पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर इलाके में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को उनकी मूल जगह से हटाकर एक नजदीकी जंगल में फेंक दिया गया। इस घटना की जानकारी सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है और कांग्रेस पार्टी में भारी गुस्सा देखने को मिल रहा है। स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने इस मामले में न केवल कड़ी आपत्ति जताई है, बल्कि प्रशासन के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराते हुए एक बड़े आंदोलन का अल्टीमेटम भी दे डाला है।
कांग्रेस पार्टी ने इस घटना से जुड़े कुछ सुबूत के तौर पर तस्वीरें भी सार्वजनिक की हैं, जिनमें देश के इस महान नेता की मूर्ति झाड़ियों और पेड़ों के बीच जंगल की जमीन पर पड़ी हुई साफ दिखाई दे रही है। पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने इस कृत्य की निंदा करते हुए प्रशासन से दो प्रमुख मांगें की हैं। पहली मांग यह है कि इस घिनौनी हरकत को अंजाम देने वाले सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और दूसरी मांग यह है कि प्रतिमा को पूरी गरिमा और सम्मान के साथ दोबारा उसकी पुरानी जगह पर स्थापित किया जाए।
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभांकर सरकार ने भी इस पूरी घटना पर अपनी गहरी नाराजगी और असंतोष व्यक्त किया है। पार्टी की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की गई जानकारी के मुताबिक, दुर्गापुर के हर्षवर्धन प्राइमरी स्कूल के पास बने मेडिटेशन सेंटर के सामने पंडित नेहरू की यह प्रतिमा स्थापित थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने क्रेन का इस्तेमाल करके इस मूर्ति को वहां से जबरन उखाड़ा और फिर पास के जंगल में फेंक दिया। इस बात की जानकारी मिलते ही जिला कांग्रेस इकाई ने तुरंत विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और प्रशासन के समक्ष यह मांग रखी कि मूर्ति को बिना किसी देरी के वापस उसी स्थान पर लगाया जाए।
कांग्रेस संगठन ने इस मामले की गहराई से तहकीकात करने और दोषियों के चेहरे बेनकाब करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि इस शर्मनाक काम के पीछे आखिर किस राजनीतिक दल या संगठन के लोगों का हाथ है। कांग्रेस ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस मामले में किसी भी तरह के बहाने या हीला-हवाली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी की मांग है कि अपराधियों की तुरंत पहचान की जाए, उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद या राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता होना एक आम बात है, लेकिन देश के पहले प्रधानमंत्री का इस तरह से अपमान करने का अधिकार किसी को भी नहीं दिया जा सकता। कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जो लोग देश के इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेताओं का अनादर कर रहे हैं, उनका लोकतांत्रिक और राजनीतिक तरीके से पूरी ताकत के साथ डटकर मुकाबला किया जाएगा।
प्रशासन को चेतावनी देते हुए कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि यदि इस मामले में त्वरित और ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी। X पर किए गए पोस्ट में पार्टी ने दोहराया है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा को पूरे सम्मान के साथ दोबारा स्थापित किया जाना चाहिए और इसके लिए जिम्मेदार बदमाशों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना अनिवार्य है। अगर प्रशासन ने इस दिशा में जल्द कोई उचित कदम नहीं उठाया, तो कांग्रेस इस अन्याय के खिलाफ एक व्यापक और कड़ा लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए पूरी तरह से बाध्य होगी।



















