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पाकिस्तान के नारोवाल में प्राचीन हिंदू मंदिर ढहाने पर भारत सख्त, निष्पक्ष जांच और पुनर्निर्माण की मांग कीभारत
2 सित॰ 2026, 9:58 pm (28 दिन पहले)· 2

पाकिस्तान के नारोवाल में प्राचीन हिंदू मंदिर ढहाने पर भारत सख्त, निष्पक्ष जांच और पुनर्निर्माण की मांग की

पाकिस्तान के नारोवाल जिले में एक सदी पुराने हिंदू मंदिर को ढहाए जाने की घटना पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मामले की निष्पक्ष जांच और मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग की।

पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित एक सदी पुराने ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को गिराए जाने की घटना पर भारत ने अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय ने इस घटना पर गहरा क्षोभ प्रकट करते हुए इसे अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थल के खिलाफ एक निंदनीय हरकत करार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नारोवाल के सिराज गांव में हुए इस मंदिर ध्वंस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अपने देश में अल्पसंख्यक समुदायों के पुराने पूजा स्थलों की रक्षा करने में पाकिस्तानी प्रशासन की लापरवाही और विफलता बेहद चिंताजनक पहलू है।

पाक प्रशासन की अकर्मण्यता और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठते सवाल

भारत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार की घटनाएं पड़ोसी देश में रह रहे अल्पसंख्यक समुदायों के बीच लगातार बनी असुरक्षा की भावना और उनकी धार्मिक आजादी पर बढ़ते हमलों को उजागर करती हैं। किसी भी राष्ट्र के लिए अपने नागरिकों की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों को सुरक्षित रखना उसका प्राथमिक संवैधानिक व नैतिक दायित्व होता है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया है कि वह इस संवेदनशील मामले में बिना किसी विलंब के पारदर्शी और निष्पक्ष जांच प्रक्रिया शुरू करे। इसके साथ ही, इस तोड़फोड़ के पीछे शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई तय की जानी चाहिए।

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मंदिर के पुनर्निर्माण और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की मांग

भारत ने पाकिस्तान के सामने केवल जांच की मांग ही नहीं रखी, बल्कि यह भी कहा है कि ध्वस्त किए गए इस ऐतिहासिक मंदिर के तत्काल पुनर्स्थापन के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। नई दिल्ली ने इस्लामाबाद को स्मरण कराया कि अपने समस्त अल्पसंख्यक नागरिकों की जान-माल, सुरक्षा और कल्याण की रक्षा करना वहां के शासन व्यवस्था का मूलभूत कर्तव्य है। धार्मिक स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ वहां रह रहे अल्पसंख्यकों को भयमुक्त वातावरण प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है।

धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन पर वैश्विक मंच पर भारत का स्पष्ट संदेश

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों के उपासना स्थलों, ऐतिहासिक इमारतों और धार्मिक स्वतंत्रता पर लगातार खतरे के बादल मंडराते रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में भारत सरकार का यह बयान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली ने अपने संदेश में यह साफ कर दिया है कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण कोई वैकल्पिक विषय नहीं है, बल्कि यह एक अंतर्राष्ट्रीय जिम्मेदारी है जिसे पूरा करने में पाकिस्तान को अपनी प्रतिबद्धता दिखानी होगी।

सवाल-जवाब

पाकिस्तान के किस स्थान पर मंदिर तोड़ा गया?
यह ऐतिहासिक मंदिर पाकिस्तान के नारोवाल जिले में स्थित सिराज गांव में गिराया गया है।
इस घटना पर भारत सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और इसे एक सदी पुराने अल्पसंख्यक पूजा स्थल के खिलाफ निंदनीय तोड़फोड़ बताया है।
भारत ने पाकिस्तान सरकार से क्या मांगें की हैं?
भारत ने मामले की तत्काल पारदर्शी जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और क्षतिग्रस्त मंदिर के तुरंत पुनर्निर्माण की मांग की है।
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता कौन हैं जिन्होंने यह बयान दिया?
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

पाकिस्तान के नारोवाल में मंदिर तोड़े जाने की यह घटना केवल आपराधिक तोड़फोड़ नहीं, बल्कि पड़ोसी देश की कानून-व्यवस्था और न्याय प्रणाली की गंभीर विफलता को दर्शाती है। एक क्राइम रिपोर्टर के रूप में मेरा मानना है कि जब तक स्थानीय प्रशासन इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उन्हें कटघरे में खड़ा नहीं करता, तब तक वहां के अल्पसंख्यक समुदायों में सुरक्षा का विश्वास बहाल नहीं हो सकता। इस मामले में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मंचों और कूटनीतिक दबाव के जरिए आगे चलकर पाकिस्तान सरकार पर पारदर्शी जांच और पुनर्निर्माण के लिए और अधिक शिकंजा कसा जा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·28 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस घटना का भू-आर्थिक और कूटनीतिक निहितार्थ भी गहरा है। वैश्विक मंचों पर बार-बार अल्पसंख्यकों के अधिकारों के हनन से पाकिस्तान की साख और उसकी वित्तीय स्थिरता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशक और वैश्विक संस्थाएं भी वहां की शासन व्यवस्था की निष्पक्षता और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाती हैं।

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