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पाली में बना दुनिया का पहला 3D ओम आकार का मंदिर, आसमान से ऐसा दिखता है अनोखा नजाराराजस्थान
18 सित॰ 2026, 12:14 pm (7 दिन पहले)· 0

पाली में बना दुनिया का पहला 3D ओम आकार का मंदिर, आसमान से ऐसा दिखता है अनोखा नजारा

राजस्थान के पाली जिले के जाडन गांव में दुनिया का पहला 3D ओम आकार का मंदिर बनकर तैयार हुआ है। यह विशाल परिसर 30 साल की लंबी मेहनत और 250 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है।

ब्रह्मांड की सबसे पवित्र ध्वनि माने जाने वाले 'ओम' के प्रतीक को अब जमीन पर एक भव्य आकार मिल चुका है। राजस्थान के पाली जिले के जाडन गांव में स्थित यह अनोखा मंदिर दुनिया का इकलौता ऐसा ढांचा है जो ऊपर से देखने पर पूरी तरह 'ओम' जैसा नजर आता है। इसकी इस खूबी को जमीन पर खड़े होकर नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसके लिए आसमान की ऊंचाई से ही इसका असली स्वरूप नजर आता है। जाडन आश्रम के नाम से जाने जाने वाले इस स्थान पर देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

आसमान से नजर आता है दिव्य स्वरूप

जब कोई इस मंदिर को जमीन के तल से देखता है, तो उसे केवल सामान्य इमारतें, गुंबद और सुंदर नक्काशी ही दिखाई देती है। हालांकि, ड्रोन या उपग्रह चित्रों के जरिए जब इसे आसमान से देखा जाता है, तो इसकी असली भव्यता सामने आती है। इस पूरी संरचना में ओम के घुमावदार हिस्से बड़े गलियारों और कमरों के रूप में बनाए गए हैं। इसके ऊपरी चंद्र भाग में एक बड़ा जलाशय तैयार किया गया है, जबकि सबसे ऊपर स्थित बिंदु के स्थान पर 135 फीट ऊंचा मुख्य शिखर खड़ा किया गया है।

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तीन दशकों की लंबी मेहनत और वास्तुकला की चुनौती

इस अद्भुत परियोजना की शुरुआत आज से तीन दशक पहले वर्ष 1995 में स्वामी महेश्वरानंद पुरी महाराज के मार्गदर्शन में हुई थी। बंजर और वीरान इलाके में फैली 250 एकड़ से अधिक जमीन पर इस तरह के जटिल डिजाइन को उतारना आसान काम नहीं था। चूंकि ओम के नक्शे में कोई भी रेखा सीधी नहीं होती, इसलिए इंजीनियरों और कारीगरों के लिए बिना सीधी दीवारों के इतनी बड़ी बहुमंजिला इमारत खड़ी करना एक बड़ी चुनौती थी। बंशी पहाड़पुर के खास पत्थरों और हजारों कारीगरों के दशकों के परिश्रम के बाद यह संरचना अब पूरी हुई है।

शिव प्रतिमाओं और ज्योतिर्लिंगों का अनूठा संगम

इस चार मंजिला विशाल परिसर के भीतर अध्यात्म का अनूठा संसार बसा हुआ है। इस परिसर में कुल 1008 अलग-अलग कक्ष और भगवान शिव की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। इसके अलावा यहां देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन भी एक ही स्थान पर हो जाते हैं। पूरे भवन में लगभग 2000 खंभे बनाए गए हैं जिन पर पारंपरिक नक्काशी की गई है। यहां ध्यान और योग के लिए बड़े हॉल बनाए गए हैं तथा गुरुदेव की समाधि भी इसी परिसर में स्थित है।

सवाल-जवाब

दुनिया का पहला 3D ओम मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के पाली जिले के जाडन गांव में स्थित है।
इस मंदिर की आधारशिला कब रखी गई थी?
इस मंदिर की नींव वर्ष 1995 में रखी गई थी।
इस मंदिर का निर्माण किसने कराया है?
इस मंदिर की परिकल्पना और निर्माण स्वामी महेश्वरानंद पुरी महाराज के मार्गदर्शन में हुआ है।
मंदिर का मुख्य शिखर कितना ऊंचा है?
मंदिर के मुख्य शिखर की ऊंचाई 135 फीट है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·6 दिन पहले

