महराजगंज जिले के सीमा से सटे इलाकों में गिने चुने पर्यटन स्थल जरूर हैं, लेकिन वहां रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में शायद ही कोई बदलाव आया हो। निचलौल तहसील की सीमा पर बसा भेड़िहारी गांव इसका ताजा उदाहरण है, जहां आज भी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव देखने को मिल रहा है।
कागजों में वाइब्रेंट विलेज, जमीन पर बदहाली
भेड़िहारी को सरकार ने वाइब्रेंट विलेज घोषित कर रखा है। इस दर्जे के तहत गांव को पर्यटन से जोड़कर यहां के लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधारने का मकसद रखा गया था। लेकिन गांव पहुंचने पर तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है। यहां की सड़कों और मूलभूत सुविधाओं का हाल ऐसा है कि पर्यटक तो दूर, आसपास के गांवों के लोग भी यहां आना पसंद नहीं करते।
बारिश में टूट जाती है भेड़िहारी की एकमात्र सड़क
निचलौल विकासखंड का भेड़िहारी एक मुसहर ग्रामसभा है। गांव में आने जाने के लिए सिर्फ एक मुख्य सड़क है, जबकि इससे जुड़ने वाले तमाम छोटे रास्तों की हालत बेहद खस्ता है। हल्की सी बारिश होते ही इन रास्तों की स्थिति और बिगड़ जाती है। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीण अक्सर सड़क की मरम्मत और नाली बनवाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते रहते हैं। जिस गांव को कागजों पर वाइब्रेंट विलेज का दर्जा मिला है, वहां थोड़ी सी बारिश में बरसाती पानी सड़कों पर जमा हो जाता है और लोगों का पैदल निकलना तक मुश्किल हो जाता है।
बच्चों की स्कूल जाने की राह भी आसान नहीं
गांव में जब बच्चों को स्कूल जाने के लिए ठीक से सड़क तक नहीं मिलती और लोगों के आवागमन की बुनियादी सुविधाएं ही नदारद हों, तो वाइब्रेंट विलेज के दर्जे का फायदा आखिर किसे मिल रहा है, यह बड़ा सवाल है। सड़कों के आसपास पानी भरे रहने और सफाई व्यवस्था बिगड़ने से गांव में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा भी बना रहता है। जिस गांव को पर्यटकों को लुभाने के मकसद से वाइब्रेंट विलेज बनाया गया, वहीं बुनियादी सुविधाओं का टोटा साफ नजर आता है।
शिकायतों के बावजूद नहीं निकला स्थायी हल
ग्रामीण इन समस्याओं की शिकायत प्रशासन से कई बार कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। हर साल सड़कों की हालत और बिगड़ती जा रही है, न तो सड़कों का ठीक से निर्माण हो रहा है और न ही जल निकासी की समस्या दूर हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बरसात में यही सिलसिला दोहराया जाता है, शिकायतें दर्ज होती हैं, अधिकारी दौरा करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन काम अगली बारिश तक शुरू ही नहीं हो पाता।
पास में ही हैं जिले के बड़े पर्यटन स्थल
भेड़िहारी गांव से सटे हुए ही दर्जनिया मगरमच्छ संरक्षण केंद्र है, जो जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। गांव से थोड़ी ही दूरी पर जिले का आखिरी छोर टेल फाल भी है, जहां रोजाना पर्यटक पहुंचते हैं। इतने अच्छे लोकेशन पर बसे होने के बावजूद गांव की हालत सुधर नहीं पाई है, जिससे प्रशासन की उदासीनता साफ झलकती है। जो गांव इतना खूबसूरत है कि उसे खास पर्यटन योजना के लिए चुना गया, वही गांव इतना उपेक्षित है कि यहां के लोगों के लिए रोजाना आना जाना भी एक चुनौती बन गया है। गांव के लोगों का कहना है कि अगर सड़क और नाली जैसी बुनियादी सुविधाएं समय पर मिल जाएं, तो पर्यटन से जुड़ी योजनाओं का असली फायदा उन्हें भी मिल सकता है, वरना वाइब्रेंट विलेज का दर्जा सिर्फ नाम भर रह जाएगा। विकास सिर्फ कागजों में सिमटा नजर आता है, जबकि जमीनी हकीकत उससे बिल्कुल उलट है।



















