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भारतीय सेना के अत्याधुनिक एफआरसीवी टैंक के सामने कैसी होगी पांच मोर्चों पर जंगभारत
1 सित॰ 2026, 10:59 am (1 घंटे पहले)· 2

भारतीय सेना के अत्याधुनिक एफआरसीवी टैंक के सामने कैसी होगी पांच मोर्चों पर जंग

भारतीय सेना के आने वाले मुख्य युद्धक टैंक FRCV को केवल दुश्मन के टैंकों से ही नहीं, बल्कि ड्रोन, मिसाइलों, तोपखाने और बारूदी सुरंगों जैसे कई आधुनिक खतरों का सामना करना होगा। रक्षा मंत्रालय ने इसके लिए AoN को मंजूरी दी है।

भारतीय सेना के आने वाले मुख्य युद्धक टैंक यानी Future Ready Combat Vehicle की जब भी बात होती है, तो आमतौर पर उसकी मारक गन, मजबूत कवच, इंजन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की खूबियां ही चर्चा में रहती हैं। लेकिन इस अत्याधुनिक बख्तरबंद वाहन की वास्तविक परीक्षा इन पारंपरिक पैमानों से कहीं अधिक व्यापक होगी। जिस तरह के आधुनिक और जटिल युद्धक्षेत्र के लिए FRCV को तैयार किया जा रहा है, वहां यह जरूरी नहीं होगा कि दुश्मन का मुकाबला करने के लिए सामने कोई दूसरा टैंक ही खड़ा मिले। मैदान में विरोधी आसमान के जरिए ड्रोन भेज सकता है, लंबी दूरी से एंटी-टैंक मिसाइलें दाग सकता है, भारी तोपखाने से गोले बरसा सकता है, जमीन के नीचे बारूदी सुरंगें बिछा सकता है और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के हथकंडों से टैंक के सेंसर तथा संचार तंत्र को जाम करने की कोशिश कर सकता है।

रक्षा मंत्रालय की मंजूरी और बुनियादी आवश्यकताएं

रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2024 में FRCV की खरीद के लिए Acceptance of Necessity यानी AoN को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान की थी। सरकार की तरफ से इस बात पर जोर दिया गया था कि यह भविष्य का मुख्य युद्धक टैंक बेहतरीन मोबिलिटी, सभी तरह के भूभाग पर चलने की क्षमता, बहुस्तरीय सुरक्षा, सटीक निशाना साधने की ताकत और वास्तविक समय की युद्धक्षेत्र की जानकारी से लैस होगा। हालांकि, सबसे बड़ा और अहम सवाल यह है कि आने वाले समय के रणक्षेत्र में इस टैंक को वास्तव में किस-किस तरह के बहुआयामी खतरों से निपटना होगा।

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टैंक युद्ध की बदलती तस्वीर

एक दौर था जब किसी मुख्य युद्धक टैंक का सबसे बड़ा और इकलौता मुकाबला करने वाला प्रतिद्वंद्वी दूसरा टैंक ही माना जाता था। मैदान में टैंक आमने-सामने डटे रहते थे और उनकी ताकत का फैसला उनकी मुख्य गन, मोटाई वाले कवच और चलने की रफ्तार यानी मोबिलिटी से होता था। लेकिन आज के दौर में युद्ध की यह पूरी तस्वीर काफी हद तक बदल चुकी है। आधुनिक सैन्य संघर्षों में किसी टैंक को नेस्तनाबूद करने के लिए दुश्मन को सामने से दूसरा टैंक भेजने की कोई अनिवार्यता नहीं बची है। आकाश में मंडराता एक छोटा सा ड्रोन टैंक की सटीक स्थिति का पता लगा सकता है, दूसरा ड्रोन उस पर सीधा हमला कर सकता है, दूर बैठे किसी मिसाइल ऑपरेटर को उसकी लोकेशन भेजी जा सकती है और तोपखाना कुछ ही पलों में उस पूरे इलाके को खंडहर में बदल सकता है। इसका सीधा अर्थ यह है कि FRCV को केवल एक ऐसा वाहन नहीं बनना होगा जो सिर्फ दूसरे टैंकों को तबाह कर सके, बल्कि उसे ऐसे रणक्षेत्र में जीवित रहना होगा जहां खतरा स्पष्ट रूप से दिखाई देने से पहले ही हमला शुरू हो सकता है।

