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फरीदाबाद के पास बसेगी 10 लाख की आबादी वाली नई टाउनशिप, 40 सेक्टर्स का मास्टर प्लान तैयारभारत
20 सित॰ 2026, 6:19 pm (40 दिन पहले)· 2

फरीदाबाद के पास बसेगी 10 लाख की आबादी वाली नई टाउनशिप, 40 सेक्टर्स का मास्टर प्लान तैयार

हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण दिल्ली से 50 किलोमीटर दूर फरीदाबाद के निकट एक नई आधुनिक टाउनशिप बसाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें 40 नए सेक्टर विकसित होंगे।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में लगातार बढ़ते जनसंख्या दबाव, जाम और बुनियादी ढांचे की तंगी को दूर करने के लिए एक महत्वाकांक्षी शहरी परियोजना की रूपरेखा तय की गई है। राजधानी दिल्ली से महज 50 किलोमीटर के फासले पर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित एक पूरी तरह सुनियोजित टाउनशिप विकसित की जाएगी। इस विस्तृत योजना का खाका हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने खींचा है। फरीदाबाद के निकट आकार लेने जा रहे इस नए शहरी क्षेत्र में कुल 40 सेक्टरों का निर्माण किया जाएगा, जिनका उद्देश्य लगभग 10 लाख निवासियों को उच्चस्तरीय रिहायश, रोजगार के अवसर और नागरिक सुविधाएं मुहैया कराना है।

वर्तमान फरीदाबाद पर आबादी का भारी बोझ

इस बड़े नगरीय विस्तार की जरूरत मौजूदा फरीदाबाद की तेजी से बढ़ती जरूरतों के चलते महसूस हुई है। वर्तमान समय में फरीदाबाद की जनसंख्या लगभग 28 लाख के आंकड़े को छू चुकी है। इतनी बड़ी तादाद के कारण शहर का बुनियादी ढांचा चरमराने लगा है। शहर के बाहरी हिस्सों में आज भी चौड़ी सड़कों, उचित सीवरेज नेटवर्क, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति, मानक सरकारी विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और व्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन की कमी साफ देखी जा सकती है। इसके अलावा अनियंत्रित बसावट और रोजाना लगने वाले जाम ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। इसी स्थिति से निपटने और भविष्य की जरूरतों को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने के लिए प्रशासन ने इस नए उपनगर को विकसित करने की रूपरेखा बनाई है।

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51 गांवों के दायरे में 5 साल की कार्ययोजना

प्रशासन ने इस पूरे प्रोजेक्ट को आगामी 5 वर्षों की अवधि में धरातल पर क्रियान्वित करने का लक्ष्य रखा है। यह नई शहरी परियोजना फरीदाबाद तथा ग्रेटर फरीदाबाद क्षेत्र के करीब 51 ग्रामों की भूमि पर बसाई जाएगी। जिन प्रमुख ग्रामीण इलाकों को इस परियोजना के दायरे में लिया गया है, उनमें बदरौला, भूपानी, नचौली, पाली, भांकरी, गाजीपुर, डबुआ, अटाली, तिगांव, बुखारपुर, पन्हैड़ा, जुन्हेड़ा, सीकरी, खुर्द, भनकपुर, जाजरू, नरहावली, खंदावली, सुनपेड़, लडौली, सरुरपुर और डीग के नाम शामिल हैं। इन चिह्नित ग्रामीण क्षेत्रों में केवल मकानों और आवासीय सोसायटियों का ही निर्माण नहीं होगा, बल्कि सूचना प्रौद्योगिकी पार्क, व्यापारिक हब, आधुनिक दफ्तर और आवश्यक सार्वजनिक उपयोगिता केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।

भूमि अधिग्रहण नीति और भूस्वामियों के विकल्प

परियोजना को गति देने के लिए जमीनों के अधिग्रहण से जुड़ी प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। शुरुआती चरण के तहत 12 सेक्टर विकसित करने की योजना है, जिसके लिए 19 गांवों से संबंधित करीब 4,500 एकड़ जमीन प्राप्त करने की कवायद शुरू की गई है। किसानों और भूस्वामियों से पारदर्शी तरीके से जमीन जुटाने के मकसद से एक समर्पित डिजिटल माध्यम तैयार किया गया है। जमीन के मालिक अपनी रजामंदी दर्ज कराने के लिए landpooling.hsvphry.org.in पर पंजीकरण करा सकते हैं। इसके लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर निर्धारित की गई है। किसानों को इस योजना में दो स्पष्ट विकल्प दिए गए हैं। वे चाहें तो निर्धारित नकद मुआवजे का चयन कर सकते हैं, अथवा इसके बदले में प्राधिकरण के पहले से विकसित इलाकों में विकसित आवासीय व व्यावसायिक भूखंड हासिल कर सकते हैं।

