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पलामू में सर्पदंश का अजीब मामला, जानिए क्या एक ही व्यक्ति को दो बार डंस सकता है कोई सांपझारखंड
16 सित॰ 2026, 9:27 am (9 दिन पहले)· 0

पलामू में सर्पदंश का अजीब मामला, जानिए क्या एक ही व्यक्ति को दो बार डंस सकता है कोई सांप

पलामू में बारिश के दिनों में सर्पदंश के मामले तेजी से बढ़ जाते हैं। हाल ही में एक व्यक्ति को दो बार सांप के काटने का दावा सामने आया है, जिसके बाद विशेषज्ञों ने इसकी सच्चाई और वैज्ञानिक कारणों पर प्रकाश डाला है।

बरसात के महीने आते ही देश के ग्रामीण और जंगलों से घिरे अंचलों में सर्पदंश का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस मौसम में पानी भरने के कारण सांप अपने बिलों से निकलकर सूखी और महफूज जगहों की तलाश में भटकते हैं। ऐसे हालात में खेतों में काम करने वाले किसान, घरों के आसपास रहने वाले लोग और झाड़ियों के पास जाने वाले व्यक्तियों का सामना इन जहरीले जीवों से होने की आशंका कई गुना तक बढ़ जाती है। पलामू सहित पूरे झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बारिश के मौसम के दौरान सर्पदंश की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं, जिससे स्थानीय लोगों में हमेशा डर बना रहता है।

पलामू में सामने आया दो बार काटने का अजीब दावा

हाल ही में पलामू जिले से एक ऐसी अनोखी घटना सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है। एक शख्स ने दावा किया कि जब वह खेत में खीरा तोड़ रहा था, तब एक ही सांप ने उसे लगातार दो बार डंस लिया। इस भयानक घटना के तुरंत बाद पीड़ित को आनन-फानन में इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां समय पर सही उपचार मिलने से उसकी तबीयत में सुधार हुआ। डॉक्टरों के मुताबिक अब वह पूरी तरह खतरे से बाहर है। इस अजीबोगरीब वाकये के बाद से ही आम लोगों के बीच यह बड़ी चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वाकई कोई सांप किसी इंसान को एक के बाद एक दो बार काट सकता है।

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क्या वैज्ञानिक रूप से संभव है दो बार काटना

इस विषय पर बात करते हुए पलामू के जाने-माने एक्सपर्ट डॉ. डी एस श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर सांप के एक बार ठीक तरीके से वार करने के बाद दोबारा उसी तरह से हमला करने की स्थिति बहुत सामान्य नहीं मानी जाती है। सांप के विषदंत यानी फेंग बहुत ही नाजुक और संवेदनशील होते हैं। काटते वक्त यदि इन विषदंतों में किसी प्रकार की चोट लग जाए या वे क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो सांप को दोबारा हमला करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, विषदंत टूट जाने या खराब हो जाने की स्थिति में सांप को अपना शिकार दबोचने और रोजमर्रा का भोजन करने में भी काफी दिक्कतें आ सकती हैं।

किन परिस्थितियों में दोबारा हमला करता है सांप

डॉ. डी एस श्रीवास्तव ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि यदि सांप का पहला हमला पूरी तरह से कामयाब नहीं हुआ हो और उसके विषदंत इंसान की त्वचा के अंदर ठीक से न धंसे हों, तो वह खुद को बचाने या गुस्से में आकर दोबारा काटने की कोशिश जरूर कर सकता है। ऐसी खास परिस्थितियों में सांप एक के बाद एक लगातार दो या तीन बार भी झपट्टा मार सकता है। हालांकि इसका मतलब यह कतई नहीं है कि सांप के हर हमले में उसके शरीर का जहर समान रूप से और पूरी मात्रा में इंसान के खून में पहुंचा हो।

इस तरह की घटनाओं को कैसे समझें

विशेषज्ञ का कहना है कि एक ही सांप द्वारा दो बार हमला किया जाना मुमकिन तो है, लेकिन दोनों ही बार पूरी क्षमता और प्रभाव के साथ विषदंतों का त्वचा के अंदर धंस जाना कोई आम बात नहीं है। कई बार लोगों को ऐसा लगता है कि उन्हें दो बार काटा गया है, जबकि असल में वह सांप के लगातार किए गए तीव्र हमलों या शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर हुए संपर्क का नतीजा होता है।

