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ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा का इस्तीफा राष्ट्रपति ने स्वीकारा, 13 साल के पुलिस करियर पर लगा विरामभारत
20 सित॰ 2026, 9:35 am (11 दिन पहले)· 0

ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा का इस्तीफा राष्ट्रपति ने स्वीकारा, 13 साल के पुलिस करियर पर लगा विराम

आईआईटी कानपुर से पढ़े ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी जगमोहन मीणा का इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार कर लिया गया है। करीब 13 साल तक सेवा देने के बाद उन्होंने निजी कारणों से पुलिस सेवा छोड़ी है।

भारतीय पुलिस सेवा के 2013 बैच के अधिकारी जगमोहन मीणा का सरकारी सेवा से इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा औपचारिक रूप से मंजूर कर लिया गया है। 11 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक परिपत्र के माध्यम से उनके त्यागपत्र को स्वीकृति मिलने का विवरण सामने आया है। इसके साथ ही ओडिशा कैडर में उनकी लगभग 13 साल लंबी प्रशासनिक व पुलिस सेवा का अध्याय विधिवत रूप से समाप्त हो गया है। तकनीकी शिक्षा की पृष्ठभूमि से निकलकर सिविल सेवा में आने वाले जगमोहन मीणा ने अपने सेवाकाल में राज्य के दुर्गम एवं संवेदनशील जिलों से लेकर राजधानी क्षेत्र तक कई अहम पदों पर अपनी सेवाएं दी थीं।

राजस्थान से आईआईटी कानपुर और फिर पुलिस सेवा तक का सफर

मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले जगमोहन मीणा का जन्म वर्ष 1989 में हुआ था। उनकी प्रारंभिक रुचि तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में रही। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर में दाखिला लिया और वहां से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग शाखा में बीटेक तथा एमटेक की दोहरी डिग्री पूरी की। उच्च तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद उन्होंने देश की प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लिया।

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संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित वर्ष 2012 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने पूरे देश में 848वीं रैंक हासिल की। इस रैंक के आधार पर उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ। इसके उपरांत उन्हें ओडिशा कैडर आवंटित किया गया। 23 दिसंबर 2013 को उन्होंने 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी आधिकारिक सेवाएं शुरू कीं।

मलकानगिरी और गंजाम में पुलिस अधीक्षक के रूप में दायित्व

ओडिशा कैडर में अपने सेवाकाल के दौरान जगमोहन मीणा ने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिसिंग की कमान संभाली। उन्होंने मलकानगिरी और गंजाम जिलों में पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्य किया। विशेष रूप से मलकानगिरी जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता रहा है, जहां सुरक्षा बलों का संचालन और कानून व्यवस्था बनाए रखना अत्यधिक जटिल एवं चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

इस संवेदनशील इलाके में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए उन्होंने कई अभियानों का नेतृत्व किया। सेवाकाल के दौरान किए गए उत्कृष्ट एवं साहसिक कार्यों को देखते हुए उन्हें वर्ष 2019 में पुलिस मेडल फॉर गैलंट्री से सम्मानित किया गया था। जिलों में चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों को पूरा करने के बाद उन्हें राज्य के प्रमुख शहरी केंद्रों में भी सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख का दायित्व सौंपा गया।

कटक और भुवनेश्वर में डीसीपी का कार्यभार और त्यागपत्र का निर्णय

जिला स्तर पर पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारियों के बाद जगमोहन मीणा ने कटक और भुवनेश्वर जैसे बड़े शहरों में पुलिस उपायुक्त के पद पर कार्य किया। भुवनेश्वर में तैनाती के दौरान जुलाई 2026 में उन्होंने एएनआई से बातचीत की थी। उस समय उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने अपने परिवारजनों और मित्रों से गहन विचार-विमर्श करने के उपरांत निजी कारणों के चलते अपने पद से इस्तीफा देने का कदम उठाया था। उन्होंने इस पूरे विषय पर अपनी व्यक्तिगत निजता का सम्मान किए जाने का भी अनुरोध किया था।

