झारखंड के विभिन्न हिस्सों में बीते कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश का सिलसिला अब पूरी तरह थमने लगा है। मौसम के बदलते रुख के बीच राज्य भर में वर्षा की तीव्रता में भारी गिरावट दर्ज की गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान के अनुसार, 1 अक्टूबर को राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ रहेगा, जबकि कुछ सीमित इलाकों में केवल छिटपुट बौछारें दर्ज की जा सकती हैं। राहत की बात यह है कि समूचे राज्य में कहीं भी अत्यधिक या भारी वर्षा को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।
उत्तरी और पूर्वी इलाकों के 9 जिलों में छिटपुट बौछारें
मौसम केंद्र के विश्लेषण के अनुसार, राज्य के उत्तरी और संथाल परगना प्रमंडल से जुड़े नौ विशिष्ट जिलों में स्थानीय स्तर पर बादलों की आवाजाही देखी जा सकती है। इन जिलों में चतरा, कोडरमा, हजारीबाग, गिरिडीह, देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज शामिल हैं। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन क्षेत्रों में केवल अलग-थलग स्थानों पर हल्की बारिश दर्ज होगी। इन नौ जिलों को छोड़कर झारखंड के शेष भूभाग में वर्षा की संभावना न के बराबर है, जिससे लगातार हो रही वर्षा से परेशान नागरिकों को सामान्य दिनचर्या में लौटने में मदद मिलेगी।
4 अक्टूबर तक नहीं होगी मूसलाधार बारिश
राज्य स्तर पर किसी भी जिले के लिए 1 अक्टूबर को भारी बारिश का कोई अलर्ट प्रभावी नहीं है। हालांकि, वायुमंडलीय बदलावों के चलते कुछ क्षेत्रों में हल्के बादल घिरे रह सकते हैं और कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। मौसम विज्ञानियों ने रेखांकित किया है कि 1 अक्टूबर से लेकर 4 अक्टूबर तक राज्य भर में मौसमी हलचल बेहद सीमित स्तर पर बनी रहेगी। इसका अर्थ यह है कि वर्षा पूरी तरह बंद तो नहीं होगी, लेकिन उसकी गति इतनी मंद रहेगी कि जलभराव, नदियों के उफान या बाढ़ जैसी किसी भी विकट स्थिति की कोई गुंजाइश नहीं बनेगी।
5 अक्टूबर से विदा हो सकता है मानसून
दक्षिण-पश्चिम मानसून अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। मौसम विज्ञान विभाग के आकलन के अनुसार, झारखंड से मानसून की आधिकारिक वापसी 5 अक्टूबर से शुरू होने के आसार हैं। पारंपरिक तौर पर राज्य में जून से लेकर सितंबर तक के चार महीनों में मानसूनी हवाओं से सबसे अधिक जलवृष्टि होती है। हालांकि, मानसून बीत जाने के बाद भी अक्टूबर से फरवरी के शीतकालीन महीनों के दौरान पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमी उतार-चढ़ाव के चलते यदा-कदा बूंदाबांदी देखने को मिलती रहती है।
राजधानी रांची में कैसा बना रहेगा वातावरण
राजधानी रांची और इसके आसपास के उपनगरीय क्षेत्रों में आने वाले कुछ दिनों तक सुहावना और आंशिक बादलों वाला मौसम बने रहने की उम्मीद है। 1 अक्टूबर को रांची के लिए भी भारी वर्षा की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। दिन के समय धूप-छांव के बीच आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं और कुछ चुनिंदा स्थानों पर बेहद हल्की बूंदाबांदी दर्ज की जा सकती है, जिससे तापमान में बहुत अधिक फेरबदल नहीं देखा जाएगा।
मानसून आंकड़ों का लेखा-जोखा: पूरे राज्य में 2 प्रतिशत कमी
झारखंड में समूचे मानसून चक्र के दौरान सामान्य तौर पर 1,025 से लेकर 1,100 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की जाती है। इस वर्ष 1 जून से लेकर 30 सितंबर के बीच पूरे राज्य में कुल 1,005 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई, जो कि सामान्य औसत की तुलना में लगभग 2 प्रतिशत कम मानी गई है।
रांची में सामान्य से 18 प्रतिशत अधिक बरसे बदरा
पूरे राज्य के समग्र आंकड़े में मामूली कमी के विपरीत, राजधानी रांची में इस मानसून सीजन में जोरदार बादल बरसे। मौसम विभाग के संकलित आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून से 30 सितंबर के दौरान रांची में कुल 1,215 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। राजधानी का सामान्य मानसूनी औसत 1,027 मिलीमीटर रहता है, जिसका अर्थ है कि इस वर्ष रांची में सामान्य से करीब 18 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज हुई है।

















