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राजस्थान में आरपीएससी पेपर लीक कांड, दोस्त को परीक्षा पास कराने वाले शिक्षक की गिरफ्तारीराजस्थान
15 सित॰ 2026, 8:05 pm (10 दिन पहले)· 0

राजस्थान में आरपीएससी पेपर लीक कांड, दोस्त को परीक्षा पास कराने वाले शिक्षक की गिरफ्तारी

आरपीएससी शिक्षक भर्ती पेपर लीक मामले में एसओजी ने बाड़मेर के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने अपने दोस्त को परीक्षा पास कराने के लिए सात लाख रुपये में लीक पेपर का इंतजाम किया था।

जयपुर में आरपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा के पेपर लीक मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी ने एक और आरोपी को धर दबोचा है। पकड़े गए शख्स की पहचान श्रवण कुमार बिश्नोई के तौर पर हुई है, जो बाड़मेर जिले के धोरीमन्ना स्थित एक सरकारी स्कूल में सेकंड ग्रेड शिक्षक के पद पर तैनात है। यह पूरा प्रकरण अर्थशास्त्र प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 से जुड़ा हुआ है।

सात लाख में हुआ था पेपर का सौदा

जांच में सामने आया है कि इस आरोपी ने अपने एक दोस्त गोपाल के लिए सात लाख रुपये में लीक पेपर का पूरा बंदोबस्त करवाया था। खास बात यह है कि इस नापाक तरीके से पेपर हासिल करने के बाद गोपाल ने प्राध्यापक भर्ती परीक्षा में सफलता भी हासिल कर ली थी और परीक्षा पास कर ली थी।

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बाबूलाल कटारा और अन्य सरगनाओं की भूमिका

इस बड़े पेपर लीक कांड की जांच के दौरान पहले भी राजस्थान लोक सेवा आयोग यानी आरपीएससी के तत्कालीन सदस्य बाबूलाल कटारा का नाम सामने आ चुका है। ऐसा आरोप है कि बाबूलाल कटारा ने यह पेपर शेरसिंह उर्फ अनिल मीणा को मुहैया कराया था। इसके बाद यह लीक हुआ प्रश्नपत्र पेपर लीक माफिया सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण गैंग तक जा पहुंचा था। इस गिरोह के साइट हैंडलर्स ने राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर कई अभ्यर्थियों को हल किया हुआ पेपर पढ़ाया था।

कोर्ट ने दी चार दिन की पुलिस रिमांड

इसी श्रृंखला की कड़ियों को जोड़ते हुए एसओजी ने अपनी जांच के आधार पर श्रवण कुमार को सोमवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से अदालत ने आरोपी को चार दिन की पुलिस हिरासत यानी रिमांड पर भेज दिया है। इस पूरी कार्रवाई और मामले की आधिकारिक जानकारी एसओजी के एडीजी विशाल बंसल द्वारा साझा की गई है।

कब हुई थी परीक्षा और कब दर्ज हुई एफआईआर

आरपीएससी द्वारा यह विवादित परीक्षा 15 और 16 अक्टूबर 2022 को आयोजित करवाई गई थी, जिसके बाद इस परीक्षा का पेपर लीक होने का बड़ा खुलासा हुआ था। शुरुआती सुरागों और साक्ष्यों की गहन जांच-पड़ताल करने के बाद आखिरकार एसओजी थाने में 10 अप्रैल 2025 को इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई थी।

सवाल-जवाब

आरपीएससी पेपर लीक मामले में हाल ही में किसकी गिरफ्तारी हुई है?
एसओजी ने बाड़मेर के सरकारी स्कूल के सेकंड ग्रेड शिक्षक श्रवण कुमार बिश्नोई को गिरफ्तार किया है।
यह मामला किस परीक्षा से जुड़ा हुआ है?
यह मामला अर्थशास्त्र प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2022 से जुड़ा हुआ है।
आरोपी श्रवण कुमार ने कितने रुपये में पेपर का इंतजाम किया था?
आरोपी ने अपने दोस्त गोपाल के लिए सात लाख रुपये में लीक पेपर का इंतजाम किया था।
कोर्ट ने आरोपी को कितने दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है?
कोर्ट ने आरोपी को चार दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा है।
इस मामले में एसओजी थाने में एफआईआर कब दर्ज की गई थी?
एसओजी थाने में इस मामले की एफआईआर 10 अप्रैल 2025 को दर्ज की गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ananya Iyer@ananya-iyer·9 दिन पहले

