झालावाड़ नेशनल हाईवे पर मुकुंदरा हिल्स की प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित दर्रा की नाल में यातायात की समस्या लगातार विकट बनी हुई है। यहां आठ लेन सड़क परियोजना के हिस्से के रूप में टनल का निर्माण तो पूरा कर लिया गया है, लेकिन इसके दोनों मुहानों को पूरी तरह से यातायात के लिए नहीं खोला गया है। नतीजतन, आज भी पूरा ट्रैफिक पुराने और बेहद संकरे रेलवे अंडरपास के ऊपर निर्भर है। स्थिति यह है कि मार्ग पर किसी भी वाहन के खराब होने या जरा सी तकनीकी बाधा आने पर लंबा चक्काजाम लग जाता है, जिससे गुजरने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
पुराने और संकरे रास्ते की मजबूरी
क्षेत्र में ट्रैफिक नियंत्रण में जुटे पुलिस कांस्टेबल अजीत सिंह ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि हाल ही में पत्थरों से लदा एक भारी वाहन इस रेलवे अंडरपास के बिलकुल पास अचानक तकनीकी खराबी का शिकार होकर रुक गया था। रास्ता बहुत संकरा होने की वजह से उस बड़े वाहन को वहां से हटाने और रास्ता साफ करने में काफी अधिक समय बर्बाद हुआ। इसके अलावा, मानसून के दिनों में सड़क की सतह पर उभर आए गड्ढे और इस रूट पर दिनभर दौड़ने वाले भारी भरकम ट्रकों का भारी दबाव जाम की स्थिति को और अधिक गंभीर बना देता है। यातायात पुलिसकर्मियों को गाड़ियों की कतारों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाकर व्यवस्था बहाल करने के लिए काफी पसीना बहाना पड़ता है।
टनल के अधूरे संचालन से बढ़ी मुश्किलें
इस भीषण जाम के बीच फंसे कोटा के रहने वाले यात्री दिव्यांश पांडे और राहगीर गौरव तिवारी ने अपनी व्यथा साझा करते हुए कहा कि इतनी लागत से दर्रा टनल का निर्माण किए जाने के बावजूद आम नागरिकों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है। उन्होंने बताया कि इस आठ लेन परियोजना के तहत टनल और अंडरपास का निर्माण करोड़ों रुपये खर्च करके हुआ है, लेकिन वर्तमान हालात यह हैं कि टनल का दूसरा रूट और इसकी पूरी लेन को सुचारू रूप से संचालित नहीं किया गया है। आवागमन केवल एक ही तरफ सीमित होने के कारण बड़े और भारी वाहनों को आज भी उसी पुराने और तंग रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जो जाम की मुख्य वजह है।
एम्बुलेंस और मरीजों की अटकी सांसें
क्षेत्रीय नागरिकों और सफर करने वाले लोगों ने बताया कि झालावाड़, बारां और पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से गंभीर हालत वाले मरीजों को लेकर एम्बुलेंस इसी मार्ग से होते हुए कोटा के बड़े चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचती हैं। दर्रा की नाल में रोजाना लगने वाले इन लंबे जामों के कारण कई बार आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं बीच रास्ते में ही ठप हो जाती हैं, जिससे मरीजों की जिंदगी दांव पर लग जाती है। परेशान यात्रियों और स्थानीय निवासियों ने राज्य सरकार के साथ-साथ नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) से पुरजोर मांग की है कि टनल और उससे जुड़े दोनों रास्तों के सभी बचे हुए तकनीकी कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए, ताकि इस क्षेत्र को इस स्थायी समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।


















