उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित कोल्हमपुर मां दुर्गा मंदिर अपनी खास मान्यताओं और परंपराओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपती देश के कोने-कोने से दर्शन करने और अपनी झोली भरने की गुहार लगाने आते हैं। भक्त पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ माता की पूजा-अर्चना करते हैं तथा अपनी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद मांगते हैं। मंदिर आने वाले लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद अवश्य पूरी होती है।
नवरात्र के दौरान विशेष अनुष्ठान और प्रसाद
पवित्र नवरात्र के दिनों में इस मंदिर का महत्व और अधिक बढ़ जाता है, जिसके चलते यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इस पावन अवसर पर माता दुर्गा के चरणों में 251 फल अर्पित करने की अनूठी परंपरा है। पूजा संपन्न होने के बाद इन सभी फलों को मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित कर दिया जाता है। संतान की चाह रखने वाले दंपती इन विशेष रूप से चढ़ाए गए फलों को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं, जिसे उनकी मनोकामना पूर्ति का मार्ग माना जाता है।
मन्नत पूरी होने पर लौटते हैं श्रद्धालु
जिन परिवारों की मनोकामनाएं माता के आशीर्वाद से पूरी हो जाती हैं, वे अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए दोबारा इसी मंदिर के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। यहां आने वाले ऐसे परिवार अपने बच्चों का मुंडन संस्कार करवाते हैं और माता का आभार जताते हैं। इस अवसर पर विशेष पूजा-पाठ के साथ-साथ कथा सुनने की परंपरा का भी पूरी निष्ठा के साथ पालन किया जाता है। मंदिर के महंत दीनदयाल वैश्य के अनुसार, नवरात्र के पावन पर्व के दौरान इस स्थान पर भारी संख्या में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है, जिसमें केवल स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु भी शामिल होते हैं।



