भले ही यह एक अपराध और प्रशासनिक विफलता का मामला है, लेकिन इस तरह की वास्तविक घटनाएँ अक्सर मनोरंजन जगत के लिए एक बड़ा कच्चा माल साबित होती हैं। आने वाले समय में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर 'स्कूप' या 'जामताड़ा' जैसी वेब सीरीज के तर्ज पर इस व्यवस्थागत भ्रष्टाचार और पेपर लीक माफिया पर आधारित थ्रिलर और ड्रामा कंटेंट की मांग और अधिक तेजी से बढ़ सकती है, जो दर्शकों को खूब आकर्षित करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

यह प्रकरण सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की चयन प्रणालियों और संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब सरकारी शिक्षक और आयोग के लोग ही इस तरह के सिंडिकेट से जुड़कर नौकरियों की खरीद-फरोख्त में शामिल होते हैं, तो यह सीधे तौर पर बाजार में कुशल मानव संसाधन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। ऐसे वित्तीय और प्रशासनिक भ्रष्टाचार से न केवल মেধवी युवाओं का हक मारा जाता है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार तंत्र की साख पर भी गहरी चोट पहुँचती है। एसओजी की यह कार्रवाई आवश्यक है, लेकिन भविष्य में ऐसी सेंधमारी रोकने के लिए डिजिटल सुरक्षा और संस्थागत सुधार बेहद जरूरी हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

यह घटनाक्रम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि संगठित पेपर लीक सिंडिकेट अब केवल बाहरी तत्वों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि व्यवस्था के भीतर गहरी जड़ें जमा चुके हैं। जब एक सरकारी शिक्षक अपने ही पद का दुरुपयोग कर अपने मित्र के लिए सात लाख रुपये में प्रश्नपत्र का सौदा करता है, तो यह प्रशासनिक और नैतिक पतन की पराकाष्ठा है। एसओजी द्वारा की गई चार दिन की रिमांड की यह कार्रवाई एक शुरुआत मात्र है। बाबूलाल कटारा जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों से लेकर निचले स्तर के जालसाजों तक फैले इस नेटवर्क की तह तक जाना और सुरेश ढाका तथा भूपेंद्र सारण जैसे फरार सरगनाओं के पूरे तंत्र को नेस्तनाबूद करना ही इस भ्रष्टाचार की चेन को तोड़ सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

सरकारी शिक्षक का ही इस तरह परीक्षा माफिया से हाथ मिलाना और अपने दोस्त को सात लाख में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराना शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ पर एक करारा प्रहार है। आरपीएससी के तत्कालीन सदस्य बाबूलाल कटारा से लेकर सुरेश ढाका और भूपेंद्र सारण जैसे नाम इस संगठित सिंडिकेट के बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। एसओजी की रिमांड के दौरान पूछताछ में यह साफ होना लाजिमी है कि इस सांठगांठ की जड़ें कहां तक फैली हैं और कितने अन्य अभ्यर्थियों ने इस अवैध तरीके से सफलता हासिल की।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह प्रकरण सिर्फ एक स्थानीय मिलीभगत नहीं बल्कि एक गहरी संस्थागत विफलता को उजागर करता है। जब आयोग के भीतर बैठे जिम्मेदार लोग ही माफिया को प्रश्नपत्र सौंपने लगें, तो सार्वजनिक परीक्षाओं की विश्वसनीयता पूरी तरह डगमगा जाती है। एसओजी की चार दिन की रिमांड के दौरान अब यह पता लगाना सबसे बड़ी चुनौती होगी कि इस सिंडिकेट ने कितने अन्य अयोग्य अभ्यर्थियों को सिस्टम में घुसाया है, क्योंकि ऐसे मामलों में अक्सर वित्तीय लेन-देन का दायरा और भी बड़ा निकलता है।

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