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अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की सियांग जलविद्युत परियोजना के विरोध में तीन जिलों में 2 नवंबर को बंद का ऐलानअरुणाचल प्रदेश
1 नव॰ 2026, 12:27 pm (2 मिनट पहले)· 0

अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की सियांग जलविद्युत परियोजना के विरोध में तीन जिलों में 2 नवंबर को बंद का ऐलान

अरुणाचल प्रदेश के सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में बांध विरोधी प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी के खिलाफ 2 नवंबर को पूर्ण बंद रहेगा। युवा संगठन साया ने पैतृक जमीन, सियांग नदी और आदि समुदाय की पहचान बचाने के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन का आह्वान किया है।

अरुणाचल प्रदेश की विशाल प्रस्तावित सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना (SUMP) को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और तेज हो गया है। बांध विरोधी आंदोलन से जुड़े लोगों की हालिया गिरफ्तारियों और परियोजना प्रभावित इलाकों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती के विरोध में सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में 2 नवंबर को बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इस बंद का मुख्य मकसद स्थानीय समुदायों की आवाज दबाए जाने के प्रयासों का लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करना है।

गिरफ्तारियों और सर्वेक्षण कार्य के विरोध में आपात बैठक

इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे एसयूएमपी अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन (साया) ने 29 अक्टूबर को एक आपातकालीन कार्यकारी बैठक बुलाई थी। इस बैठक में परियोजना से प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सर्वसम्मति से बंद का प्रस्ताव पारित किया। साया ने स्पष्ट किया कि यह कदम सियांग इंडिजिनस फार्मर फोरम (एसआईएफएफ), स्थानीय समुदाय आधारित संगठनों, युवा मंचों और प्रभावित बाशिंदों के साथ मिलकर उठाया जा रहा है। स्थानीय लोग कथित जबरन सर्वेक्षण और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती का कड़ा विरोध कर रहे हैं।

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पैतृक जमीन और आदि पहचान की रक्षा का संकल्प

बोगुम बोकांग-टूटिंग क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली बोगुम बोकांग वेलफेयर सोसाइटी (बीबीडब्ल्यूएस) के अध्यक्ष को भेजे एक पत्र में, साया ने बंद के लिए समर्थन मांगा है। संगठन ने पूरे आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण, अहिंसक और लोकतांत्रिक बनाए रखने पर जोर दिया है। साया के अनुसार, यह प्रदर्शन मात्र एक परियोजना का विरोध नहीं है, बल्कि यह उनकी पुरखों की जमीन, सियांग नदी के प्राकृतिक स्वरूप, भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य और मूल आदि समुदाय की विशिष्ट पहचान की रक्षा की लड़ाई है। संगठन ने क्षेत्र के सभी निवासियों और सामाजिक संस्थाओं से एकजुट रहने की अपील की है।

भारत की सबसे बड़ी पनबिजली पहलों में शामिल है परियोजना

सियांग नदी पर प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की यह विशाल जलविद्युत परियोजना देश की सबसे बड़ी ऊर्जा पहलों में गिनी जाती है। हालांकि, इसकी योजना बनने के समय से ही स्थानीय आबादी में गंभीर असंतोष देखा जा रहा है। विशेष रूप से प्रस्तावित डूब क्षेत्र और प्रभावित हिस्सों में रहने वाले आदि समुदाय के विभिन्न वर्ग कई वर्षों से इस परियोजना के संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को लेकर लगातार असहमति जताते आ रहे हैं।

सवाल-जवाब

अरुणाचल प्रदेश के किन जिलों में बंद का आह्वान किया गया है?
यह बंद सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में 2 नवंबर के लिए बुलाया गया है।
इस बंद का आह्वान किस संगठन द्वारा किया गया है?
इस बंद की घोषणा एसयूएमपी अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन (साया) ने अन्य किसान और युवा संगठनों के सहयोग से की है।
बंद बुलाने का मुख्य कारण क्या है?
परियोजना विरोधी प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी, केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती और कथित जबरन सर्वेक्षण के विरोध में यह कदम उठाया गया है।
प्रस्तावित सियांग अपर परियोजना की क्षमता कितनी है?
सियांग नदी पर प्रस्तावित यह बहुउद्देशीय परियोजना 11,200 मेगावाट क्षमता की है।
स्थानीय समुदाय इस विशाल बांध का विरोध क्यों कर रहे हैं?
स्थानीय आदि समुदाय अपनी पैतृक भूमि, सियांग नदी के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों की पहचान को बचाने के लिए इसका विरोध कर रहे हैं।
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