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राजस्थान निकाय चुनावों में हार के बाद भारत आदिवासी पार्टी ने की सख्त कार्रवाई, बांसवाड़ा कार्यकारिणी भंग और डूंगरपुर अध्यक्ष बदले गएराजस्थान
15 सित॰ 2026, 8:21 pm (9 दिन पहले)· 0

राजस्थान निकाय चुनावों में हार के बाद भारत आदिवासी पार्टी ने की सख्त कार्रवाई, बांसवाड़ा कार्यकारिणी भंग और डूंगरपुर अध्यक्ष बदले गए

राजस्थान निकाय चुनावों में खराब प्रदर्शन की गाज भारत आदिवासी पार्टी पर गिरी है। पार्टी ने बांसवाड़ा की पूरी जिला कार्यकारिणी को भंग कर दिया है और डूंगरपुर के जिला अध्यक्ष को भी उनके पद से हटा दिया है।

राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारत आदिवासी पार्टी के भीतर कड़े संगठनात्मक कदम उठाए गए हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहनलाल रोत ने बांसवाड़ा जिले की संपूर्ण जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह बड़ा निर्णय बांसवाड़ा नगर परिषद, कुशलगढ़ नगरपालिका और गढ़ी नगरपालिका के चुनावी परिणामों की गहराई से समीक्षा करने के बाद लिया गया है, जहां पार्टी समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। इसके अलावा डूंगरपुर जिले में भी संगठनात्मक फेरबदल करते हुए जिला अध्यक्ष अनुतोष रोत को उनके पद से हटा दिया गया है।

कमजोर प्रदर्शन के बाद बांसवाड़ा में बड़ी कार्रवाई

निकाय चुनावों के नतीजों ने पार्टी संगठन को तगड़ा झटका दिया है, जिसके चलते नेतृत्व को यह सख्त कदम उठाना पड़ा। पार्टी अध्यक्ष मोहनलाल रोत के अनुसार, बांसवाड़ा जिले की तीनों स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने वाले समर्थित प्रत्याशी उम्मीदों पर बिल्कुल खरे नहीं उतर सके। चुनाव परिणामों की समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद बांसवाड़ा की पूरी जिला कार्यकारिणी को समाप्त करने की घोषणा की गई, ताकि संगठन में नई जान फूंकी जा सके और कमियों को दूर किया जा सके।

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चुनावी मैदान में उतरी थीं बड़ी संख्या

इन चुनावों के दौरान पार्टी ने कई क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी उतारे थे। इनमें डूंगरपुर नगर परिषद में 12, बांसवाड़ा नगर परिषद में 20, प्रतापगढ़ नगर परिषद में 6 और सलूंबर नगर परिषद सहित अन्य पालिकाओं को मिलाकर कुल 79 उम्मीदवार चुनावी मैदान में खड़े किए गए थे। हालांकि, इन तमाम कोशिशों के बावजूद पार्टी के केवल 8 उम्मीदवार ही चुनावी वैतरणी पार करने में सफल हो पाए। इन विजेता उम्मीदवारों में डूंगरपुर नगर परिषद के 3 वार्ड, सांगवाड़ा नगरपालिका के 4 वार्ड और सलूंबर नगर परिषद का मात्र 1 वार्ड ही शामिल रहा, जिससे पार्टी का जीत प्रतिशत काफी कम रहा।

डूंगरपुर में अध्यक्ष पद को लेकर हुआ बदलाव

बांसवाड़ा की तरह ही डूंगरपुर जिले में भी सांगठनिक बदलाव किए गए हैं, हालांकि इसके पीछे की प्रक्रिया अलग रही। डूंगरपुर जिला अध्यक्ष अनुतोष रोत को पदमुक्त किए जाने के पीछे पार्टी के संविधान का हवाला दिया गया है। पार्टी के आंतरिक नियमों के अनुसार एक जिला अध्यक्ष का कार्यकाल तीन वर्ष का निर्धारित होता है। उनका यह तयशुदा कार्यकाल पूरा हो चुका था, जिसके चलते उन्हें नियमों के दायरे में रहते हुए उनके पद से हटा दिया गया है।

आगे क्या होगी पार्टी की रणनीति

इन बड़े बदलावों के बाद अब सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा है कि बांसवाड़ा में पार्टी नई कमान किसे सौंपेगी और डूंगरपुर का अगला जिला अध्यक्ष कौन बनेगा। फिलहाल संगठन की ओर से इन दोनों ही महत्वपूर्ण जिलों में नई नियुक्तियों को लेकर किसी भी नए नाम का ऐलान नहीं किया गया है। आने वाले दिनों में पार्टी नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपकर संगठन को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेगी।