पद छोड़ने का निर्णय लेने के बाद उन्होंने ओडिशा सरकार और राज्य की जनता के प्रति अपना आभार व्यक्त किया था। उन्होंने कहा था कि जनता की सेवा करने का अवसर मिलने और उन पर भरोसा जताने के लिए वे हमेशा आभारी रहेंगे। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए इस्तीफे की प्रक्रिया में कुछ महीनों का समय लगा और अंततः 11 सितंबर 2026 के परिपत्र में राष्ट्रपति भवन की ओर से उनके इस्तीफे को मंजूरी प्रदान कर दी गई।

आईएएस दिव्या मित्तल और उनके सफर में समानताएं

जगमोहन मीणा के इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल का प्रकरण भी चर्चा में आ गया। दोनों ही अधिकारियों का प्रशासनिक सफर काफी हद तक एक जैसे पड़ावों से होकर गुजरा। दोनों ने वर्ष 2012 की सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की थी और दोनों ही 2013 बैच के अधिकारी थे। सिविल सेवा परीक्षा 2012 में दिव्या मित्तल ने अखिल भारतीय स्तर पर 69वीं रैंक हासिल की थी और उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला था, जबकि जगमोहन मीणा 848वीं रैंक के साथ ओडिशा कैडर के आईपीएस बने थे।

दोनों अधिकारियों ने लगभग 13 साल तक सेवा देने के बाद वर्ष 2026 में ही अपनी इच्छा से सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया। दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को अपने पद से इस्तीफा दिया था और सोशल मीडिया के जरिए यह साझा किया था कि उन्होंने अपनी मर्जी से यह कदम उठाया है। इसके बाद 15 सितंबर को उनके इस्तीफे की मंजूरी की पुष्टि हुई थी। राजनीति में शामिल होने को लेकर चली चर्चाओं पर दिव्या मित्तल ने एनडीटीवी से बात करते हुए स्पष्ट किया था कि उनका राजनीति में प्रवेश करने का कोई विचार नहीं है।

प्रशासनिक व्यवस्था से बाहर नई राहों की ओर

वर्ष 2013 से शुरू हुआ यह सफर वर्ष 2026 में दोनों अधिकारियों के लिए प्रशासनिक सेवाओं से अलग होने के रूप में सामने आया है। जहां दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा को अलविदा कहा, वहीं जगमोहन मीणा ने भारतीय पुलिस सेवा का दायरा छोड़ दिया। जगमोहन मीणा ने अपने कदम के पीछे निजी कारणों का हवाला दिया है, जबकि दिव्या मित्तल ने भी इसे अपना स्वैच्छिक फैसला बताया था। 13 साल के लंबे प्रशासनिक कार्यकाल के बाद दोनों अधिकारियों के सरकारी सेवा से हटने के फैसले ने एक बार फिर उच्च प्रशासनिक सेवाओं से स्वैच्छिक विदाई के विषय को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

सवाल-जवाब

आईपीएस जगमोहन मीणा का इस्तीफा कब और किसके द्वारा स्वीकार किया गया?
आईपीएस जगमोहन मीणा का इस्तीफा राष्ट्रपति द्वारा स्वीकार किया गया, जिसकी जानकारी 11 सितंबर 2026 को जारी एक आधिकारिक परिपत्र में सामने आई।
जगमोहन मीणा किस बैच और कैडर के आईपीएस अधिकारी थे?
जगमोहन मीणा वर्ष 2013 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी थे और उन्हें ओडिशा कैडर आवंटित किया गया था।
सिविल सेवा में आने से पहले जगमोहन मीणा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि क्या थी?
उन्होंने आईआईटी कानपुर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक और एमटेक की पढ़ाई पूरी की थी।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2012 में जगमोहन मीणा को कौन सी रैंक मिली थी?
वर्ष 2012 की सिविल सेवा परीक्षा में जगमोहन मीणा ने अखिल भारतीय स्तर पर 848वीं रैंक प्राप्त की थी।
आईपीएस जगमोहन मीणा ने ओडिशा के किन प्रमुख जिलों में एसपी के पद पर कार्य किया?
उन्होंने ओडिशा के नक्सल प्रभावित मलकानगिरी और गंजाम जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
जगमोहन मीणा को किस सम्मान से नवाजा जा चुका है?
सेवाकाल के दौरान उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें वर्ष 2019 में पुलिस मेडल फॉर गैलंट्री से सम्मानित किया गया था।
आईएएस दिव्या मित्तल के साथ जगमोहन मीणा के करियर का क्या संबंध है?
दोनों अधिकारी 2012 की सिविल सेवा परीक्षा से चयनित 2013 बैच के सहपाठी रहे हैं और दोनों ने लगभग 13 साल की सेवा के बाद वर्ष 2026 में अपने पदों से इस्तीफा दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·10 दिन पहले