1,034 एकड़ में फैलेगा ट्रांसपोर्ट और वेयरहाउसिंग हब

परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला को ध्यान में रखते हुए इस टाउनशिप में एक समर्पित लॉजिस्टिक्स केंद्र तैयार किया जाएगा। ग्रेटर फरीदाबाद के अंतर्गत यमुना नदी से सटे गांवों की लगभग 1,034.637 एकड़ भूमि को विशेष तौर पर ट्रांसपोर्ट नगर के रूप में उपयोग करने के लिए अलग रखा गया है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के प्रावधानों के मुताबिक, सेक्टर 132, सेक्टर 135 तथा सेक्टर 145 को पूरी तरह से माल ढुलाई, भंडारण और परिवहन केंद्रित गतिविधियों के लिए आवंटित व विकसित किया जाएगा।

नागरिक सुविधाएं, पर्यावरण और कनेक्टिविटी

नई टाउनशिप को आधुनिक शहरी सिद्धांतों पर तैयार किया जाएगा। यहाँ सिग्नल-मुक्त चौड़े मार्गों का संजाल और मजबूत जल निकासी तंत्र बनाया जाएगा। हर सेक्टर में हरियाली बनाए रखने के लिए विस्तृत ग्रीन बेल्ट, थीम पार्क और पैदल पथ विकसित किए जाएंगे। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विश्वस्तरीय मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल तथा प्रमुख शिक्षण संस्थान स्थापित करने के लिए विशेष भूखंड निर्धारित किए गए हैं। दैनिक जीवन की आवश्यकताओं के लिए शॉपिंग मॉल, सुपरमार्केट और स्थानीय बाजारों का निर्माण होगा। सार्वजनिक आवागमन के लिए स्थानीय इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा और आगे चलकर मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की व्यवस्था रखी गई है। जेवर हवाई अड्डे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के समीप होने की वजह से यह पूरा क्षेत्र भविष्य में एक बड़ा रियल एस्टेट और कारोबारी केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर है, जिससे 10 लाख की आबादी के लिए आजीविका के अनेक अवसर खुलेंगे।

सवाल-जवाब

यह नया शहर दिल्ली से कितनी दूरी पर बसाया जा रहा है?
यह नया सुनियोजित शहर दिल्ली से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर फरीदाबाद के पास विकसित किया जाएगा।
इस नई परियोजना में कुल कितने सेक्टर बनाए जाएंगे?
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मास्टर प्लान के अनुसार इस नई टाउनशिप में करीब 40 नए सेक्टर्स विकसित होंगे।
इस नए शहर में कितने लोगों के रहने का अनुमान है?
इस परियोजना को लगभग 10 लाख लोगों के रहने, कामकाज और आधुनिक जीवनशैली की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है।
नए शहर के लिए कितने गांवों की जमीन शामिल की जाएगी?
यह नया शहर फरीदाबाद और ग्रेटर फरीदाबाद के आसपास मौजूद करीब 51 गांवों की भूमि पर बसाया जाएगा।
पहले चरण में कितनी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है?
शुरुआती चरण में 12 सेक्टर्स तैयार करने के लिए 19 गांवों की लगभग 4,500 एकड़ जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जमीन मालिकों के पास मुआवजे के क्या विकल्प उपलब्ध हैं?
भूस्वामी सीधे नकद मुआवजा ले सकते हैं या फिर प्राधिकरण के पहले से विकसित इलाकों में विकसित आवासीय और व्यावसायिक प्लॉट ले सकते हैं।
ट्रांसपोर्ट नगर के लिए कितनी जमीन आरक्षित रखी गई है?
ग्रेटर फरीदाबाद में यमुना के समीप लगभग 1,034.637 एकड़ भूमि विशेष रूप से ट्रांसपोर्ट और वेयरहाउसिंग हब के लिए आरक्षित की गई है।
जमीन पूलिंग पोर्टल पर आवेदन करने की अंतिम तिथि क्या है?
जमीन मालिकों के लिए प्राधिकरण के पोर्टल पर आवेदन दर्ज कराने की आखिरी तारीख 30 नवंबर तय की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·39 दिन पहले

