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सचिवालय से लेकर बसों के पहिये तक थमे, पंजाब में कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश से जनजीवन प्रभावितपंजाब
21 अक्तू॰ 2026, 10:32 am (17 दिन पहले)· 3

सचिवालय से लेकर बसों के पहिये तक थमे, पंजाब में कर्मचारियों के सामूहिक अवकाश से जनजीवन प्रभावित

पंजाब में लगभग 3 लाख सरकारी कर्मचारियों के दो दिवसीय अवकाश पर जाने और 3,000 से अधिक बसों का चक्का जाम होने से दफ्तरों के कामकाज और सार्वजनिक आवागमन पर गंभीर असर पड़ा है।

पंजाब भर में सरकारी कामकाज और सार्वजनिक यात्रा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, क्योंकि लगभग 3 लाख सरकारी कर्मियों ने अपने लंबित मसलों को लेकर दो दिनों के सामूहिक आकस्मिक अवकाश का फैसला किया है। बुधवार और गुरुवार को होने वाले इस बड़े विरोध प्रदर्शन के कारण नागरिक सेवाओं से जुड़े सरकारी दफ्तरों में कामकाज ठप होने की स्थिति बन गई है। वहीं दूसरी तरफ राज्य की परिवहन व्यवस्था संभालने वाले संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने भी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है, जिससे दैनिक यात्रियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

सचिवालय से लेकर जिला स्तर तक प्रशासनिक काम रुके

कर्मचारी संघों और राज्य शासन के बीच मांगों को लेकर जारी मतभेद अब खुले टकराव का रूप ले चुका है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों का स्पष्ट कहना है कि लंबे समय से उठाई जा रही मांगों पर सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिसके चलते उन्हें सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर जाने का कड़ा कदम उठाना पड़ा। इस विरोध प्रदर्शन के कारण पंजाब सिविल सचिवालय के साथ-साथ जिला मुख्यालयों, तहसीलों और ब्लॉक स्तर के दफ्तरों में आम नागरिकों से जुड़े जरूरी कामकाज रुक गए हैं। नागरिक प्रमाण पत्र, भूमि रजिस्ट्री, राजस्व मामले और फाइलों के निस्तारण से जुड़े कामों के लिए आने वाले लोगों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

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तीन हजार से अधिक सरकारी बसें डिपो में बंद

इस आंदोलन का सबसे व्यापक और सीधा असर राज्य के सार्वजनिक परिवहन तंत्र पर दिखाई दे रहा है। पंजाब रोडवेज, पनबस और पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (पीआरटीसी) के बेड़े की करीब 3,000 से अधिक सरकारी बसें सड़कों से हट गई हैं। इन उपक्रमों के संविदा और आउटसोर्स कर्मियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से केवल पंजाब के भीतर ही नहीं, बल्कि केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ और अन्य राज्यों के लिए चलने वाली अंतरराज्यीय सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। लंबी दूरी के रूट बंद होने से नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और दैनिक यात्रियों को निजी बसों या महंगे टैक्सियों का सहारा लेना पड़ रहा है।

मंगलवार शाम से ही रोक दिए गए थे लंबे रूट

आंदोलन की पूर्व तैयारी के तहत मंगलवार दोपहर बाद से ही बस अड्डों और डिपो पर हालात बदलने लगे थे। पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के प्रतिनिधियों के अनुसार, डिपो पर तैनात चालकों और परिचालकों ने मंगलवार दोपहर के बाद रात में ठहरने वाली लंबी दूरी की बसों को चलाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद सभी वाहनों को वापस डिपो परिसरों में खड़ा करा दिया गया। यूनियन ने यह स्पष्ट कर दिया था कि बुधवार सुबह की शुरुआती पाली से ही कोई भी सरकारी गाड़ी सड़क पर नहीं उतरेगी।

पक्की नौकरी और निजी एजेंसियों को बाहर करने की मांग

प्रदर्शनकारी कर्मियों का मुख्य संघर्ष उनकी नौकरी की सुरक्षा और नियमितीकरण को लेकर है। परिवहन संघ मांग कर रहे हैं कि संविदा के आधार पर कार्यरत चालकों, परिचालकों और वर्कशॉप में काम करने वाले मैकेनिकों को विभागीय सेवा नियमों के तहत नियमित किया जाए। इसके साथ ही भर्ती प्रक्रिया में शामिल निजी आउटसोर्सिंग एजेंसियों को पूरी तरह खत्म करने और कर्मचारियों का सीधा अनुबंध संबंधित विभाग के माध्यम से करने पर जोर दिया जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों के समर्थन में औपचारिक सरकारी अधिसूचनाएं जारी नहीं हो जातीं, तब तक परिवहन का चक्का जाम जारी रहेगा।

सवाल-जवाब

पंजाब में कितने सरकारी कर्मचारी हड़ताल पर हैं?
पंजाब के करीब 3 लाख सरकारी कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर बुधवार और गुरुवार को दो दिवसीय सामूहिक आकस्मिक अवकाश लिया है।
परिवहन हड़ताल से कितनी सरकारी बसें प्रभावित हुई हैं?
पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी की 3,000 से अधिक सरकारी बसों का संचालन बंद हो गया है।
रोडवेज और पीआरटीसी कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं?
संविदा कर्मचारियों को नियमित सेवा नियमों में शामिल करना और निजी भर्ती एजेंसियों को हटाकर सीधे विभाग के माध्यम से अनुबंध करना उनकी मुख्य मांगें हैं।
क्या पंजाब के बाहर जाने वाली बसें भी बंद हैं?
हाँ, चंडीगढ़ और पड़ोसी राज्यों के लिए चलने वाली लंबी दूरी की सरकारी बस सेवाओं को डिपो में ही रोक दिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·17 दिन पहले

परसों चंडीगढ़ जाते हुए बस स्टैंड पर दो घंटे धक्के खाने पड़े थे। मुझे लगा शायद मौसम खराब होगा या कोई रूटीन जाम है, लेकिन तब समझ नहीं आया कि गाड़ियाँ अंदर ही क्यों खड़ी हैं। अब जाकर साफ हुआ कि ड्राइवर हड़ताल पर बैठे हैं और सचिवालय से लेकर बस डिपो तक सब तरफ यही हाल है।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

अचानक बसों के पहिये रुकने और दफ़्तरों में ताले लटकने से आम आदमी की परेशानी बढ़ गई है। हड़ताल का असर सिर्फ़ जनजीवन पर ही नहीं, बल्कि राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी सीधा पड़ता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·17 दिन पहले

रविकाश जी, आपकी बात बिल्कुल ठीक है। पर क्या सरकार के पास इस हड़ताल का कोई बैकअप प्लान है या जनता को दो दिन ऐसे ही परेशानी झेलनी पड़ेगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

कर्मचारियों की हड़ताल से आम जनता का पिसना तय है, कोर्ट और थानों तक जाने वाले लोगों को भी भारी परेशानी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

करण जी, बात बिल्कुल सही है, जब भी ऐसा होता है सबसे ज़्यादा परेशानी आम लोगों को ही उठानी पड़ती है।

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