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रेलवे स्टेशनों के पानी में मिला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया, कैग रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही आई सामनेभारत
16 अग॰ 2026, 7:27 am (46 दिन पहले)· 2

रेलवे स्टेशनों के पानी में मिला खतरनाक ई-कोलाई बैक्टीरिया, कैग रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही आई सामने

संसद में पेश कैग की ऑडिट रिपोर्ट में देश के कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को उपलब्ध कराए जा रहे पीने के पानी में ई-कोलाई समेत खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं। जांच में 59 स्टेशनों पर पानी की बैक्टीरिया संबंधी जांच न कराने और शौचालयों व बैठने की व्यवस्था में भारी कमियों की बात भी सामने आई है।

देशभर के रेलवे स्टेशनों पर यात्रा के दौरान प्लेटफॉर्म के नलों और वाटर कूलरों से पानी पीने वाले यात्रियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। संसद में 12 अगस्त को प्रस्तुत की गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी कैग की विस्तृत रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों की बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रमुख स्टेशनों पर पीने के पानी में ई-कोलाई समेत कई अन्य हानिकारक और बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया पाए गए हैं। रोज़ाना लाखों यात्री जिस पानी का इस्तेमाल बिना किसी झिझक के करते हैं, उसकी गुणवत्ता कई स्थानों पर तय मानकों के बिल्कुल अनुरूप नहीं पाई गई है।

प्रमुख रेलवे स्टेशनों के कूलरों में मिला खतरनाक ई-कोलाई

कैग द्वारा की गई जांच में विभिन्न रेलवे जोनों के कई महत्वपूर्ण स्टेशनों पर पानी के बैक्टीरियोलॉजिकल विश्लेषण में गंभीर कमियां पाई गईं। कई बड़े स्टेशनों पर बने वाटर कूलरों से लिए गए पानी के नमूनों की लैब जांच कराने पर उनमें ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। दक्षिण रेलवे के अंतर्गत कोयंबटूर जंक्शन और पालक्काड जंक्शन के वाटर कूलरों का पानी ई-कोलाई के लिए पॉजिटिव पाया गया। इसके अलावा दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद स्टेशन पर भी ऐसी ही स्थिति दर्ज की गई। मध्य रेलवे के तहत छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला जैसे व्यस्त स्टेशनों पर लगाए गए वाटर कूलरों के सैंपल में भी ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। वहीं पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के पीने के पानी के सैंपल में भी इस खतरनाक बैक्टीरिया की मौजूदगी दर्ज की गई।

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लापरवाही का आलम, 59 स्टेशनों पर नहीं कराई गई पानी की जांच

रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि यात्री सुरक्षा से जुड़े बुनियादी नियमों की अनदेखी की जा रही थी। छह रेलवे जोनों के कुल 59 स्टेशनों पर पीने के पानी का आवश्यक बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण कराया ही नहीं गया था। पानी की गुणवत्ता की समय पर जांच न होने के कारण यह पता ही नहीं चल सका कि यात्रियों को दिया जा रहा पानी सुरक्षित है या नहीं। नियमित रूप से जल नमूनों का परीक्षण न कराना यात्रियों की सेहत के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है, जिससे जल जनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

लगातार वर्षों के आंकड़ों में दिखी जल स्वच्छता की गिरती स्थिति

कैग ने देश के 512 गैर उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर उपलब्ध यात्री सुविधाओं, शौचालयों और साफ सफाई का विस्तृत ऑडिट किया। आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि पीने के पानी में खराबी की समस्या कोई अचानक आई स्थिति नहीं है। साल 2022-23 के दौरान आठ रेलवे जोनों के 49 स्टेशनों के प्लेटफॉर्म नलों से लिए गए पानी के नमूनों में ई-कोलाई सहित कई घातक बैक्टीरिया मिले थे। इसी दौरान चार जोनों के आठ स्टेशनों पर अन्य बैक्टीरियोलॉजिकल जांच के परिणाम भी असंतोषजनक पाए गए थे। अगले वित्त वर्ष 2023-24 में स्थिति और बिगड़ गई, जब नौ जोनों के 56 स्टेशनों के नलों के पानी में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए। इसके साथ ही 2023-24 में ही पांच जोनों के 11 स्टेशनों पर पानी के अन्य जैविक परीक्षणों के नतीजे भी मानकों पर खरे नहीं उतरे।

शौचालयों और अन्य बुनियादी सुविधाओं में भी मिलीं व्यापक खामियां

कैग की इस ऑडिट रिपोर्ट में केवल पीने के पानी तक ही खामियां सीमित नहीं रहीं, बल्कि स्टेशनों पर मौजूद अन्य जन सुविधाओं का ढांचा भी चरमराया हुआ पाया गया। निरीक्षण के दौरान स्टेशनों पर बने शौचालयों, मूत्रालयों, प्लेटफॉर्म पर लगे नलों और यात्रियों के बैठने की व्यवस्था में भारी कमियां उजागर हुईं। कई स्थानों पर स्वच्छता का अभाव पाया गया और टूटे-फूटे उपकरण देखने को मिले। रिपोर्ट निष्कर्ष निकालती है कि रेलवे को स्टेशनों पर पीने के पानी की अनिवार्य जांच, नियमित सफाई और यात्री सुविधाओं के रख-रखाव के लिए एक सख्त निगरानी तंत्र तुरंत लागू करने की आवश्यकता है।

सवाल-जवाब

कैग की रिपोर्ट में रेलवे स्टेशनों के पानी को लेकर क्या खुलासा हुआ है?
कैग की रिपोर्ट के अनुसार देश के कई रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलरों और नलों के पानी में ई-कोलाई समेत खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जो यात्रियों की सेहत के लिए हानिकारक हैं।
किन रेलवे स्टेशनों के वाटर कूलरों में ई-कोलाई बैक्टीरिया पाया गया?
जांच में कोयंबटूर, पालक्काड, हैदराबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला और मधुपुर स्टेशनों के वाटर कूलरों का पानी ई-कोलाई से दूषित पाया गया।
कितने रेलवे स्टेशनों पर पानी की अनिवार्य जांच नहीं कराई गई थी?
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक छह रेलवे जोनों के कुल 59 स्टेशनों पर पीने के पानी का अनिवार्य बैक्टीरियोलॉजिकल विश्लेषण नहीं कराया गया था।
कैग की इस ऑडिट में कितने स्टेशनों की जांच की गई थी?
कैग ने देश भर के 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं, स्वच्छता और पानी की गुणवत्ता का व्यापक ऑडिट किया।
पीने के पानी के अलावा रिपोर्ट में और किन सुविधाओं में कमियां पाई गईं?
रिपोर्ट में पानी के अलावा प्लेटफॉर्म पर शौचालयों, मूत्रालयों, पानी के नलों और यात्रियों के बैठने के बेंचों में भी भारी कमियों और सफाई के अभाव को उजागर किया गया है।
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टिप्पणियाँ 1

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 दिन पहले

कैग रिपोर्ट में सामने आई यह लापरवाही सीधे तौर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और लोक सुरक्षा के प्रति आपराधिक उपेक्षा का गंभीर मामला है। यात्रियों को दूषित पानी पिलाना और 59 स्टेशनों पर अनिवार्य बैक्टीरियोलॉजिकल परीक्षण तक न कराना रेलवे प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग करता है। इस गंभीर विफलता पर यदि समय रहते कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, तो यह जल जनित महामारी का रूप ले सकती है.

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