सर्पदंश की स्थिति में बरती जाने वाली जरूरी सावधानियां

डॉक्टर ने यह भी चेतावनी दी है कि सांप के काटने की किसी भी घटना को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। इस तरह के मामलों में घरेलू नुस्खे आजमाने या झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय गंवाना मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। पीड़ित व्यक्ति को बिना एक भी पल गंवाए तुरंत किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या बड़े अस्पताल ले जाना चाहिए, जहां डॉक्टरों द्वारा एंटी-स्नेक वेनम और अन्य जरूरी मेडिकल ट्रीटमेंट समय पर दिया जा सके। सांप को पकड़ने की कोशिश करने या उसके पीछे भागने के बजाय उससे हमेशा सुरक्षित दूरी बनाकर रखना और समय पर डॉक्टर की मदद लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।

सवाल-जवाब

क्या एक ही सांप किसी इंसान को दो बार काट सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार सांप का दोबारा हमला करना मुमकिन है, लेकिन दोनों बार पूरी ताकत से विषदंत चुभना सामान्य बात नहीं है।
पलामू में यह घटना कहां और कैसे हुई?
पलामू में एक व्यक्ति जब खेत में खीरा तोड़ रहा था, तब उसे एक ही सांप द्वारा दो बार डंसे जाने का मामला सामने आया।
सांप के दोबारा काटने में क्या दिक्कत आ सकती है?
काटने के दौरान विषदंत नाजुक होने के कारण क्षतिग्रस्त हो सकते हैं, जिससे सांप को दोबारा प्रहार करने में परेशानी होती है।
सांप के काटने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
झाड़-फूंक में समय गंवाने के बजाय पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए ताकि एंटी-स्नेक वेनम मिल सके।
घटना के बाद पीड़ित की मौजूदा हालत कैसी है?
अस्पताल में समय पर सही इलाज मिलने के बाद पीड़ित की हालत में सुधार हुआ है और वह पूरी तरह खतरे से बाहर है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·8 दिन पहले

मानसून के दौरान ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश जैसी स्वास्थ्य आपात स्थितियां केवल स्वास्थ्य जोखिम ही नहीं पैदा करतीं, बल्कि कृषि उत्पादकता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर डालती हैं। बुआई और कटाई के महत्वपूर्ण समय में किसान या श्रमिक के अस्वस्थ होने से खेतों में काम प्रभावित होता है और परिवारों पर अचानक चिकित्सा खर्च का आर्थिक बोझ बढ़ता है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूती, समय पर एंटी-वेनम की उपलब्धता और किफायती स्वास्थ्य बीमा का प्रसार ग्रामीण श्रमशक्ति और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

पलामू की यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और लोक स्वास्थ्य प्रबंधन की एक अलग तस्वीर पेश करती है। मानसून के दौरान सर्पदंश जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-वेनम की उपलब्धता और जनजागरूकता अभियानों का होना अत्यंत आवश्यक है। इस तरह के मामलों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और चिकित्सा विशेषज्ञों की सलाह से ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास को रोकने में भी मदद मिलती है, जो सुशासन और जनहित की नीतियों का एक अहम पहलू है।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

पलामू की यह घटना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि श्रम सुरक्षा पर भी सीधा प्रभाव डालती है। मानसून के समय किसानों और खेतिहर मजदूरों का खेतों में काम करना उनकी आजीविका की मजबूरी है, और ऐसे जोखिम भरे माहौल में सर्पदंश जैसे खतरे उत्पादकता को बाधित करते हैं। यदि समय पर चिकित्सा सहायता न मिले, तो यह ग्रामीण परिवारों के लिए वित्तीय संकट का कारण बन जाता है। इसलिए, कृषि बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करना और बीमा या आपातकालीन चिकित्सा सहायता का विस्तार करना ग्रामीण विकास और आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य कदम है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

बरसात के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की ऐसी घटनाएं प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर चिंता का विषय होती हैं। इस खबर में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को शामिल करना सराहनीय है, लेकिन साथ ही यह रेखांकित करना आवश्यक है कि ग्रामीण इलाकों के अस्पतालों में एंटीवेनम की उपलब्धता और जागरूकता अभियानों की क्या स्थिति है, ताकि मानसून के दौरान जनहानि को रोका जा सके।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

बरसात के मौसम में इस तरह की घटनाओं के बीच यह भी देखना जरूरी है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीवेनम की आपूर्ति और प्रोटोकॉल का पालन कितनी सख्ती से हो रहा है। अक्सर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सही प्रबंधन के अभाव में मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करने में समय बर्बाद होता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

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