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सफलता पूरी तरह से भूमि अधिग्रहण की गति और डिजिटल लैंड पूलिंग नीति पर किसानों के भरोसे पर टिकी है। अतीत में एनसीआर की कई योजनाएं जमीन विवादों के कारण अटकी हैं, इसलिए 30 नवंबर की समयसीमा के भीतर पारदर्शी समन्वय बेहद जरूरी है। इसके अलावा, इस नए क्षेत्र को केवल दिल्ली-फरीदाबाद के 'शयनकक्ष' (डोर्मिटोरी टाउन) के रूप में विकसित करने के बजाय, यहां घोषित आईटी पार्क और वाणिज्यिक केंद्रों को समय पर धरातल पर उतारना होगा ताकि यह आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र बन सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·39 दिन पहले

यह नीतिगत बदलाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। भूमि अधिग्रहण के बजाय 'लैंड पूलिंग' नीति को अपनाना शासन और लोक नीति के स्तर पर एक परिपक्व कदम है, जिससे किसानों के साथ टकराव की आशंका न्यूनतम हो जाती है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना की वास्तविक सफलता समयबद्ध क्रियान्वयन और पारदर्शी मुआवजा वितरण पर निर्भर करेगी। फरीदाबाद पर बढ़ते जनसांख्यिकीय दबाव को कम करने के साथ-साथ यह योजना हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में नए राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों को जन्म देगी। ग्रामीण आबादी को इस शहरीकरण में साझीदार बनाना सरकार के लिए सबसे बड़ी प्रशासनिक चुनौती होगी।

Rohan Gupta@rohan-gupta·39 दिन पहले

अर्जुन की बात को आगे बढ़ाते हुए, इस टाउनशिप की सफलता इसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करेगी। जमीन अधिग्रहण के लिए 'landpooling.hsvphry.org.in' पोर्टल का उपयोग गॉवटेक की दिशा में एक बेहतरीन कदम है, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। इस नए अर्बन हब में प्रस्तावित आईटी पार्कों और व्यावसायिक केंद्रों को शुरू से ही भविष्य की तकनीकों जैसे स्मार्ट ग्रिड, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और मजबूत फाइबर कनेक्टिविटी के साथ डिजाइन किया जाना चाहिए। इससे यह क्षेत्र न केवल एक रिहायशी इलाका बनेगा, बल्कि नए टेक स्टार्टअप्स और डिजिटल नवाचार के लिए एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा, जिससे दिल्ली-एनसीआर में तकनीकी निवेश के नए द्वार खुलेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 दिन पहले

इस बड़े शहरीकरण प्रोजेक्ट में सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के पहलू पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। 51 गांवों की जमीन के अधिग्रहण और लैंड पूलिंग की इस बड़ी प्रक्रिया में अक्सर भूमि विवाद, धोखाधड़ी और स्थानीय संघर्ष के कानूनी मामले सामने आते हैं, जिन्हें समय पर सुलझाने के लिए एक पारदर्शी और त्वरित न्यायिक तंत्र जरूरी होगा। इसके अलावा, 10 लाख की नई आबादी को सुरक्षित माहौल देने के लिए मास्टर प्लान में शुरुआत से ही आधुनिक पुलिसिंग, सुरक्षा चौकियों और डिजिटल निगरानी नेटवर्क जैसे सुरक्षा बुनियादी ढांचे को शामिल करना अनिवार्य होना चाहिए ताकि यह नया क्षेत्र अपराध मुक्त रह सके।

Rohan Verma@rohan-verma·39 दिन पहले

करण जी की बात बिल्कुल सही है। एनसीआर में भूमि अधिग्रहण और लैंड पूलिंग अक्सर स्थानीय स्तर पर सामाजिक और राजनीतिक तनाव का कारण बनते हैं। 51 गांवों के इस विशाल दायरे में किसानों की भूमि का सही मूल्यांकन और समयबद्ध मुआवजा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। यदि शुरू में ही विस्थापन और मुआवजे से जुड़ी विसंगतियों को दूर नहीं किया गया, तो यह क्षेत्र कानूनी विवादों और स्थानीय विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन सकता है, जिससे परियोजना में देरी होगी। प्रशासनिक पारदर्शिता और मजबूत नीति ही भू-माफियाओं के दखल और अपराध को रोकने का एकमात्र उपाय है।

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