ड्रोन का खतरा: सबसे सस्ता और पेचीदा संकट

आने वाले समय में FRCV के सामने सबसे बड़ी और लगातार बनी रहने वाली चुनौतियों में ड्रोन की भूमिका सबसे अहम होगी। ड्रोन का महत्व सिर्फ इसलिए नहीं है कि वह अपने साथ विस्फोटक लेकर हमला कर सकता है, बल्कि उसकी असली ताकत यह है कि वह विरोधी को छिपकर देखने की असाधारण क्षमता मुहैया कराता है। एक छोटा मानव रहित हवाई वाहन किसी भी टैंक की स्थिति का आसानी से पता लगा सकता है, उसकी हर गतिविधि पर लगातार नजर रख सकता है और फिर उसकी लाइव लोकेशन दूसरे घातक हथियारों तक पहुंचा सकता है। इसके बाद हमला किसी अन्य प्लेटफॉर्म से किया जा सकता है। यही मुख्य वजह है कि आधुनिक युद्धों में किसी टैंक की दृश्यता और उसका सिग्नेचर बेहद महत्वपूर्ण हो चुका है। उदाहरण के लिए, रूस के दो-तिहाई से अधिक टैंकों को फर्स्ट-पर्सन-व्यू यानी FPV ड्रोन्स के माध्यम से ही निशाना बनाया गया है। यदि विरोधी आपको लगातार देख रहा है, तो आपके पास किसी भी हमले से पहले अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय बचता है। FPV ड्रोन्स ने इस समस्या को और अधिक जटिल बना दिया है, क्योंकि ये अपेक्षाकृत बहुत छोटे और सस्ते सिस्टम होते हैं जिन्हें बड़ी तादाद में तैनात किया जा सकता है। ऐसे में FRCV के सामने केवल यह सवाल नहीं होगा कि वह किसी बड़ी मिसाइल के वार को रोक सकता है या नहीं, बल्कि मुख्य चुनौती यह होगी कि क्या वह दर्जनों या सैकड़ों छोटे ड्रोन्स के बीच भी खुद को सुरक्षित रख पाएगा।

शीर्ष से हमला: टॉप-अटैक मिसाइलों की चुनौती

दशकों तक टैंकों की सुरक्षा का पूरा ढांचा इसी मूल सोच पर आधारित रहा कि सबसे मजबूत और मोटा कवच उसके सामने और किनारों पर होना चाहिए। लेकिन आधुनिक सैन्य तकनीकों ने युद्ध के हमलों का पूरा कोण ही बदल कर रख दिया है। टॉप-अटैक हथियार सीधे टैंक के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाते हैं, जहां पारंपरिक रूप से बख्तरबंद सुरक्षा अपेक्षाकृत काफी कम होती है। इसका सीधा मतलब यह है कि FRCV के लिए केवल एक भारी और मोटा कवच होना ही पर्याप्त नहीं साबित होगा। उसे ऊपर से आने वाले खतरे को काफी पहले पहचानना होगा और फिर यह तुरंत तय करना होगा कि उस आसन्न संकट से कैसे बचा जाए। यही वजह है कि भविष्य के टैंक के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा यानी multilayered protection अनिवार्य हो जाती है, और रक्षा मंत्रालय ने भी अपनी घोषणा में इसे प्रमुख आवश्यकता के रूप में रेखांकित किया है।

