मरुधरा के विभिन्न अंचलों में बादलों की आवाजाही और तापमान का मिजाज दो बिल्कुल अलग दिशाओं में बढ़ता दिखाई दे रहा है। चौबीस सितंबर को सामने आई आधिकारिक मौसम गणना के आधार पर पच्चीस सितंबर से राज्य के पूर्वी छोर पर मौसमी हलचल तेज होने के संकेत मिले हैं। वातावरण में बनने वाले दबाव के चलते आगामी दो से तीन दिनों की अवधि तक कई इलाकों में बादलों की गर्जना, आकाशीय बिजली चमकने और झोंकेदार तूफानी हवाओं के बीच हल्की फुहारें पड़ने के आसार जताए गए हैं। इसके ठीक विपरीत, थार के रेगिस्तानी भूभाग और पश्चिमी अंचल में फिलहाल पानी बरसने का कोई अनुमान नहीं है, जिससे वहां की आबोहवा पूरी तरह से खुश्क बनी रहेगी। भौगोलिक भिन्नता के चलते एक ही दिन में सूबे के दोनों सिरों पर अलग-अलग मौसमी परिस्थितियां देखने को मिलेंगी।
पूर्वी अंचल में बूंदाबांदी और तेज हवाओं की सक्रियता
पच्चीस सितंबर की सुबह से ही पूर्वी राजस्थान के वायुमंडल में नमी का प्रभाव नजर आ सकता है। विशेष रूप से हाड़ौती के कोटा संभाग और मेवात-ब्रज से जुड़े भरतपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले इलाकों में कहीं-कहीं मेघ बरसने की परिस्थितियां बन रही हैं। हालांकि यह वर्षा बहुत मूसलाधार नहीं होगी, बल्कि रुक-रुक कर फुहारों अथवा हल्की वर्षा के रूप में दर्ज की जाएगी। इस मौसमी बदलाव के दौरान आकाशीय बिजली कड़कने तथा बादलों के जोर से गरजने की घटनाएं भी सामने आ सकती हैं। वातावरण में अचानक बदलाव आने की वजह से तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली झोंकेदार अंधड़ जैसी हवाएं भी मैदानी हिस्सों को प्रभावित करेंगी, जिससे खुले इलाकों में राहगीरों को सतर्कता बरतनी होगी।
सभी अठाईस पूर्वी जिलों के लिए ग्रीन सिग्नल, कोई गंभीर अलर्ट नहीं
वर्षा और बादलों की हलचल का अंदेशा होने के बावजूद राज्य के पूर्वी हिस्से के किसी भी प्रशासनिक जिले पर गंभीर आपदा या नुकसान की आशंका नहीं जताई गई है। जिलेवार जारी किए गए आकलन में सभी अठाईस जिलों को हरे रंग के सामान्य संकेत में रखा गया है, जिसका अर्थ यह है कि आम जनजीवन को बाधित करने वाली कोई विषम परिस्थिति नहीं बनेगी। प्रांतीय राजधानी जयपुर के अतिरिक्त अजमेर, दौसा, अलवर, डीग, करौली, धौलपुर, सवाई माधोपुर और टोंक जैसे मैदानी क्षेत्रों में स्थिति सामान्य रहेगी। इसी प्रकार दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र के कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के साथ-साथ मेवाड़ व वागड़ अंचल के भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, उदयपुर, सलूम्बर और राजसमंद में भी कोई विशेष चेतावनी प्रभावी नहीं की गई है। अरावली क्षेत्र के सिरोही, ब्यावर, सीकर, झुंझुनूं, खैरथल-तिजारा तथा कोटपुतली-बहरोड़ के नागरिकों को भी बिना किसी गंभीर चेतावनी के सिर्फ बादलों की सरगर्मी का अनुभव होगा।
पश्चिमी अंचल में भीषण तपिश और सूखे हालात
रेगिस्तानी धरातल वाले पश्चिमी राजस्थान में पच्चीस सितंबर को बादलों की मेहरबानी की कोई गुंजाइश नहीं दिख रही है। दैनिक स्तर पर आंके गए वर्षा चार्ट में इस पूरे भूभाग को पूरी तरह सूखा और वर्षा-रहित श्रेणी में रखा गया है। वर्षा की अनुपस्थिति के कारण यहां गर्मी का प्रकोप लगातार बना हुआ है। पश्चिमी अंचल के अधिकांश शहरों और कस्बों में दिन का चरम तापमान चालीस डिग्री सेल्सियस के निशान को पार कर चुका है। सामान्य मौसमी औसत की तुलना में यह आंकड़ा लगभग चार से पांच डिग्री सेल्सियस तक अधिक चल रहा है, जिससे दोपहर के समय लू जैसे थपेड़ों और तेज चुभन भरी धूप का अहसास हो रहा है।
अड़तालीस घंटे बाद गर्मी से मिलेगी क्रमिक राहत
कड़ी धूप और उमस के बीच जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के निवासियों के लिए राहत भरी खबर भी सामने आई है। पच्चीस सितंबर के चौबीस घंटे बीत जाने के उपरांत यानी आगामी अड़तालीस घंटों की मियाद पूरी होने पर पारे में गिरावट दर्ज की जाएगी। अनुमान के अनुसार अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की कमी आ सकती है। हालांकि पच्चीस सितंबर को दिन भर गर्म मौसम का सामना करना पड़ेगा, लेकिन उसके बाद पारे की यह क्रमिक नरमी वातावरण को काफी हद तक ठंडा करेगी और लोगों को चिलचिलाती धूप से सुकून प्रदान करेगी।
तेरह पश्चिमी जिलों में नहीं रहेगा कोई मौसमी खतरा
सूखे मौसम के बीच पश्चिमी राजस्थान के सभी तेरह प्रशासनिक जिलों को भी किसी भी प्रकार के खतरे या चेतावनी से मुक्त रखा गया है। थार के प्रमुख जिलों बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, बीकानेर, फलौदी, जोधपुर और जालौर में आसमान साफ अथवा शुष्क रहेगा। इसी प्रकार नागौर, डीडवाना-कुचामन, पाली, चूरू, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर में भी मौसम विभाग ने कोई चेतावनी जारी नहीं की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे पश्चिमी हिस्से में खेती-किसानी और दैनिक कामकाज बिना किसी मौसमी व्यवधान के संचालित हो सकेंगे।
प्रमुख शहरों का संक्षिप्त विवरण
राजधानी जयपुर में पच्चीस सितंबर को कोई चेतावनी नहीं है, फिर भी पूर्वी बेल्ट का हिस्सा होने के कारण हल्की फुहारें, गर्जना और तीस से चालीस किलोमीटर प्रति घंटा की हवाएं कभी भी असर दिखा सकती हैं। कोटा और भरतपुर संभाग के कस्बों में छिटपुट बारिश के दौर देखने को मिलेंगे, हालांकि इन दोनों जिला मुख्यालयों के लिए भी कोई अलग से चेतावनी दर्ज नहीं है। पश्चिमी सिरे के जोधपुर शहर में धूप खिली रहेगी, शुष्कता बनी रहेगी और पारा चालीस डिग्री से ऊपर दर्ज किया जाएगा। उत्तरी छोर पर स्थित श्रीगंगानगर में भी मौसम पूरी तरह सूखा रहेगा और कोई चेतावनी नहीं रहेगी, जहां आगामी अड़तालीस घंटों के बाद तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस की राहत की उम्मीद बंधी है।



















