भारतीय न्याय व्यवस्था से बचकर विदेश में शरण लेने वाले अपराधियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सरकार द्वारा अपनाई गई सख्त जीरो टॉलरेंस नीति, आधुनिक तकनीकी उपकरणों और मजबूत कानूनी संशोधनों के परिणामस्वरूप देश छोड़कर भागे अपराधियों पर शिकंजा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गया है। वैश्विक मंचों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल के दम पर देश अब ऐसे फरार आरोपियों को बेनकाब करने में जुटा है। भगोड़ों की इस वैश्विक घेराबंदी के तहत पिछले 3 सालों के भीतर ही INTERPOL के मार्फत 401 खतरनाक भगोड़ों के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराए जा चुके हैं।
भारतपोल पोर्टल से देश की एजेंसियों को जोड़ा गया
जांच प्रक्रियाओं में लेटलतीफी को खत्म करने और तेजी लाने के उद्देश्य से भारतपोल पोर्टल की शुरुआत की गई। इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश भर की 1,400 से अधिक पुलिस और जांच एजेंसियों को सीधे इंटरपोल के वैश्विक नेटवर्क से जोड़ दिया गया है। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा सकारात्मक परिणाम यह सामने आया कि जहां पहले विभिन्न एजेंसियों के बीच गोपनीय सूचनाओं का आदान-प्रदान करने में हफ्तों का समय बर्बाद हो जाता था, वह अब घटकर मात्र 3 से 10 दिन के बीच सिमट गया है।
सख्त विधायी सुधार और ट्रायल इन ऐब्सेन्शिया का प्रावधान
कानूनी मोर्चे पर भी सरकार ने बड़े और कड़े बदलाव किए हैं। साल 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA संशोधन अधिनियम और गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। इसके बाद अमल में लाए गए तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत भगोड़ों से निपटने के लिए अभूतपूर्व व्यवस्था की गई। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 355 और 356 के अंतर्गत देश के इतिहास में पहली बार ट्रायल इन ऐब्सेन्शिया का प्रावधान शामिल किया गया। इसके तहत यदि कोई आरोपी देश छोड़कर फरार हो जाता है, तो उसकी गैर-मौजूदगी में भी अदालत में सुनवाई चलाई जा सकती है और उसे विधिवत सजा सुनाई जा सकती है।
हजारों करोड़ की संपत्ति की जब्ती और सफल रिकवरी
वित्तीय और आर्थिक अपराधों पर गहरी चोट करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA का बेहद सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इसके ठोस परिणामों के तौर पर वर्ष 2019 से 2026 के दरमियान भगोड़े आर्थिक अपराधियों की कुल 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। केवल इतना ही नहीं, सरकार ने इस समयावधि के भीतर 18,762 करोड़ रुपये की सफल वापसी भी सुनिश्चित की, जिसके जरिए देश का धन लूटकर विदेश भागने वाले लोगों की संपत्तियों को कुर्क करके जनता और बैंकों के बकाए पैसों की भरपाई की जा रही है।
ऑपरेशन त्रिशूल के जरिए सैटेलाइट से पैनी नजर
अपनी पहचान बदलकर दुनिया के अलग-अलग कोनों में छिपने वाले अपराधियों का सुराग लगाने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया गया जिसे ऑपरेशन त्रिशूल का नाम दिया गया। इस अभियान के तहत आधुनिक सैटेलाइट मैपिंग तकनीकों, डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण और उन्नत फॉरेंसिक डेटा का भरपूर उपयोग किया जा रहा है, जिससे विदेश में छिपे इन लोगों की सटीक जियो-लोकेशन का पता लगाया जा रहा है। इन उन्नत तकनीकी उपायों के बाद अपराधियों का कानून की पकड़ से बच पाना लगभग असंभव होता जा रहा है।



















