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रांची के प्रभात ने साझा किया सफलता का सूत्र, रिटायरमेंट से पांच साल पहले की गई प्लानिंग से चल रही जिंदगीझारखंड
4 सित॰ 2026, 6:14 am (21 दिन पहले)· 2

रांची के प्रभात ने साझा किया सफलता का सूत्र, रिटायरमेंट से पांच साल पहले की गई प्लानिंग से चल रही जिंदगी

कोल इंडिया से सेवानिवृत्त रांची निवासी प्रभात ने अपनी सफलता का फॉर्मूला बताया है। उन्होंने रिटायरमेंट से पांच साल पहले ही वित्तीय योजना बना ली थी और आज वे फिक्स्ड डिपॉजिट के ब्याज तथा अपने शौक के सहारे तनावमुक्त जीवन जी रहे हैं।

रांची के रहने वाले प्रभात कोल इंडिया कंपनी से अपनी सेवा पूरी कर चुके हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान ही भविष्य को सुरक्षित करने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली थी। प्रभात का कहना है कि उन्होंने अपने करियर के अंतिम पड़ाव यानी रिटायरमेंट से पांच साल पहले ही फाइनेंशियल प्लानिंग करना शुरू कर दिया था। इसके साथ ही उन्होंने अपने स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखा और अपनी पुरानी हॉबी गार्डनिंग को भी जिंदा रखा, जिसकी बदौलत आज वह बिना किसी शारीरिक या मानसिक तनाव के जीवन का आनंद उठा रहे हैं। आज उनकी दिनचर्या में पैसों की कोई चिंता नहीं है और वे प्रकृति के करीब रहते हुए अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना है सबसे जरूरी

प्रभात के अनुसार, बुढ़ापे के दिनों में सबसे बड़ी चुनौती स्वास्थ्य से जुड़ी होती है। यदि उम्र के इस पड़ाव पर थोड़ी सी भी लापरवाही हो जाए और पैर फिसलने से हड्डी टूट जाए, तो अस्पताल का भारी भरकम बिल जेब पर भारी पड़ जाता है। इस तरह की समस्याओं से बचने के लिए उन्होंने पचास की उम्र पार करते ही योग और एक्सरसाइज के जरिए खुद को चुस्त-दुरुस्त रखना शुरू कर दिया था। इसी का परिणाम है कि आज इस उम्र में भी वे पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें किसी भी तरह की कोई गंभीर बीमारी नहीं है।

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रिटायरमेंट से पांच साल पहले की वित्तीय योजना

भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए प्रभात बताते हैं कि उन्होंने सेवानिवृत्ति मिलने से पांच साल पहले ही यह हिसाब लगा लिया था कि उन्हें मिलने वाली कुल राशि को किस प्रकार निवेश करना है। उन्होंने पहले ही गणना कर ली थी कि मिलने वाले फंड को फिक्स्ड डिपॉजिट में डालने पर कितना ब्याज मिलेगा और उनके महीने भर के खर्च कितने हैं। उन्होंने अपने रिटायरमेंट के फंड को बिल्कुल नहीं छुआ और पूरी राशि को सीधे फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश कर दिया। आज उसी निवेश से मिलने वाले ब्याज के जरिए उनका खर्च आसानी से चल रहा है और उन्हें पैसों को लेकर कभी सोचना नहीं पड़ता है।

प्रकृति के बीच गार्डनिंग से मिलता है मानसिक सुकून

बचपन से ही पेड़-पौधों और प्रकृति के प्रति गहरा लगाव रखने वाले प्रभात ने रिटायरमेंट के बाद अपने इसी पुराने जुनून को अपना मुख्य काम बना लिया। उनका मानना है कि दुनिया के लिए जीने के बाद यह वह समय होता है जब इंसान को अपने भीतर की इच्छाओं और सपनों को पूरा करना चाहिए। वे रोजाना चार से पांच घंटे गार्डनिंग में बिताते हैं। प्रकृति के सान्निध्य में रहने के कारण उनका शरीर तो फिट रहता ही है, साथ ही उनका मन भी बेहद प्रसन्न रहता है। वे फुर्सत के पलों में जंगलों की सैयर करने और पहाड़ों पर चढ़ने निकल जाते हैं।

सेवानिवृत्ति के बाद शुरू होती है असली जिंदगी

प्रभात का यह स्पष्ट मानना है कि जीवन के असली सुख का अहसास सेवानिवृत्ति के बाद ही होता है। इस दौर में व्यक्ति अपने दिल की आवाज सुन सकता है और अपनी इच्छाओं के अनुसार जी सकता है। वे घर में कभी भी खाली नहीं बैठते हैं और जब भी समय मिलता है, प्रकृति के बीच निकल जाते हैं। उनका संदेश है कि उम्र केवल एक संख्या मात्र है और इंसान कभी बूढ़ा नहीं होता है। हर किसी को अपने दिल में दबी इच्छाओं को पूरा करना चाहिए और जीवन के हर पल का भरपूर आनंद लेना चाहिए।

सवाल-जवाब

प्रभात किस कंपनी से रिटायर्ड हैं?
प्रभात कोल इंडिया कंपनी से रिटायर्ड हैं।
उन्होंने अपनी वित्तीय योजना कब बनाई थी?
उन्होंने अपने रिटायरमेंट से पांच साल पहले ही वित्तीय योजना बना ली थी।
उनके खर्चों का संचालन कैसे होता है?
उनके रिटायरमेंट के पैसे फिक्स्ड डिपॉजिट में हैं और मिलने वाले ब्याज से उनका खर्च चलता है।
वे स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के लिए क्या करते हैं?
वे पचास की उम्र के बाद से योग और एक्सरसाइज के माध्यम से अपनी बॉडी को त्दुरूस्त रखते आ रहे हैं।
वे अपना खाली समय कैसे बिताते हैं?
वे हर दिन चार से पांच घंटे गार्डनिंग करते हैं और फुर्सत मिलने पर जंगल व पहाड़ों की सैर करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

यह मामला वित्तीय अनुशासन और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के सीधे जुड़ाव को रेखांकित करता है। अपराध और अदालती मामलों की रिपोर्टिंग के दौरान अक्सर ऐसे मामले सामने आते हैं जहाँ सेवानिवृत्ति के बाद की आर्थिक असुरक्षा बुजुर्गों को तनाव और पारिवारिक विवादों की तरफ धकेल देती है। प्रभात का यह मॉडल दिखाता है कि समय पर सही योजना और स्वास्थ्य के प्रति सजगता न केवल कानूनी और वित्तीय झंझटों से बचाती है, बल्कि जीवन के अंतिम चरण में अपराध मुक्त और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने की सबसे बड़ी कुंजी है।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

करन जी का यह विश्लेषण बिल्कुल सटीक है। जब हम उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े अपराधों और सामाजिक संघर्षों की ज़मीनी रिपोर्टिंग करते हैं, तो यह बात बार-बार सामने आती है कि वित्तीय असुरक्षा और खराब स्वास्थ्य ही पारिवारिक कलह और तनाव का मुख्य कारण बनते हैं। प्रभात की यह कहानी एक नीतिगत सबक है कि यदि करियर के अंतिम वर्षों में नियोजित फिक्स्ड डिपॉजिट और स्वास्थ्य प्रबंधन को प्राथमिकता दी जाए, तो बुढ़ापे में अदालती चक्करों और मानसिक अवसाद से आसानी से बचा जा सकता है। यह मॉडल समाज के हर वर्ग के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।

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