सिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामन्यूयॉर्क में वैश्विक तनाव पर बोले एस. जयशंकर, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में तुरंत बदलाव जरूरीकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगदलाल स्ट्रीट पर शुक्रवार को लौटी रौनक, रियल्टी और मिडकैप की अगुवाई में सेंसेक्स और निफ्टी मजबूतअमेरिकी डॉलर के सामने कनाडाई डॉलर 5 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसला, व्यापार तनाव से बढ़ा दबावकच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलींशेयर बाजार में आज 64 कंपनियों का एक्स-डेट एक्शन: टीएएएल टेक का स्टॉक स्प्लिट और 63 शेयरों पर डिविडेंड का मौकाराजस्थान के देशनोक में खेत की डिग्गी में डूबे तीन सगे भाई, एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गई जानलखनऊ में 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बांटे गए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोरबैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के कर्जदारों पर बढ़ा ब्याज का बोझ, 12 जून से लागू होंगी नई दरें
पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति के लिए बड़ा सुधार, मान सरकार ने राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का किया विस्तारपंजाब
17 सित॰ 2026, 2:09 pm (5 दिन पहले)· 1

पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य और नशामुक्ति के लिए बड़ा सुधार, मान सरकार ने राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का किया विस्तार

पंजाब सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवा सुधारों और नशामुक्ति अभियान को नई गति देने के लिए राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण में 11 विशेषज्ञ गैर-सरकारी सदस्यों को नामित किया है।

भगवंत मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने स्टेट मेंंडल हेल्थ अथॉरिटी यानी एसएमएचए में 11 गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत किया है, जिससे इस क्षेत्र में विशेषज्ञता और पारदर्शिता बढ़ेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पंजाब में मानसिक विकारों से पीड़ित व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा करना और राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाना है। यह नया प्रशासनिक ढांचा मरीजों को सम्मानजनक जीवन और बेहतर इलाज दिलाने में बेहद मददगार साबित होगा।

मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 का प्रभावी क्रियान्वयन

पुनर्गठित एसएमएचए मुख्य रूप से मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 के नियमों और प्रावधानों को जमीन पर लागू करने का काम करेगी। यह अथॉरिटी राज्य में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी, नियमन और उनकी गुणवत्ता में सुधार करने वाली शीर्ष वैधानिक संस्था है। इसका काम अस्पतालों और क्लीनिकों के लिए सेवा मानक तय करना, क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों और पेशेवरों का पंजीकरण करना तथा सरकार को इस विषय पर नीतियां बनाने के लिए सलाह देना है। पंजाब सरकार की बहुचर्चित मुहिम 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' के तहत इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि नशामुक्ति के प्रयासों को मानसिक स्वास्थ्य सुधारों से सीधे जोड़ा जा रहा है।

ये भी पढ़ें

प्रशासन और संवेदनशीलता का अनूठा संगम

नीतियों को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनमें मानवीय दृष्टिकोण जोड़ने के लिए अथॉरिटी का ढांचा काफी व्यापक बनाया गया है। इसमें सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक कल्याण विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। वहीं, दूसरी तरफ 11 गैर-सरकारी सदस्यों के रूप में मनोचिकित्सकों, मनोवैज्ञानिकों, मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ताओं, नर्सों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के प्रतिनिधियों और खुद मानसिक बीमारी से उबर रहे मरीजों व उनके तीमारदारों को शामिल किया गया है। मरीजों और उनके परिवारों का प्रतिनिधित्व होने से यह सुनिश्चित होगा कि नीतियां जमीनी हकीकत और उनके व्यावहारिक अनुभवों को ध्यान में रखकर बनाई जाएं, न कि केवल प्रशासनिक फाइलों तक सिमटकर रह जाएं।