बिना किसी सीधी दीवार के 250 एकड़ में फैले जटिल 'ओम' प्रतीक को निर्मित करना वास्तुकला और आधुनिक स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग का एक अनूठा उदाहरण है। तकनीकी दृष्टिकोण से देखें तो इस तरह की गैर-रेखीय 3D ज्यामिति को धरातल पर सटीक रूप से ढालना एडवांस मैपिंग और डिज़ाइन इनोवेशन की बड़ी उपलब्धि है। आसमान से दिखने वाला यह नजारा यह भी साबित करता है कि आज ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग टेक्नोलॉजी किस प्रकार विशाल निर्माण कार्यों के विज़ुअलाइज़ेशन और मैपिंग को नया आयाम दे रही हैं। यह परियोजना जिओ-स्पेशियल तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

पाली जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 250 एकड़ में निर्मित यह अनूठा परिसर केवल आध्यात्मिक केंद्र नहीं, बल्कि राजस्थान में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला ढांचा है। तीन दशकों में तैयार यह परियोजना दर्शाती है कि कैसे दीर्घकालिक सांस्कृतिक बुनियादी ढांचा ग्रामीण विकास, स्थानीय रोजगार और हस्तशिल्प उद्योग को गति दे सकता है। राज्य की पर्यटन नीति और लोक प्रशासन के दृष्टिकोण से, अब ऐसे दूरस्थ क्षेत्रों में संपर्क मार्गों, बुनियादी सुविधाओं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नागरिक प्रबंधन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

अर्जुन के विश्लेषण को आर्थिक और वित्तीय दृष्टिकोण से आगे बढ़ाएं तो ऐसे दीर्घकालिक सांस्कृतिक बुनियादी ढांचे का 'मल्टीप्लायर इफेक्ट' बेहद व्यापक होता है। 250 एकड़ में निर्मित यह परिसर केवल धार्मिक आकर्षण नहीं, बल्कि आतिथ्य, स्थानीय परिवहन, एमएसएमई और सेवा क्षेत्र में दीर्घकालिक पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने वाला आर्थिक केंद्र है। वैश्विक स्तर पर वेलनेस और स्पिरिचुअल टूरिज्म में लगातार वृद्धि हो रही है। यदि राज्य सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर इस क्षेत्र में संरचित अवसंरचना, डिजिटल सेवाओं और पीपीपी (PPP) मॉडल के तहत निवेश को गति देते हैं, तो यह दूरस्थ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सेवा-संचालित विकास का नया मॉडल प्रदान कर सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

250 एकड़ में फैले इस विशाल धार्मिक परिसर में देश-विदेश से जुटने वाली भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का पुख्ता ढांचा खड़ा करना बेहद जरूरी होगा। इतने बड़े और जटिल बहुमंजिला ढांचे में भगदड़ जैसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए सुरक्षित निकास तंत्र, ड्रोन निगरानी, ट्रैफिक डायवर्जन और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी। इतने बड़े सार्वजनिक स्थल पर जनसुरक्षा और अपराध नियंत्रण के लिए मजबूत इंटेलिजेंस और सीसीटीवी सर्विलांस नेटवर्क का होना अनिवार्य है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

करण की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस विशाल परिसर के शुरू होने से क्षेत्रीय बुनियादी ढाँचे और शासन प्रणाली पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा। केवल कानून-व्यवस्था ही नहीं, बल्कि संपर्क मार्गों का चौड़ीकरण, अपशिष्ट प्रबंधन, पानी की निरंतर आपूर्ति और सार्वजनिक परिवहन जैसी नागरिक सुविधाओं का मजबूत होना आवश्यक है। ऐसे बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्रों के प्रबंधन के लिए स्थानीय प्रशासन, पर्यटन विभाग और नागरिक निकायों के बीच एक स्थायी अंतर-विभागीय समन्वय तंत्र की आवश्यकता होगी, ताकि श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही के दौरान स्थानीय ढाँचा चरमरा न जाए।

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