यदि आपको लग रहा था कि अगस्त महीने की उमसभरी और खतरनाक गर्मी ने आपका जीवन बेहद कठिन बना दिया था, तो आपको थोड़ा सतर्क होने की आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन का वास्तविक असर अब और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने मौसम को लेकर एक बेहद गंभीर चेतावनी दी है, जिसके आंकड़े किसी को भी डराने के लिए पर्याप्त हैं। IMD की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 का अगस्त महीना वर्ष 1901 के बाद से पूरे 125 सालों में सबसे अधिक गर्म अगस्त के रूप में दर्ज किया गया है। हालांकि सबसे चौंकाने वाला पहलू यह नहीं है, बल्कि वास्तविक चिंता का विषय यह है कि आगामी सितंबर का महीना इस स्थिति से भी अधिक भयानक और सूखे दौर वाला साबित होने की आशंका है, जहां लोगों को वर्षा की एक-एक बूंद के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
मौसम विभाग के आंकड़े और तापमान की स्थिति
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र द्वारा देश के सामने रखे गए अगस्त महीने के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। अगस्त 2026 के दौरान देश का औसत तापमान 28.01 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सामान्य स्थिति में यह औसत 27.34 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए था। केवल दिन का तापमान ही नहीं, बल्कि रात का औसतन न्यूनतम तापमान भी सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 24.36 डिग्री सेल्सियस के ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। इस भयंकर गर्मी और बारिश की भारी कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण अल नीनो बना हुआ है। प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान अत्यधिक बढ़ चुका है और अल नीनो की ये स्थितियां आने वाले हफ्तों में और अधिक मजबूत होने वाली हैं, जो देश के मानसून को पूरी तरह से प्रभावित कर रही हैं और उसे सुखा रही हैं।
सितंबर में बारिश का ग्राफ और सूखे की आशंका
IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, सितंबर के महीने में पूरे देश भर में कुल मासिक वर्षा लॉन्ग पीरियड एवरेज का 91 प्रतिशत से भी काफी कम रहने वाली है। सामान्य तौर पर सितंबर महीने का पिछले 30 से 50 सालों का लॉन्ग पीरियड एवरेज लगभग 167.9 मिलीमीटर बारिश का होता है, लेकिन इस बार बादलों की स्थिति बहुत निराशाजनक रहने वाली है। अगर पिछले महीने यानी अगस्त की बात करें तो देश को केवल 213.3 मिलीमीटर बारिश ही नसीब हुई, जो साल 2001 के बाद से सातवीं सबसे कम बारिश का आंकड़ा है। हालांकि अगस्त के दौरान कुल 4 लो-प्रेशर सिस्टम बने थे और वे 26 दिनों तक लगातार एक्टिव भी रहे, लेकिन उनका प्रभाव केवल गंगा के मैदानी इलाकों तक ही सीमित होकर रह गया, जबकि देश का बाकी हिस्सा भयंकर सूखे और गर्मी की मार झेलता रहा।
दिन में तेज धूप और रातों में बेचैनी
मौसम वैज्ञानिकों ने बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि सितंबर में केवल बारिश की कमी ही लोगों को नहीं सताएगी, बल्कि दिन का अधिकतम तापमान भी सामान्य से काफी ऊपर बना रहेगा। प्रशांत महासागर की गर्मी का सीधा और गंभीर असर अब भारतीय उपमहाद्वीप पर साफ दिखाई दे रहा है। ऐसी परिस्थितियों में सितंबर का यह पूरा महीना भीषण उमस, झुलसा देने वाली धूप और पानी की भयंकर किल्लत लेकर आ रहा है। कुल मिलाकर देखा जाए तो मौसम का यह गर्म और सूखा चरण हम सभी के लिए एक बड़ी चुनौती बनने जा रहा है, जिसका सामना बेहद सावधानी के साथ करना होगा।





















