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पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, महंगाई भत्ते के विवाद में अवमानना कार्रवाई पर लगी रोकभारत
5 नव॰ 2026, 3:02 pm (23 घंटे पहले)· 1

पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, महंगाई भत्ते के विवाद में अवमानना कार्रवाई पर लगी रोक

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई आपराधिक अवमानना की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। यह पूरा मामला सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते के भुगतान से जुड़ा हुआ है।

देश की शीर्ष अदालत ने पंजाब सरकार को एक बड़ा कानूनी संरक्षण प्रदान करते हुए राज्य के अधिकारियों के खिलाफ चल रही दंडात्मक कार्यवाही को फिलहाल थाम दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसके तहत मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक अवमानना के मामलों में नोटिस जारी किए गए थे। इस कानूनी राहत से प्रशासनिक मशीनरी को बड़ी और तात्कालिक राहत हासिल हुई है, जबकि अदालत में इस मामले पर अगली सुनवाई एक दिसंबर को निर्धारित की गई है।

यह पूरा कानूनी विवाद राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लंबित पड़े महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के भुगतान न होने को लेकर उपजा है। शीर्ष अदालत ने पांच नवंबर दो हजार छब्बीस को पारित अपने आदेश के जरिए उस प्रक्रिया को स्थगित कर दिया जिसके तहत अधिकारियों पर व्यक्तिगत रूप से अवमानना के आरोप तय किए जा रहे थे। हाई कोर्ट ने राज्य प्रशासन द्वारा अपने पुराने निर्देशों का समय पर पालन सुनिश्चित न किए जाने के बाद यह सख्त कदम उठाया था।

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इसी वर्ष तीन अगस्त को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश देते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपने समस्त कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों को बकाया डीए और डीआर की किस्तों का भुगतान जल्द से जल्द करे। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया था कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को महंगाई भत्ते का भुगतान उसी निर्धारित दर पर किया जाना चाहिए जिस दर पर राज्य में सेवारत अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों यानी आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों को इसका लाभ मिल रहा है।

इसके अलावा, हाई कोर्ट ने अपने उस निर्देश में राज्य सरकार द्वारा अखबारों और अन्य प्रचार माध्यमों पर किए जाने वाले भारी-भरकम विज्ञापनों जैसे गैर-जरूरी खर्चों पर भी गहरी आपत्ति जताते हुए रोक लगाने की बात कही थी। अदालत का मानना था कि सरकारी धन का उपयोग विज्ञापनों के बजाय कर्मचारियों के वैध बकाये के भुगतान में होना चाहिए। जब इन निर्देशों के अनुपालन में देरी या कथित विफलता की शिकायतें सामने आईं, तब मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की प्रक्रिया शुरू की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के इस नए हस्तक्षेप से इन अधिकारियों को फौरी तौर पर कानूनी सुरक्षा मिल गई है और मामले की अगली सुनवाई दिसंबर महीने के पहले दिन होगी।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने किस मामले में पंजाब सरकार को राहत दी है?
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार और मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के खिलाफ चल रही आपराधिक अवमानना की कार्रवाई पर रोक लगाई है।
यह अवमानना कार्रवाई किस अदालत ने शुरू की थी?
यह कार्रवाई पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा शुरू की गई थी।
मामला किस वित्तीय लाभ से जुड़ा हुआ है?
यह मामला सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बकाया महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के भुगतान से जुड़ा है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई एक दिसंबर को होगी।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में डीए की दर को लेकर क्या कहा था?
हाई कोर्ट ने कहा था कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को उसी दर से डीए दिया जाए जिस दर पर पंजाब में तैनात अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को भुगतान किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·20 घंटे पहले

सरकारी कर्मचारियों के डीए का यह चक्कर पुराना है। मेरे एक चाचा पंजाब में शिक्षक हैं, वे महीनों से इस भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·21 घंटे पहले

सरकारी विज्ञापनों पर रोक की बात सही है, पहले कर्मचारियों का डीए मिलना चाहिए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 घंटे पहले

रविकाश जी, बात तो बिल्कुल सही है। विज्ञापन पर जनता का पैसा उड़ाने से बेहतर है कि कर्मचारियों का बकाया समय पर मिले।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 घंटे पहले

सरकारी विज्ञापनों पर रोक लगाने वाली बात एकदम सही लगी। नेता अपने प्रचार पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं और असली हकदार अपने बकाए के लिए कोर्ट के चक्कर काटते रहते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·21 घंटे पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर ये सरकारें विज्ञापनों का पैसा रोककर कर्मचारियों का डीए आखिर कब तक लटकाती रहेंगी?

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