त्योहारी सीजन के दौरान ऑटोमोबाइल बाजार में ग्राहकों की भारी आवाजाही देखने को मिलती है। आकर्षक डिस्काउंट, लुभावने ऑफर्स और नए मॉडलों के लॉन्च होने से शोरूम्स में डिलीवरी लेने वालों का तांता लग जाता है। ऐसी स्थिति में डीलरशिप पर गाड़ियों को जल्दी सौंपने का भारी दबाव रहता है। इसी आपाधापी के बीच कई बार खरीदारों को ऐसी गाड़ियां थमा दी जाती हैं जो स्टॉकयार्ड में महीनों से खड़ी धूल फांक रही हों, या जिनमें कोई तकनीकी खामी अथवा ट्रांसपोर्टेशन के दौरान हुआ डैमेज मौजूद हो। डिलीवरी के उत्साह में कई ग्राहक बिना सोचे-समझे कागजी औपचारिकताएं पूरी कर चाबी ले लेते हैं, जिससे बाद में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
वाहन का रजिस्ट्रेशन होने और डीलर को पूरा भुगतान करने से पहले प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन यानी PDI करना एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। गाड़ी की एक-एक चीज को बारीकी से देखकर संतुष्ट होना न केवल मानसिक सुकून देता है, बल्कि दोषपूर्ण वाहन मिलने की आशंका को भी पूरी तरह खत्म कर देता है। इसके लिए कुछ बुनियादी लेकिन बेहद अहम जांच प्रक्रियाएं अपनानी चाहिए।
जांच के लिए सही समय और रोशनी का चुनाव
प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन हमेशा दिन के उजाले और खुली रोशनी में ही करना चाहिए। शोरूम के बेसमेंट या कम रोशनी वाले स्टॉकयार्ड में गाड़ी का मुआयना करने से बचना जरूरी है, क्योंकि वहां हल्की रोशनी में छोटे डेंट, उभार या पेंट पर लगे बारीक स्क्रैच नजर नहीं आते। खुली प्राकृतिक रोशनी में कार की बॉडी का वास्तविक रंग और सतह साफ दिखाई देती है।
एक्सटीरियर, पेंट और बॉडी पैनल्स का मुआयना
गाड़ी के चारों तरफ चक्कर लगाकर बॉडी पैनल्स के बीच के गैप की पड़ताल करें। अगर कहीं दो पैनल्स के बीच की दूरी असमान दिखे, तो यह संकेत हो सकता है कि ट्रांसपोर्टेशन या लोडिंग के वक्त गाड़ी कहीं टकराई है और उसकी मरम्मत की गई है। इसके साथ ही पूरे वाहन के पेंट की चमक एक समान होनी चाहिए।
कार की विंडशील्ड, साइड की खिड़कियों और पिछले शीशे को ध्यान से देखें कि कहीं कोई क्रैक, स्क्रैच या चिपिंग तो नहीं है। इसके साथ ही वाइपर ब्लेड्स की रबर भी चेक करें कि वह कटी-फटी या सख्त तो नहीं हो गई है। चारों टायरों पर नजर डालें, उनकी मैन्युफैक्चरिंग डेट देखें और ट्रेड की गहराई जांचें। कार का बूट स्पेस खोलकर स्पेयर व्हील, टूल किट, जैक और फर्स्ट-एड किट की मौजूदगी और हालत भी पक्की कर लें।
केबिन की बनावट, सीटें और डैशबोर्ड की स्थिति
कार के इंटीरियर में दाखिल होकर सीट अपहोल्स्ट्री, रूफ लाइनिंग और दरवाजों की पैडिंग पर किसी तरह के दाग-धब्बे या कट की जांच करें। ड्राइवर और पैसेंजर सीटों को आगे-पीछे खिसकाकर और रीक्लाइन करके उनके सभी मैकेनिकल या इलेक्ट्रॉनिक मूवमेंट्स को परखें।
डैशबोर्ड और सेंटर कंसोल पर किसी तरह की खरोंच नहीं होनी चाहिए। ग्लव बॉक्स, सनवाइजर और अन्य स्टोरेज कंपार्टमेंट्स को खोलकर और बंद करके देखें कि वे सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। केबिन के अंदर सांस लेते वक्त इस बात पर भी गौर करें कि कहीं सीलन, फफूंद या चूहे के तारों को काटने जैसी कोई गंध तो नहीं आ रही है, क्योंकि ऐसी महक गाड़ी के महीनों तक खुले स्टॉकयार्ड में अप्रयुक्त पड़े रहने की ओर इशारा करती है।
इलेक्ट्रिकल उपकरण, एसी और इन्फोटेनमेंट सिस्टम
कार के सभी जरूरी इलेक्ट्रिकल पुर्जों की जांच बेहद जरूरी है। हेडलैंप्स के हाई और लो बीम, फॉग लैंप्स, टर्न इंडिकेटर्स और पिछले हिस्से की टेललाइट्स को जलाकर देखें कि सभी बल्ब और एलईडी सही काम कर रहे हैं।
इंजन स्टार्ट करने के बाद एयर कंडीशनर और हीटर की क्षमता तुरंत परखें। ब्लोअर को अलग-अलग स्पीड पर चलाकर कूलिंग और हीटिंग की तीव्रता देखें। इसके अलावा टचस्क्रीन इन्फोटेनमेंट सिस्टम, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, स्पीकर्स, रिवर्स पार्किंग कैमरा और सेंसर्स को ऑपरेट करके जांचें। सभी पावर विंडोज, सनरूफ और साइड मिरर्स के कंट्रोल्स को दबाकर देखें कि वे सुचारू रूप से काम कर रहे हैं।
बोनट के नीचे इंजन कंपार्टमेंट की पड़ताल
कार का बोनट खोलकर इंजन ऑयल, कूलेंट, ब्रेक ऑयल और वॉशर फ्लूइड के स्तर की जांच करें। इंजन बे के भीतर किसी पाइप, होज या केबल में कट, ढीले तार या किसी तरह के लिक्विड लीकेज के निशान नहीं होने चाहिए। इसके साथ ही बैटरी के टर्मिनल्स को भी देखें कि उन पर कोई जंग या कोरोजन न जमा हो।
ओडोमीटर, VIN और जरूरी दस्तावेजों का मिलान
नई कार के डिजिटल या एनालॉग ओडोमीटर पर नजर डालें। आमतौर पर नई गाड़ी की रीडिंग 30 से 70 किलोमीटर के दायरे में होनी चाहिए। यदि ओडोमीटर पर 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी दर्ज दिखती है, तो ग्राहक को डीलर से इसका स्पष्ट और लिखित कारण मांगना चाहिए।
कार के चेसिस नंबर यानी व्हीकल आइडेंटिफिकेशन नंबर (VIN) को डिकोड करके वाहन के निर्माण का महीना और वर्ष जांचें, ताकि डीलरशिप पुराना स्टॉक न बेच सके। इसके बाद इनवॉइस, इंश्योरेंस कॉपी, वारंटी बुकलेट और ओनर मैनुअल पर छपे इंजन नंबर और चेसिस नंबर का मिलान कार की फिजिकल प्लेट्स से करें। जब तक इन सभी जांच बिंदुओं पर तसल्ली न हो जाए, तब तक डिलीवरी चालान पर हस्ताक्षर न करें और अंतिम भुगतान रोक कर रखें।



