जिला स्तर पर स्वतंत्र निगरानी प्रणाली

राज्य स्तर पर काम करने वाली इस संस्था के साथ-साथ जिला स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड भी सक्रिय हैं। इन जिला स्तरीय बोर्डों की कमान जिला न्यायाधीश या किसी योग्य न्यायिक अधिकारी के हाथों में होती है। ये बोर्ड मरीजों की मर्जी के बिना उन्हें भर्ती करने या उनके इलाज से जुड़े फैसलों की निष्पक्ष समीक्षा करते हैं। इसके अलावा, मरीजों के अधिकारों के हनन की शिकायतों का निपटारा करना, उनके द्वारा तय किए गए प्रतिनिधियों की जांच करना और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों का औचक निरीक्षण करना भी इन न्यायिक बोर्डों के दायरे में आता है, जिससे किसी भी स्तर पर मरीजों के साथ अन्याय न हो।

विशेषज्ञों की राय और नए बदलाव की उम्मीद

इस नए बदलाव का चिकित्सा जगत और विशेषज्ञों ने गर्मजोशी से स्वागत किया है। पटियाला के वरिष्ठ मनोचिकित्सक और अथॉरिटी के मनोनीत सदस्य डॉ. सत्येन शर्मा ने इस फैसले को मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा, "एसएमएचए का गठन यह सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है कि पंजाब में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं गुणवत्ता और जवाबदेही के साथ विकसित हों।" डॉ. शर्मा का मानना है कि सरकार द्वारा तैयार किए गए इस अधिकार-आधारित ढांचे को अब जमीन पर उतारना अथॉरिटी की बड़ी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने कहा कि इलाज की निरंतरता, मरीजों का पुनर्वास और उनके परिवारों की मदद करना इस मिशन का मुख्य हिस्सा होना चाहिए, क्योंकि अब ये सेवाएं बड़े शहरों से निकलकर कस्बों और जिला स्तर तक पहुंचने लगी हैं।

वहीं, एक अन्य मनोनीत सदस्य और वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. सतीश के थापर ने पंजाब की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप समाधान निकालने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "पंजाब के सामने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी अपनी विशिष्ट चुनौतियां हैं और हमें ऐसे समाधानों की आवश्यकता है, जो हमारे लोगों और समुदायों की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप हों।" डॉ. थापर के अनुसार, नशामुक्ति और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के सरकारी प्रयास बहुत सकारात्मक हैं और यह अथॉरिटी राज्य भर में इलाज के तरीकों में एकरूपता और पारदर्शिता लाने का काम करेगी।

नशे के खिलाफ जंग में समग्र दृष्टिकोण

मनोनीत सदस्यों के शामिल होने के बाद अगले सप्ताह एसएमएचए की पहली महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस बैठक में राज्य भर के मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए एक समान कार्यप्रणाली तय करने पर विचार किया जाएगा। यह कदम पंजाब सरकार की 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' मुहिम को भी नई मजबूती प्रदान करता है। इस अभियान का उद्देश्य केवल कानूनी कार्रवाई या सख्ती करना नहीं है, बल्कि नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों को बीमारी से बचाना, उनका सही इलाज करना, पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) सुनिश्चित करना और समाज में उन्हें दोबारा सम्मानजनक स्थान दिलाना है।

सवाल-जवाब

पंजाब स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी में कितने गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत किया गया है?
इस अथॉरिटी में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए 11 गैर-सरकारी सदस्यों को मनोनीत किया गया है।
इस बदलाव से पंजाब सरकार की किस प्रमुख मुहिम को बल मिलेगा?
इससे पंजाब सरकार की नशामुक्ति मुहिम 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' को बड़ी मजबूती मिलेगी, क्योंकि इसमें चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखा जा रहा है।
मनोनीत गैर-सरकारी सदस्यों में कौन-कौन लोग शामिल हैं?
इन सदस्यों में मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक, मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता, नर्सें, गैर-सरकारी संगठन, मानसिक बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके देखभालकर्ता शामिल हैं।
जिला स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी कौन करता है?
जिला स्तर पर जिला न्यायाधीश या पात्र न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता में 'मानसिक स्वास्थ्य समीक्षा बोर्ड' इसकी स्वतंत्र निगरानी करता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp