झारखंड स्थित पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाला बेतला नेशनल पार्क तीन महीने के वार्षिक मानसून अवकाश के बाद 1 अक्टूबर से पर्यटकों के लिए दोबारा खुलने जा रहा है। बारिश के मौसम के बाद पूरा वन्य क्षेत्र घनी हरियाली की चादर ओढ़ चुका है और चारों तरफ प्राकृतिक छटा बिखर गई है। पार्क प्रबंधन ने पर्यटकों के आवागमन, ठहरने और जंगल सफारी की सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया है।
वन्यजीव दर्शन और प्राकृतिक सुंदरता
पलामू टाइगर रिजर्व का यह प्रमुख पर्यटन केंद्र वन्यजीव प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण रखता है। जंगल सफारी के सफर में आने वाले पर्यटकों को बाइसन, चीतल, सांभर, हिरण, भालू, हाथी और मोर जैसे कई जानवरों को उनके नैसर्गिक आवास में देखने का अवसर मिलता है। पहाड़ी भूभाग, घने जंगल और शांत वातावरण के बीच खुले वाहनों से भ्रमण करना रोमांच से भरपूर अनुभव कराता है।
जंगल सफारी का समय और नए नियम
पार्क प्रशासन ने पर्यटकों की सुविधा के लिए सफारी को दो अलग-अलग पारियों में संचालित करने का निर्णय लिया है। पहली पाली सुबह 6:00 बजे से 10:00 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेगी। प्रत्येक सफारी का समय लगभग डेढ़ घंटे निर्धारित किया गया है। इसके लिए आगंतुकों को पार्क में उपलब्ध पंजीकृत ओपन हुड वाहनों का स्लॉट पहले से आरक्षित कराना होगा। वर्ष 2025 से लागू व्यवस्था के अनुसार, पार्क की सीमा में केवल पंजीकृत वाहनों को ही जाने की मंजूरी दी जाती है। इस समय लगभग 30 पंजीकृत वाहनों से जंगल सफारी का संचालन कराया जा रहा है, जबकि किसी भी बाहरी निजी वाहन के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी है।
सफारी शुल्क और बैठने की क्षमता
जंगल सफारी के लिए प्रति वाहन 2450 रुपये का शुल्क तय किया गया है। इस निर्धारित राशि में करीब डेढ़ घंटे की जंगल यात्रा के साथ-साथ चालक और प्रशिक्षित गाइड की सेवाएं भी शामिल रहती हैं। एक वाहन में अधिकतम छह पर्यटकों के बैठने की व्यवस्था होती है। यदि पूरे छह लोग साथ मिलकर सफारी करते हैं, तो प्रति व्यक्ति खर्च लगभग 408 रुपये आता है। सफारी की प्रतीक्षा करने वाले पर्यटकों के लिए पार्क परिसर में एक सुव्यवस्थित वेटिंग हॉल भी उपलब्ध कराया गया है।
मानसून के बाद मरम्मत और नई सुविधाएं
वन विभाग के कर्मी निरंजन कुमार के अनुसार, बरसात के दिनों में क्षतिग्रस्त हुई आंतरिक सड़कों की मरम्मत का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही ट्री हाउस, कैंटीन परिसर और केचकी संगम के इको स्ट्रीट की मजबूती तथा सुरक्षा मानकों की गहन समीक्षा की गई है। पर्यटकों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण खान-पान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कैंटीन व्यवस्था को अपग्रेड किया गया है। पार्क आने वाले लोगों को स्मृति चिन्ह की दुकान और रिफ्रेशमेंट जैसी अन्य सुविधाएं भी आसानी से प्राप्त होंगी।
तीन महीने बंद रहने का वैज्ञानिक कारण
बेतला नेशनल पार्क के बंद रहने की निर्धारित समयसीमा 30 सितंबर को पूरी हो रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के दिशा-निर्देशों के तहत देश भर के टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क जुलाई, अगस्त और सितंबर के महीनों में सामान्य गतिविधियों के लिए बंद रखे जाते हैं। यह तीन महीने का समय वन्यजीवों के प्रजनन काल और प्राकृतिक पर्यावास के संरक्षण के लिए बेहद आवश्यक माना जाता है। इस अंतराल की समाप्ति के साथ ही पार्क को 1 अक्टूबर से नई ऊर्जा के साथ शुरू किया जा रहा है।
होटलों और रेस्ट हाउस में अग्रिम बुकिंग शुरू
पार्क के पुनः खुलने की घोषणा के साथ ही पर्यटकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। बेतला स्थित फॉरेस्ट रेस्ट हाउस, सरकारी टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स और आसपास के निजी होटलों में 1 अक्टूबर तथा उसके बाद पड़ने वाले सप्ताहांत के लिए कमरों की एडवांस बुकिंग तेजी से चल रही है। उम्मीद की जा रही है कि महीने की शुरुआत से ही पलामू के इस प्रसिद्ध वन क्षेत्र में सैलानियों की भारी भीड़ जुटेगी।
