दूर बैठे शत्रु की मार: एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें

एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें यानी ATGM भी FRCV के लिए एक अत्यंत गंभीर खतरा साबित होंगी। इन आधुनिक हथियारों की सबसे बड़ी ताकत यह होती है कि हमला करने वाले सैनिक को टैंक के ठीक सामने आने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। वह काफी सुरक्षित दूरी से छिपकर टैंक को निशाना बना सकता है। यही कारण है कि FRCV की सुरक्षा व्यवस्था को एक साथ कई स्तरों पर काम करना होगा, जिसमें खतरे की पहचान करना, समय रहते चेतावनी देना, दुश्मन के हमले को भ्रमित करना और जरूरत पड़ने पर आने वाली मिसाइल को हवा में ही नष्ट करना शामिल है। यहीं पर एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम यानी APS की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। APS का मुख्य उद्देश्य किसी भी आने वाली मिसाइल या रॉकेट जैसे घातक खतरों को टैंक तक पहुंचने से पहले ही हवा में रोक देना होता है। हालांकि, केवल टैंक पर APS लगा देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि उसे वास्तविक युद्ध की भीषण परिस्थितियों में तेज, सटीक और पूरी तरह भरोसेमंद भी साबित करना होगा।

तोपखाना: वह अदृश्य प्रहार जिसे टैंक देख भी नहीं पाएगा

रणक्षेत्र में तोपखाना यानी artillery एक ऐसा गंभीर खतरा है जिसका सामना करते समय दुश्मन टैंक के सामने प्रत्यक्ष रूप से दिखाई भी नहीं देता, फिर भी टैंक पर भारी गोलाबारी शुरू हो सकती है। आज के युद्धों में आधुनिक ड्रोन्स और उन्नत युद्धक्षेत्र सेंसर सीधे तौर पर तोपखाने को टारगेट की पल-पल की जानकारी मुहैया कराते हैं। इसका अर्थ यह है कि FRCV के लिए केवल अपने आसपास की स्थिति को देख पाना ही पर्याप्त नहीं होगा। उसे यह भी समझना होगा कि कौन सा सेंसर उस पर नजर गड़ाए हुए है और उसकी जानकारी किस हथियार प्रणाली तक पहुंच रही है। इसलिए युद्धक्षेत्र की व्यापक जानकारी और उच्च गतिशीलता उसकी सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बन जाते हैं। यदि FRCV को यह आभास हो जाए कि उसकी सटीक स्थिति दुश्मन को पता चल चुकी है, तो उसके पास वहां से तुरंत स्थान बदलने की क्षमता होनी चाहिए।

बारूदी सुरंगें: टैंक को नष्ट किए बिना उसकी गति थामना

युद्ध के मैदान में हमेशा किसी टैंक को पूरी तरह नष्ट करना ही एकमात्र उद्देश्य नहीं होता है। यदि किसी टैंक को गतिहीन यानी immobilise कर दिया जाए और उसकी आवाजाही की क्षमता को हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाए, तो वह अपने आप ही मैदान में एक आसान शिकार बन जाता है। माइंस और आईईडी इसी वजह से किसी भी बख्तरबंद दस्ते के लिए अत्यंत खतरनाक साबित होते हैं। यदि टैंक का ट्रैक या उसका सस्पेंशन क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो उसकी सबसे बड़ी ताकत यानी उसकी निरंतर गतिशीलता ही खत्म हो जाती है।

सवाल-जवाब

FRCV का पूरा नाम क्या है?
FRCV का पूरा नाम Future Ready Combat Vehicle है, जो भारतीय सेना का भविष्य का मुख्य युद्धक टैंक है।
रक्षा मंत्रालय ने FRCV के लिए AoN को कब मंजूरी दी थी?
रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2024 में FRCV के लिए Acceptance of Necessity यानी AoN को मंजूरी दी थी।
आधुनिक युद्ध में FRCV के सामने सबसे बड़े खतरे कौन से हैं?
FRCV के सामने मुख्य खतरों में ड्रोन, टॉप-अटैक मिसाइलें, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें, भारी तोपखाना और बारूदी सुरंगें शामिल हैं।
रूस के अधिकांश टैंकों को किस हथियार से निशाना बनाया गया है?
रूस के दो-तिहाई से अधिक टैंकों को फर्स्ट-पर्सन-व्यू यानी FPV ड्रोन्स के जरिए निशाना बनाया गया है।
APS का मुख्य कार्य क्या होता है?
एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम यानी APS का मुख्य उद्देश्य आने वाली मिसाइलों या रॉकेटों को टैंक तक पहुंचने से पहले हवा में रोकना है।
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