राजस्थान के कृषि विपणन ढांचे को नया रूप देने और ग्रामीण अंचलों के किसानों को राहत पहुंचाने के मकसद से राज्य प्रशासन ने व्यापक योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडी समितियों के कायाकल्प के लिए 57 करोड़ 41 लाख रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी प्रदान कर दी है। इस स्वीकृत बजट के माध्यम से चयनित मंडियों के आंतरिक परिसरों में नए यार्ड तैयार किए जाएंगे, बिजली के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाया जाएगा और मंडियों को गांवों से जोड़ने वाली संपर्क सड़कों के नवनिर्माण व जीर्णोद्धार का कार्य तेज गति से पूरा कराया जाएगा। इस कदम का सीधा लक्ष्य खेत से मंडी तक उपज लाने की पूरी प्रक्रिया को सुगम, सुरक्षित और किफायती बनाना है, ताकि किसानों के साथ-साथ व्यापारियों को भी एक सुव्यवस्थित कारोबारी माहौल मिल सके।
मंडी तक उपज लाने में परिवहन व्यवस्था बनेगी सुगम
कृषि उपज के व्यापार में खेत से लेकर नीलामी स्थल तक का सफर बेहद अहम भूमिका निभाता है। किसी भी कृषि मंडी की उपयोगिता उसकी सड़क कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति और सुरक्षित यार्ड पर निर्भर करती है। ग्रामीण क्षेत्रों से किसान अनाज, दलहन और तिलहन लेकर तभी समय पर पहुंच सकते हैं जब संपर्क मार्ग दुरुस्त हों। वर्तमान में कई इलाकों में संपर्क मार्ग जर्जर और गड्ढों से भरे होने की वजह से किसानों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है, जिससे उनकी फसलों की ढुलाई का समय और परिवहन लागत दोनों काफी बढ़ जाती है। क्षतिग्रस्त संपर्क सड़कों के पुनर्निर्माण और नई डामर सड़कों के बन जाने से किसानों की गाड़ियां बिना रुकावट मंडियों तक पहुंच सकेंगी। इससे जिंसों की बर्बादी रुकेगी और ग्रामीण परिवहन व्यवस्था को नया संबल मिलेगा।
प्रदेश के 30 प्रमुख मंडी परिसरों में होंगे विकास कार्य
स्वीकृत 57.41 करोड़ रुपये की इस राशि को प्रदेश के विभिन्न जिलों में फैली 30 चुनिंदा कृषि उपज मंडी समितियों की स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च किया जाएगा। इस बड़े विकास अभियान में पश्चिमी राजस्थान से लेकर हाड़ौती और शेखावाटी तक के केंद्र शामिल किए गए हैं। प्रमुख रूप से बीकानेर जिले की चार मंडियां—बज्जू, नोखा, खाजूवाला और श्रीडूंगरगढ़ इसमें शामिल हैं। इसके अलावा सीकर जिले की पलसाना और सीकर मंडी, जैसलमेर, प्रतापगढ़, दौसा जिले की मंडावरी और महवा, बारां, नाहरगढ़, टोंक जिले की उनियारा और निवाई, समरानियां, चूरू जिले की सादुलपुर, ब्यावर जिले की बिजयनगर, श्रीगंगानगर जिले की रिडमलसर और घड़साना मंडियां इस सूची में रखी गई हैं।
इसी क्रम में चित्तौड़गढ़ जिले की कपासन, डीडवाना, भीनमाल, मदनगंज-किशनगढ़, डेगाना, डीग जिले की कामां, नागौर, उदयपुर, झालावाड़ जिले की चौमहला, कोटा और हनुमानगढ़ जिले की संगरिया मंडी समिति को भी बुनियादी सुधार के लिए बजट आवंटित किया गया है। इन सभी 30 मंडियों में आवश्यकता का तकनीकी आंकलन करके नए मंडी यार्ड तैयार होंगे, रात्रि नीलामी और सुरक्षा के लिए आधुनिक प्रकाश व्यवस्था की जाएगी, और मंडी तक पहुंचने वाले खराब रास्तों की विशेष मरम्मत कराई जाएगी।
यार्ड और मजबूत बिजली तंत्र से संवरेगा व्यापार
मंडी परिसरों के भीतर खुले आसमान के नीचे कृषि जिंसों के रखरखाव में अक्सर जोखिम रहता है। नए मंडी यार्डों का निर्माण होने से किसानों की उपज को सुरक्षित तरीके से उतारने, छांटने और नीलामी कराने के लिए पर्याप्त कवर्ड प्लेटफॉर्म मिलेंगे। इसके साथ ही बिजली से जुड़े कार्यों के सुदृढ़ीकरण से इलेक्ट्रॉनिक तौल कांटों, प्रकाश व्यवस्था और कम्प्यूटरीकृत बिलिंग प्रणाली के संचालन में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आएगा। जब मंडी परिसर में बुनियादी सुविधाएं आधुनिक और भरोसेमंद होंगी, तो किसानों और आढ़तियों दोनों के काम के घंटे बचेंगे और सौदों के निपटारे में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
जिंसों की आवक और मंडी समितियों के राजस्व में इजाफे की उम्मीद
बेहतर सड़क जाल और सुविधायुक्त मंडी परिसर का सीधा असर कृषि जिंसों की दैनिक आवक पर पड़ता है। जब सुगम रास्तों की वजह से किसान दूरदराज के खेतों से भी आसानी से मंडियों का रुख करेंगे, तो इन 30 कृषि मंडियों में फसलों की कुल आवक में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है। व्यापारिक लेन-देन में तेजी आने से मंडी समितियों की फीस और राजस्व संग्रह में भी बढ़ोतरी होगी। सरकार का यह समग्र दृष्टिकोण केवल चारदीवारी के अंदर तक सीमित न रहकर मंडियों को समूचे ग्रामीण परिवेश से जोड़ने का है, जिससे किसान, व्यापारी और मंडी प्रशासन तीनों पक्षों को सीधा आर्थिक लाभ सुनिश्चित हो सकेगा।



















