अजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंअक्टूबर की शुरुआत में 19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए प्रमुख शहरों में नए दामकिसान के बेटे डॉ. भागचंद बधाल का RAS से IAS कैडर में हुआ प्रमोशन, सरकारी स्कूल से शुरू हुआ था सफरगंगा किनारे बेहतरीन नजारों और शांत माहौल का अनुभव देने वाले ऋषिकेश के खास कैफेझारखंड के 22 वर्षीय अजय कुमार विश्वकर्मा ने स्केट्स पर तय किया 21 हजार किमी का सफर, 20 राज्यों में फैलाया नशामुक्ति का संदेशसिंह राशिफल 1 अक्टूबर 2026: कर्म क्षेत्र में चमक और कागजी मामलों में बरतें खास सतर्कताबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकातुला राशिफल 1 अक्टूबर 2026: जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से बचें, वित्तीय और कार्यक्षेत्र के फैसलों में रखें सजगताकन्या राशिफल 1 अक्टूबर 2026: आत्मविश्वास से बनेंगे काम, रिश्तों में संवाद और आराम पर दें ध्यान
राजनाथ सिंह की दो टूक, दुश्मन की जमीन में घुसकर देंगे जवाब, डर से मिली शांति कबूल नहींभारत
8 सित॰ 2026, 11:33 am (23 दिन पहले)· 2

राजनाथ सिंह की दो टूक, दुश्मन की जमीन में घुसकर देंगे जवाब, डर से मिली शांति कबूल नहीं

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सेनाओं को दुश्मन के इलाके में घुसकर जवाब देने की पूरी आजादी है और डर की वजह से मिलने वाली शांति स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए रक्षा उत्पादन, निर्यात और बजट में हुई भारी बढ़ोतरी के आंकड़े भी गिनाए।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय सेनाओं को अब यह पूरी आजादी और जरूरी संसाधन दोनों दिए गए हैं कि वे किसी भी खतरे का करारा जवाब दे सकें, जरूरत पड़ने पर दुश्मन की सरजमीं में घुसकर भी कार्रवाई कर सकें।

शांति और कमजोरी में साफ फर्क

राजनाथ सिंह ने कहा कि शांति और कमजोरी को एक जैसा समझना बड़ी भूल होगी, दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने साफ किया कि अगर कोई मुल्क भारत के खिलाफ आतंकियों को शह देता पाया गया तो उससे कोई बातचीत की मेज नहीं सजेगी, बल्कि हमारी सेनाएं मुंहतोड़ जवाब देंगी। रक्षा मंत्री के मुताबिक भारत जंग या किसी की जमीन हड़पने में यकीन नहीं रखता और शांति को ही तरजीह देता है, मगर डर की वजह से मिली शांति शर्मनाक है, जबकि अमन कायम रखने के लिए लड़ी गई जंग इज्जत की हकदार होती है।

ये भी पढ़ें

कश्मीर में युवाओं को बहकाने की साजिश नाकाम

रक्षा मंत्री ने गिनाया कि दुश्मन देशों ने अलग-अलग तरीकों से भारत की सुरक्षा में सेंध लगाने की कोशिश की, जैसे जम्मू-कश्मीर के नौजवानों को गुमराह करना, भारत विरोधी सरगर्मियों को पैसा देना, आतंक फैलाना और समाज में फूट डालना। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पुनर्वास योजनाओं, कट्टरता से बाहर निकालने की कोशिशों और नौकरियों के मौके देकर इन तमाम चालों को विफल कर दिया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद घाटी में तरक्की की रफ्तार पहले कभी न देखी गई ऊंचाई पर पहुंच गई है।

सर्जिकल स्ट्राइक से ऑपरेशन सिंदूर तक का सफर

आतंकवाद से निपटने की रणनीति समझाते हुए राजनाथ सिंह ने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर की मिसाल दी, जिनमें आतंकियों के साथ-साथ उन्हें पालने वाले आकाओं को भी निशाना बनाया गया। उन्होंने सिंधु जल संधि रोके जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इससे यह कड़ा संदेश गया कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।

अंतरिक्ष और साइबरस्पेस बने जंग के नए मैदान

जंग लड़ने के तरीके बदलने पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अब लड़ाई सिर्फ जमीन, हवा और समंदर तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरिक्ष और साइबरस्पेस भी इसके नए अखाड़े बनकर उभरे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, खुद फैसला लेने वाले सिस्टम और सटीक निशाना साधने वाले हथियार पूरे रणक्षेत्र की तस्वीर बदल रहे हैं। सरकार चाहती है कि भारत खुद अपनी आधुनिक तकनीक गढ़े, यही वजह है कि रक्षा नीति को पहले वाले 'रिएक्टिव' ढांचे से निकालकर 'प्रोएक्टिव' रुख में ढाला गया है।

रक्षा उत्पादन और निर्यात में जबरदस्त उछाल

आंकड़े गिनाते हुए रक्षा मंत्री ने बताया कि 2014 से पहले करीब 40,000 करोड़ रुपए रहने वाला रक्षा उत्पादन अब बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच चुका है, वहीं निर्यात में 56 गुना का उछाल आया है और यह 38,000 करोड़ रुपए से ऊपर निकल गया है। सरकार का इरादा 2029 तक 50,000 करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात के आंकड़े को छूने का है। इस कामयाबी की झलक अस्त्र, आकाश मिसाइल, आकाशतीर, पिनाका, तेजस लड़ाकू विमान, अर्जुन टैंक, प्रचंड-ध्रुव हेलीकॉप्टर और आईएनएस विक्रांत जैसे स्वदेशी हथियारों में दिखती है। उन्होंने बताया कि सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां अब मुनाफे में चल रही हैं और बीते 12 सालों में रक्षा बजट 2.5 लाख करोड़ रुपए से उछलकर करीब 8 लाख करोड़ रुपए के पास पहुंच गया है।

सवाल-जवाब

राजनाथ सिंह ने यह बयान कब दिया?
उन्होंने सोमवार को एक कार्यक्रम में यह बात कही।
उन्होंने किन सैन्य कार्रवाइयों का जिक्र किया?
उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया।
रक्षा उत्पादन में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
2014 से पहले करीब 40,000 करोड़ रुपए रहने वाला रक्षा उत्पादन अब लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
रक्षा निर्यात का लक्ष्य क्या रखा गया है?
सरकार का लक्ष्य 2029 तक 50,000 करोड़ रुपए का रक्षा निर्यात हासिल करना है।
कौन-कौन से स्वदेशी हथियार गिनाए गए?
अस्त्र, आकाश मिसाइल, आकाशतीर, पिनाका, तेजस लड़ाकू विमान, अर्जुन टैंक, प्रचंड-ध्रुव हेलीकॉप्टर और आईएनएस विक्रांत का जिक्र किया गया।
रक्षा बजट में पिछले 12 सालों में कितना इजाफा हुआ है?
रक्षा बजट 2.5 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर करीब 8 लाख करोड़ रुपए के पास पहुंच गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp