जाती है। मानसून के समय तो पूरी कॉलोनी किसी नर्क जैसी दिखने लगती है, जहां पैदल चलने वाले राहगीरों के लिए कदम आगे बढ़ाना भी एक बड़ी मुसीबत साबित होता है।













