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राजस्थान पुलिस की क्रूरता: वीआईपी काफिले के लिए खौलता पानी डालने वाले सिपाही पर सिर्फ मामूली कार्रवाईराजस्थान
28 जून 2026, 9:45 pm (76 दिन पहले)· 6

राजस्थान पुलिस की क्रूरता: वीआईपी काफिले के लिए खौलता पानी डालने वाले सिपाही पर सिर्फ मामूली कार्रवाई

राजस्थान में मुख्यमंत्री के काफिले को रास्ता देने के नाम पर एक पुलिसकर्मी ने दो बहनों के ठेले को धक्का दे दिया, जिससे एक युवती गंभीर रूप से झुलस गई। इस बर्बरता के बावजूद पुलिसकर्मी पर केवल लाइन हाजिर की मामूली विभागीय कार्रवाई की गई है।

कल्पना कीजिए कि चिलचिलाती गर्मी में, जब नल का सामान्य पानी छूना भी मुश्किल होता है, उस वक्त कोई आपके शरीर पर उबलता हुआ गर्म पानी डाल दे। यह दृश्य ही रूह कंपा देने वाला है, लेकिन राजस्थान में कानून के रक्षक माने जाने वाले पुलिसकर्मियों ने दो बहनों के साथ ऐसी ही अमानवीय घटना को अंजाम दिया। यह सब सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि उस रास्ते से मुख्यमंत्री का काफिला गुजरने वाला था। पुलिस की टीम वहां पहुंची और बिना सोचे-समझे सड़क किनारे लगे ठेले को हटाने के लिए शोर मचाने लगी। उन युवतियों ने हाथ जोड़कर पुलिसकर्मियों से विनती की कि वे खाना बना रही हैं और बर्तन में पानी खौल रहा है। उन्होंने बस इतना समय मांगा कि वे बर्तन नीचे उतार सकें ताकि कोई बड़ा हादसा न हो, लेकिन उनकी एक न सुनी गई।

सत्ता के अहंकार में अमानवीय हरकत

वीआईपी ड्यूटी के दबाव और अफसरों के सामने अपनी छवि सुधारने की जल्दबाजी में पुलिसकर्मी ने युवतियों की पीड़ा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उस सिपाही ने बिना किसी चेतावनी के पूरे बल के साथ ठेले को धक्का मार दिया। इसके परिणामस्वरूप, खौलता हुआ पानी सीधे छोटी बहन रेशु के ऊपर जा गिरा। उसके शरीर का बड़ा हिस्सा, जिसमें हाथ, छाती, पेट और जांघ शामिल हैं, बुरी तरह झुलस गए। सड़क पर वह युवती दर्द से चीखती रही और तड़पती रही, लेकिन वहां तैनात पुलिसकर्मियों के चेहरे पर जरा सा भी पछतावा नहीं दिखा। उनका पूरा ध्यान मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था पर था।

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क्या 'लाइन हाजिर' सच में एक सजा है?

जब यह शर्मनाक घटना कैमरे में कैद हुई और सोशल मीडिया पर वायरल हुई, तो प्रशासन आनन-फानन में डैमेज कंट्रोल में जुट गया। अधिकारियों ने दावा किया कि आरोपी पुलिसकर्मी नरेंद्र के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया है और उसे तुरंत एपीओ (लाइन हाजिर) कर दिया गया है। आम लोगों को लग सकता है कि यह एक बड़ी सजा है, लेकिन सच्चाई इसके उलट है। राजस्थान में लाइन हाजिर होने का मतलब है कि पुलिसकर्मी को उसकी वर्तमान पोस्टिंग से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया जाता है। यह कोई दंड नहीं, बल्कि एक तरह की वेतन सहित छुट्टी है। वह अपनी पूरी तनख्वाह लेता रहेगा और जैसे ही मामला थोड़ा शांत होगा, उसे किसी दूसरे थाने में पोस्टिंग मिल जाएगी।

कानून सबके लिए एक समान क्यों नहीं?

सवाल यह उठता है कि क्या किसी को जलाकर घायल कर देने की सजा इतनी कम हो सकती है? अगर कोई सामान्य नागरिक सड़क पर ऐसा कृत्य करता, तो पुलिस की प्रतिक्रिया क्या होती? यदि कोई आम आदमी किसी ठेले को जानबूझकर धक्का मारता और किसी लड़की पर खौलता पानी गिर जाता, तो उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता। उस पर गंभीर चोट पहुंचाने, खतरनाक साधनों से नुकसान करने और गैर-इरादतन हत्या के प्रयास जैसी कड़ी गैर-जमानती धाराएं लगाई जातीं। वह शख्स जेल की सलाखों के पीछे होता और उसकी जिंदगी अदालतों के चक्कर लगाने में बर्बाद हो जाती।

वर्दी का रसूख या कानून का मखौल

आखिर इस पुलिसकर्मी पर इतनी नरमी क्यों बरती जा रही है? क्या पुलिस की वर्दी पहनने का अर्थ यह है कि व्यक्ति को किसी को जिंदा जला देने का लाइसेंस मिल गया है? देश के कानून में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि वीआईपी मूवमेंट के नाम पर किसी गरीब या आम आदमी को जानबूझकर शारीरिक नुकसान पहुंचाया जाए। यह घटना पुलिस व्यवस्था के उस चेहरे को बेनकाब करती है जहां वीआईपी कल्चर आम इंसान की जान से ज्यादा अहमियत रखता है।

सवाल-जवाब

यह घटना कहां और क्यों हुई?
यह घटना राजस्थान में हुई, जहां मुख्यमंत्री के काफिले को रास्ता खाली करवाने के दौरान पुलिस ने एक ठेले को धक्का दे दिया।
पीड़ित युवती का क्या नाम है और उसे चोट कैसे लगी?
पीड़ित युवती का नाम रेशु है और पुलिसकर्मी द्वारा ठेले को धक्का देने के कारण उस पर खौलता हुआ पानी गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई।
आरोपी पुलिसकर्मी पर क्या कार्रवाई हुई?
आरोपी पुलिसकर्मी नरेंद्र को 'लाइन हाजिर' यानी एपीओ कर दिया गया है, जिसका मतलब है कि उसे पुलिस लाइन भेज दिया गया है।
क्या लाइन हाजिर एक बड़ी सजा है?
नहीं, लाइन हाजिर को सजा नहीं माना जाता है क्योंकि इसमें पुलिसकर्मी को अपनी पूरी सैलरी मिलती रहती है और बाद में उसे दूसरी जगह पोस्टिंग मिल जाती है।
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