सवाल-जवाब

भारत आदिवासी पार्टी ने बांसवाड़ा में जिला कार्यकारिणी क्यों भंग की?
निकाय चुनाव में पार्टी समर्थित प्रत्याशियों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक खराब रहने के कारण यह कार्रवाई की गई।
डूंगरपुर के जिला अध्यक्ष को क्यों हटाया गया?
जिला अध्यक्ष अनुतोष रोत का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के कारण उन्हें नियमों के तहत पदमुक्त किया गया।
पार्टी ने कुल कितने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे थे?
पार्टी ने विभिन्न परिषदों और पालिकाओं में कुल 79 उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से केवल 8 उम्मीदवार ही जीत सके।
पार्टी के कितने उम्मीदवार चुनाव जीतने में सफल रहे?
केवल 8 उम्मीदवार जीते, जिनमें डूंगरपुर में 3, सांगवाड़ा में 4 और सलूंबर में 1 वार्ड शामिल था।
क्या बांसवाड़ा और डूंगरपुर में नए नामों की घोषणा कर दी गई है?
फिलहाल दोनों ही जगहों पर नई नियुक्तियों का ऐलान नहीं किया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

79 में से केवल 8 सीटों पर मिली जीत भारत आदिवासी पार्टी के लिए अपने पारंपरिक जनाधार में गहरी होती चुनौतियों का संकेत है। बांसवाड़ा की पूरी कार्यकारिणी को भंग करने का फैसला नेतृत्व की त्वरित जवाबदेही तय करने की रणनीति को दर्शाता है, ताकि निचले स्तर पर संगठन की सुस्ती को रोका जा सके। वहीं, डूंगरपुर में बदलाव को संवैधानिक कार्यकाल से जोड़ना यह दिखाता है कि पार्टी चुनावी झटकों के बीच भी अपनी प्रशासनिक छवि और आंतरिक अनुशासन को बनाए रखने की कोशिश कर रही है। अब नए चेहरों का चयन ही यह तय करेगा कि पार्टी इस क्षेत्र में अपना राजनीतिक प्रभाव दोबारा कायम कर पाती है या नहीं।

Divya Reddy@divya-reddy·9 दिन पहले

अर्जुन की बात आगे बढ़ाते हुए, स्थानीय निकायों का यह परिणाम युवाओं और नए मतदाताओं के बीच पार्टी के घटते प्रभाव को दर्शाता है। इन जिलों में छात्र और शिक्षित युवा हमेशा से सामाजिक-राजनीतिक बदलाव के प्रमुख संवाहक रहे हैं। संगठनात्मक फेरबदल के इस मोड़ पर पार्टी के लिए केवल अनुशासन बनाए रखना ही काफी नहीं होगा। बांसवाड़ा और डूंगरपुर में नया ढांचा खड़ा करते समय नेतृत्व को ऐसे नए और शिक्षित चेहरों को जिम्मेदारी देनी होगी जो उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार से जुड़ी युवा प्राथमिकताओं को समझ सकें और निचले स्तर पर संगठन से जुड़ सकें।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

स्थानीय निकाय चुनावों में महज 10% सफलता दर पार्टी के क्षेत्रीय जनाधार की सीमाओं को उजागर करती है। त्वरित संगठनात्मक फेरबदल के जरिए शीर्ष नेतृत्व ने चुनावी नतीजों के प्रति जवाबदेही तय करने का कड़ा संदेश दिया है। हालांकि, केवल पदाधिकारियों को बदलने भर से धरातल पर कैडर की मजबूती और मतदाताओं का भरोसा तुरंत बहाल होना कठिन होगा। संगठन को अपनी चुनावी रणनीति और जमीनी अभियानों के क्रियान्वयन पर नए सिरे से विचार करना होगा, ताकि भविष्य के बड़े राजनीतिक मुकाबलों में उसकी पकड़ कमजोर न पड़े।

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

राजस्थान के निकाय चुनावों में भारत आदिवासी पार्टी का यह खराब प्रदर्शन क्षेत्रीय राजनीति में उसकी पकड़ पर सवाल खड़े करता है। 79 में से मात्र 8 सीटों पर सिमट जाना यह बताता है कि पार्टी को अपनी ज़मीनी रणनीति और उम्मीदवारों के चयन पर नए सिरे से काम करने की सख्त जरूरत है। बांसवाड़ा कार्यकारिणी का भंग होना और डूंगरपुर में नेतृत्व परिवर्तन इसी आंतरिक असंतोष और हार की समीक्षा का परिणाम है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

राजस्थान के इन स्थानीय चुनावों में 79 में से केवल 8 सीटों पर जीत हासिल करना भारत आदिवासी पार्टी के लिए केवल एक चुनावी झटका नहीं, बल्कि उसकी चुनावी रणनीति में भारी खामियों का संकेत है। बांसवाड़ा में पूरी कार्यकारिणी को भंग करना और डूंगरपुर में नेतृत्व बदलना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी आलाकमान अब असंतोष को दबाने और कार्यकर्ताओं में अनुशासन बहाल करने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम उठाने को मजबूर हो गया है। आगामी नियुक्तियों और नई रणनीति से ही तय होगा कि पार्टी इन ग्रामीण और आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी खोई हुई ज़मीनी पकड़ को फिर से कैसे मजबूत कर पाती है।

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