एक तकनीकी पृष्ठभूमि और वीरता पदक प्राप्त करने वाले अधिकारी का अचानक प्रशासनिक सेवा से हटना यह सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे युवा पेशेवर अब पारंपरिक कॅरियर की सीमाओं को तोड़कर कॉर्पोरेट, उद्यमिता या जीवन के अन्य रचनात्मक क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि यह खबर मुख्य रूप से प्रशासनिक और सुरक्षा से जुड़ी है, लेकिन यह उन तेजी से बदलते पेशेवर रुझानों को भी दर्शाती है जहां उच्च शिक्षित युवा अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को प्राथमिकता देते हुए जीवन में नए आयाम तलाश रहे हैं।

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·10 दिन पहले

आईआईटी कानपुर से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसी उच्च तकनीकी डिग्री लेकर 2013 बैच के आईपीएस अधिकारी बने जगमोहन मीणा का यह कदम प्रशासनिक गलियारों में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। मलकानगिरी जैसे नक्सल प्रभावित और दुर्गम जिलों में एसपी रहते हुए 2019 में पुलिस मेडल फॉर गैलंट्री हासिल करने वाले एक कुशल अधिकारी का 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफा देना यह रेखांकित करता है कि प्रशासनिक सेवा के शीर्ष स्तर पर भी पेशेवर प्राथमिकताएं किस तरह बदल रही हैं। राष्ट्रपति द्वारा त्यागपत्र स्वीकार किए जाने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तकनीकी पृष्ठभूमि और फील्ड का लंबा अनुभव रखने वाले ऐसे युवा पूर्व अधिकारी कॉर्पोरेट लीडरशिप, ग्लोबल कंसल्टिंग या किसी अन्य नए सेक्टर में किस तरह अपनी नई पारी की शुरुआत करते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·10 दिन पहले

आईआईटी के तकनीकी स्नातकों का सिविल सेवाओं से इस प्रकार समयपूर्व मोहभंग होना और निजी कारणों से उच्च पदों को छोड़ना भारतीय प्रशासनिक ढांचे में एक गंभीर प्रवृत्ति की ओर इशारा करता है। विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गैलंट्री मेडल पाने वाले एक अनुभवी अधिकारी का 13 साल की सेवा के बाद इस्तीफा देना शासन प्रणाली के लिए एक बड़ा नुकसान है। यह प्रशासनिक और पुलिस महकमों में करियर की प्राथमिकताओं में आ रहे बड़े बदलावों को उजागर करता है, जिस पर नीति निर्माताओं को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

आईआईटी के पूर्व छात्र और एक गैलंट्री मेडलिस्ट अधिकारी का सुरक्षा तंत्र से इस प्रकार अचानक अलग होना एक बड़ा प्रशासनिक व रणनीतिक नुकसान है। मलकानगिरी जैसे उग्रवाद-प्रभावित क्षेत्रों में उनका अनुभव और शहरी इलाकों में उनकी डीसीपी स्तर की कमान अमूल्य थी। अब यह देखना होगा कि उनका अगला कदम किस क्षेत्र में होता है और क्या सरकार उनकी विशेषज्ञता का कोई अन्य विकल्प ढूंढ पाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·10 दिन पहले

मलकानगिरी जैसे वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आईपीएस अधिकारियों का तकनीकी दक्षता के साथ मैदानी अनुभव होना राष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन के लिए बेहद अहम माना जाता है। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसी उच्च तकनीक पृष्ठभूमि वाले अधिकारी का इस तरह व्यवस्था से बाहर होना प्रशासनिक और रणनीतिक दृष्टि से एक बड़ा शून्य पैदा करता है। इस घटनाक्रम से यह सवाल फिर से गहरा गया है कि क्या कॉर्पोरेट क्षेत्र, स्टार्टअप या वैश्विक परामर्श कंपनियाँ लोक सेवा के वरिष्ठ और मेधावी अधिकारियों को तेजी से अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं?

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