राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के गठबंधन के बड़े जमावड़े के बीच भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव काफी तेज हो गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर तीखा जुबानी हमला करते हुए देश में अशांति और अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश किसी की मनमर्जी या अराजक मंसूबों से संचालित नहीं हो सकता। यह टकराव उस समय खुलकर सामने आया जब विपक्षी दलों का मोर्चा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के खिलाफ दिल्ली में विशाल शक्ति प्रदर्शन कर रहा था।
लोकतांत्रिक व्यवस्था और बनाना रिपब्लिक टिप्पणी
विपक्षी गठबंधन के इस जमावड़े पर कड़ा एतराज जताते हुए जेपी नड्डा ने सीधे राहुल गांधी को आगाह किया कि वे देश की लोकतांत्रिक ताकत को कमतर आंकने की भूल न करें। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी कान खोलकर सुन लीजिए, यह भारत है, कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है जहां आप जब चाहें आगजनी करा दें, दंगे भड़का दें और सत्ता परिवर्तन का एजेंडा चला दें।”
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी को इस तरह के दिवास्वप्न देखना तुरंत बंद कर देना चाहिए। भारत दुनिया का सबसे प्राचीन और अत्यंत सुदृढ़ लोकतांत्रिक देश है, जो किसी भी प्रकार की अराजकता, आगजनी या दंगे भड़काने की राजनीति से नहीं डगमगाएगा। देश की पूरी शासन व्यवस्था संविधान के स्पष्ट नियमों और जनता द्वारा दिए गए जनादेश के आधार पर ही चलेगी, न कि सड़क पर माहौल बिगाड़कर सत्ता पलटने की कोशिशों से। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर संस्थाओं की साख गिराने और जनता में अविश्वास का माहौल खड़ा करने का गंभीर आक्षेप लगाया।
1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख और कांग्रेस पर वार
अपने संबोधन में जेपी नड्डा ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का विशेष रूप से उल्लेख किया और कांग्रेस के इतिहास पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने 1 नवंबर की तारीख को भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे काला और दागदार दिन करार दिया। नड्डा ने आरोप लगाया कि इसी ऐतिहासिक तारीख पर कांग्रेस पार्टी द्वारा पाले गए तत्वों ने निर्दोष सिख नागरिकों का कत्लेआम किया था। उस भयावह दौर में हजारों सिख परिवारों को रातोंरात बेघर कर दिया गया और अनगिनत महिलाएं विधवा हो गईं।
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की विधवा कॉलोनी आज भी उस क्रूर और खूनी दौर की जीवित गवाह बनकर खड़ी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि गांधी परिवार ने उस अक्षम्य कृत्य के लिए आज तक सिख समुदाय से निष्कपट भाव से माफी नहीं मांगी है। नड्डा ने कहा कि आज का दिन असल में दंगा पीड़ितों और शहीदों को नमन करने और उनके दर्द को साझा करने का अवसर था, लेकिन राहुल गांधी इस काले दिन का इस्तेमाल रामलीला मैदान में रैली करके अपने संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों से भी सीधा सवाल पूछा कि क्या वे इस तारीख पर रैली में शामिल होकर सिख समुदाय के पुराने जख्मों पर नमक छिड़कने के कृत्य में कांग्रेस के सहभागी बन रहे हैं।
व्यापारियों की आजीविका और करोड़ों के आर्थिक नुकसान की चिंता
राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़ते हुए जेपी नड्डा ने इस विशाल राजनीतिक जमावड़े के कारण दिल्ली के आम व्यापारियों और छोटे दुकानदारों को झेलने पड़ रहे नुकसान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के व्यस्त समय में सड़कों पर इस तरह के भारी जमावड़े से बाजारों की सामान्य गतिविधियां पूरी तरह चरमरा जाती हैं, जिससे स्थानीय खुदरा कारोबारियों की रोजी-रोटी पर सीधा आघात पहुंचता है।
नड्डा ने चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई द्वारा राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को लिखे गए पत्रों का हवाला दिया। उन्होंने आंकड़ों के साथ स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पिछले प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के कारोबारियों को लगभग 3,000 करोड़ रुपए की भारी चपत लगी थी। वहीं रामलीला मैदान में आयोजित इस ताजा रैली की वजह से 10,000 करोड़ रुपए से भी अधिक के व्यापक आर्थिक नुकसान की गंभीर आशंका खड़ी हो गई है। त्योहारी मौसम में जब छोटे व्यापारी साल भर की कमाई की आस लगाए बैठे होते हैं, ऐसे समय में शहर को जाम और अव्यवस्था में धकेलना बेहद गैर-जिम्मेदाराना कदम है।
विदेशी दौरों और आर्थिक प्रहार पर नड्डा का अंतिम प्रहार
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के पूर्व के बयानों और विदेशी दौरों की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक तय रणनीति के तहत पहले विदेशों में जाकर भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा, छवि और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर प्रश्नचिह्न लगाए जाते हैं और फिर स्वदेश लौटकर देश की आर्थिक ताकत तथा लोकतांत्रिक नींव पर सीधा हमला बोला जाता है।
नड्डा ने दावा किया कि देश की जागरूक जनता अब इन राजनीतिक पैंतरेबाजियों और झांसों को भली-भांति समझने लगी है। लोकतंत्र को बंधक बनाने या जनता के फैसले को सड़कों पर चुनौती देकर अस्थिरता पैदा करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी क्योंकि देश संविधान की मर्यादा और जनमत की शक्ति से ही आगे बढ़ेगा।

















