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कोकराझार के सिखना ज्वह्वलाव नेशनल पार्क में विश्व गैंडा दिवस पर वनकर्मियों को बांटे गए फील्ड सुरक्षा उपकरणअसम
23 सित॰ 2026, 1:09 pm (4 घंटे पहले)· 1

कोकराझार के सिखना ज्वह्वलाव नेशनल पार्क में विश्व गैंडा दिवस पर वनकर्मियों को बांटे गए फील्ड सुरक्षा उपकरण

असम के कोकराझार स्थित सिखना ज्वह्वलाव नेशनल पार्क की उलटापानी रेंज में विश्व गैंडा दिवस मनाया गया, जहाँ वन्यजीव संरक्षण मजबूत करने के साथ वनकर्मियों को सुरक्षा किट बांटी गई।

असम के कोकराझार जिले में स्थित सिखना ज्वह्वलाव राष्ट्रीय उद्यान के उलटापानी वन परिक्षेत्र में मंगलवार को विश्व गैंडा दिवस के उपलक्ष्य में एक विशेष जागरूकता और क्षमता विस्तार कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करना तथा मैदानी स्तर पर काम करने वाले वनकर्मियों के संसाधनों में सुधार लाना था। कार्यक्रम में वन विभाग, स्थानीय ग्रामीण आबादी और वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी गैर सरकारी संस्थाओं के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

संरक्षण रणनीति और जमीनी तैयारियों पर मंथन

इस संगोष्ठी में हाल्टूगांव वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी पी.के. भुइयां, आरण्यक संस्था के महासचिव एवं कार्यकारी निदेशक डॉ बिभव कुमार तालुकदार, उलटापानी वन परिक्षेत्र अधिकारी मिंटू बोरो और एवरग्रीन चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष राजीब नार्जरी समेत कई प्रमुख अधिकारी एवं मैदानी कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में राष्ट्रीय उद्यान के भीतर मौजूद संरक्षण उपायों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई और सुरक्षा प्रणाली को और प्रभावी बनाने के उपायों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने वनकर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने, आधुनिक मैदानी उपकरण उपलब्ध कराने और प्रशासनिक समन्वय को धार देने की आवश्यकता जताई।

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मैदानी सुरक्षा कर्मियों को आवश्यक किट का वितरण

वन सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करने के संकल्प के तहत आरण्यक द्वारा उलटापानी रेंज के सुरक्षाकर्मियों को जरूरी फील्ड सामग्री का वितरण किया गया। कर्मचारियों को कठिन और प्रतिकूल मौसम में गश्त के दौरान राहत देने के उद्देश्य से मजबूत फील्ड जूते, उच्च गुणवत्ता वाले रेन गियर तथा रिचार्जेबल रेंजर टॉर्च प्रदान की गई। यह उपकरण ऊबड़-खाबड़ रास्तों, घने जंगलों और भारी बारिश के बीच पेट्रोलिंग करने वाले सुरक्षाकर्मियों की गतिशीलता, सुरक्षा और दक्षता को बढ़ाने में मदद करेंगे।

सामूहिक भागीदारी से वन संपदा की निगरानी

कार्यक्रम के दौरान इस बात को रेखांकित किया गया कि जंगलों और दुर्लभ वन्यजीवों की रक्षा केवल प्रशासनिक आदेशों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए स्थानीय समुदायों और विशेषज्ञों के मिले-जुले ज्ञान का उपयोग आवश्यक है। अवैध शिकार और वन क्षेत्र में होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए यह त्रिस्तरीय साझेदारी महत्वपूर्ण साबित होगी। इस पूरे आयोजन के समन्वय में बिनीता बरुवती, वसीमा बेगम, बिजीत बारो, मिजिंग बोरो और धनंजय मशाहारी की टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।

सवाल-जवाब

विश्व गैंडा दिवस का यह कार्यक्रम असम में कहाँ आयोजित हुआ?
यह आयोजन असम के कोकराझार जिले में स्थित सिखना ज्वह्वलाव राष्ट्रीय उद्यान के उलटापानी वन परिक्षेत्र में हुआ।
वनकर्मियों को कौन-से सुरक्षा उपकरण बांटे गए?
कर्मियों को कठिन मौसम में काम करने के लिए फील्ड शूज, रेन गियर और रिचार्जेबल रेंजर टॉर्च प्रदान की गई।
सुरक्षा किट का वितरण किस संस्था द्वारा किया गया?
वन्यजीव संरक्षण संगठन आरण्यक द्वारा यह आवश्यक सामग्री वितरित की गई।
बैठक में किन मुख्य विषयों पर चर्चा हुई?
वन्यजीव संरक्षण को कड़ा करने, कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने, फील्ड लॉजिस्टिक्स सुधारने और स्थानीय समुदायों के साथ तालमेल बढ़ाने पर चर्चा हुई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·3 घंटे पहले

जंगल में गश्त करने वाले इन वनकर्मियों को ऐसे सुरक्षा उपकरण मिलने से काम वाकई आसान होगा। क्या बाकी दूसरे नेशनल पार्कों में भी ऐसी किट बांटने की कोई योजना है?

Priya Sharma@priya-sharma·3 घंटे पहले

रविकेश, सच कहा आपने! इन सुरक्षा उपकरणों से उनके लिए जंगल में रात-दिन गश्त करना काफ़ी आसान हो जाएगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

जंगलों की रखवाली करने वालों को ऐसे बुनियादी उपकरण मिलना बहुत ज़रूरी था, वरना वे अंधेरे और बारिश में कैसे गश्त करते। बस यह समझ नहीं आया कि असम के बाकी नेशनल पार्कों के वनकर्मियों को भी ऐसी किट कब तक मिलेगी?

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 घंटे पहले

करन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछली बार जब मैं उलटापानी गया था, तब एक गार्ड ने बारिश में भीगते हुए टॉर्च के बिना गश्त करने की बात बताई थी।

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