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ओडिशा के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी शफीन अहमद का निधन, शशि थरूर ने दी श्रद्धांजलिभारत
31 अग॰ 2026, 8:39 pm (59 मिनट पहले)· 2

ओडिशा के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी शफीन अहमद का निधन, शशि थरूर ने दी श्रद्धांजलि

ओडिशा कैडर के 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी शफीन अहमद का 50 वर्ष की आयु में कैंसर से निधन हो गया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

प्रशासनिक और पुलिस महकमे में उस समय शोक की लहर दौड़ गई जब ओडिशा कैडर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शफीन अहमद ने दुनिया को अलविदा कह दिया। महज 50 वर्ष की उम्र में उन्होंने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लंबी जंग लड़ने के बाद सोमवार सुबह केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में अंतिम सांस ली। उनके इस तरह अचानक चले जाने से पुलिस सेवा में एक बड़ा खालीपन आ गया है, जिसे आसानी से भरा नहीं जा सकता। उनके निधन की खबर मिलते ही देश भर के प्रशासनिक हलकों में शोक संवेदनाओं का दौर शुरू हो गया।

शानदार शैक्षणिक और पेशेवर सफर

शफीन अहमद मूल रूप से तिरुवनंतपुरम के ही रहने वाले थे। पुलिस सेवा में कदम रखने से पहले उन्होंने कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, त्रिवेंद्रम से अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी की थी। इसके बाद वे सिविल सेवा परीक्षा में सफल होकर साल 2003 में भारतीय पुलिस सेवा के ओडिशा कैडर के लिए चुने गए। अपने दो दशक से अधिक के लंबे और बेदाग करियर के दौरान उन्होंने ओडिशा पुलिस में कई चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण पदों की कमान संभाली। अपने अंतिम समय में वे ओडिशा पुलिस के सीआईडी-सीबी में पुलिस महानिरीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।

साइबर अपराध नियंत्रण में अहम योगदान

अपने सेवाकाल के दौरान उन्होंने तकनीकी अपराधों से निपटने और जांच प्रक्रियाओं को गति देने में उल्लेखनीय कार्य किया। ओडिशा में रहते हुए उन्होंने विशेष रूप से साइबर अपराध शाखा को आधुनिक बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई। जटिल और उलझे हुए आपराधिक मामलों को अपनी तेज बुद्धि और शांत स्वभाव से सुलझाने के लिए उनकी विशेष पहचान थी। उनके सहकर्मी उन्हें एक ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के रूप में याद करते हैं जो हर मुश्किल परिस्थिति में बेहद संयम के साथ काम करते थे।

केरल डेपुटेशन और शशि थरूर से जुड़ाव

अपने गृह राज्य के प्रति उनका लगाव जगजाहिर था और वे डेपुटेशन पर केरल भी लौटे थे। इस दौरान उन्होंने तिरुवनंतपुरम रूरल के पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया। इसी कार्य अवधि के दौरान उनकी मुलाकात स्थानीय सांसद शशि थरूर से हुई थी, जो आगे चलकर एक गहरे व्यक्तिगत परिचय में बदल गई। शशि थरूर ने उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वह एक अत्यंत विचारशील, शिष्ट और कुशाग्र बुद्धि के धनी अधिकारी थे जिन्हें अपनी प्रतिभा का कभी अभिमान नहीं रहा। थरूर ने उनके निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया है।

राजनीतिक गलियारों और प्रशासनिक तंत्र में शोक

तिरुवनंतपुरम से चार बार के सांसद शशि थरूर अपने राजनीतिक सफर और मुखर बयानों के लिए हमेशा चर्चा में रहते हैं। साल 2009 में संयुक्त राष्ट्र संघ की नौकरी छोड़कर राजनीति में आने वाले थरूर ने अपनी अलग पहचान बनाई है। लेकिन इस बार उनका सोशल मीडिया पर एक पुलिस अधिकारी के लिए लिखा गया यह भावुक संदेश उनके संवेदनशील और मानवीय पहलू को उजागर करता है। इतनी कम उम्र में और अपने ही शहर में एक बेहतरीन अधिकारी का यूं चले जाना पूरे देश के प्रशासनिक ढांचे के लिए एक गहरा आघात है।

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सवाल-जवाब

शफीन अहमद किस कैडर के आईपीएस अधिकारी थे?
वे ओडिशा कैडर के 2003 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी थे।
शफीन अहमद का निधन कहाँ और किस कारण हुआ?
उनका निधन तिरुवनंतपुरम में कैंसर की बीमारी के कारण हुआ।
वे वर्तमान में किस पद पर तैनात थे?
वे वर्तमान में ओडिशा पुलिस के सीआईडी-सीबी में पुलिस महानिरीक्षक के पद पर तैनात थे।
शशि थरूर ने उनके बारे में क्या कहा?
शशि थरूर ने उन्हें एक विचारशील, शिष्ट और कुशाग्र बुद्धि का अधिकारी बताया।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 मिनट पहले

शफीन अहमद जैसे तकनीकी रूप से दक्ष और साइबर अपराध नियंत्रण में विशेषज्ञता रखने वाले आईपीएस अधिकारी का यूं कम उम्र में जाना आंतरिक सुरक्षा और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए एक बड़ा झटका है। उनका जाना यह रेखांकित करता है कि प्रशासनिक तंत्र को ऐसे उच्च प्रशिक्षित अधिकारियों के अनुभवों का दस्तावेजीकरण करना चाहिए ताकि साइबर और तकनीकी अपराधों से निपटने की उनकी कार्यशैली आने वाली पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक बन सके।

Ravikash Gupta@ravikash·1 मिनट पहले

शफीन अहमद का निधन केवल एक प्रशासनिक क्षति नहीं है, बल्कि यह देश के उस डिजिटल सुरक्षा तंत्र के लिए भी एक बड़ा नुकसान है जो आज साइबर अपराधियों और तकनीकी चुनौतियों से जूझ रहा है। वर्तमान दौर में जब वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं, तब पुलिस बल के भीतर तकनीकी रूप से दक्ष और आधुनिक सोच वाले अधिकारियों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उनकी कार्यशैली और साइबर अपराध नियंत्रण में उनके योगदान का संस्थागत अध्ययन होना चाहिए ताकि भावी प्रशासनिक अधिकारी इनसे सीख ले सकें।

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