चमोली जिले में स्थित भगवान बद्रीविशाल के कपाट आगामी 16 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होने जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर से ठीक पहले बदरीनाथ धाम में दीपावली का पर्व अपार हर्षोल्लास और गहरी आस्था के साथ मनाया जा रहा है। धनतेरस के पावन अवसर से लेकर दीपावली के इन दिनों तक बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ रहा है। पहाड़ों पर पड़ रही कड़ाके की ठंड और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच भी भक्तगण भगवान बद्रीविशाल के दर्शन करने के लिए लगातार पहुंच रहे हैं और यहीं पर दीपावली का पावन पर्व भी मना रहे हैं। इस दौरान मंदिर परिसर और आसपास के पूरे क्षेत्र में माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ भगवान के खजाने की पूजा की प्राचीन और विशिष्ट परंपरा भी पूरी निष्ठा के साथ निभाई जा रही है।
बदरीनाथ धाम में इन दिनों चारों तरफ दीपावली की अद्भुत रौनक साफ देखी जा सकती है। धनतेरस के दिन से ही यहां भक्तों के आने का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह लगातार जारी है। मंदिर के प्रांगण से लेकर बदरीनाथ की इस पवित्र भूमि तक हर तरफ भक्तों की भारी चहल-पहल बनी हुई है। कोई श्रद्धालु भगवान बद्रीविशाल के दर्शन करके दीपावली का आनंद ले रहा है, तो कोई अपने परिवार की सुख-समृद्धि, लंबी आयु और खुशहाली की कामना लेकर इस धाम में पहुंचा है। हिमालयी क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है और हर कोई इस पावन अवसर का हिस्सा बनना चाहता है।
धाम में दीपावली मनाने का अनुभव बेहद खास
इस बार बद्रीनाथ आने वाले कई तीर्थयात्री ऐसे भी हैं जो जीवन में पहली बार इस धाम में पहुंचे हैं और यहां दीपावली मनाने को लेकर खासी उत्सुकता महसूस कर रहे हैं। इन श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान बद्रीविशाल के पावन धाम में दीपावली मनाने का अनुभव अलौकिक और बेहद खास है। यहां पहुंचने पर भक्तों को मानसिक शांति की अनुभूति हो रही है। कई तीर्थयात्रियों ने तो दीपावली का पर्व संपन्न होने के बाद भी कुछ और दिन तक यहीं धाम में रुकने का मन बनाया है ताकि वे आध्यात्मिक वातावरण का पूरा लाभ उठा सकें।
मौसम की प्रतिकूलता और कड़ाके की ठंड के बाद भी श्रद्धालुओं की अटूट आस्था में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं दिख रही है। एक तरफ जहां पूरे धाम में दीपावली का उल्लास छाया हुआ है, वहीं दूसरी तरफ शीतकाल के लिए कपाट बंद होने से पहले भगवान बद्रीविशाल के अंतिम दर्शन करने की तीव्र अभिलाषा भी भक्तों को खींच रही है। आगामी 16 नवंबर को कपाट बंद होने की तिथि नजदीक आने के साथ ही धाम में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती ही जा रही है। खास बात यह है कि इस पूरी यात्रा सीजन के दौरान बदरीनाथ धाम ने रिकॉर्ड संख्या में तीर्थयात्रियों की सफलतापूर्वक मेजबानी की है।
विशेष धार्मिक अनुष्ठान और खजाने की पूजा
दीपावली के इस पावन अवसर पर बद्रीनाथ मंदिर के भीतर कई विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होती है और विधि-विधान के साथ लक्ष्मी पाठ करके माता को छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं। दीपावली के दिन होने वाली यह विशेष पूजा बदरीनाथ धाम की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखती है। माता लक्ष्मी के पूजन के तुरंत पश्चात बदरीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के खजाने की पूजा की जाती है, जो कि यहां की एक बहुत पुरानी परंपरा है। इस विशिष्ट पूजा में मंदिर के रावल जी के साथ-साथ धर्माधिकारी, वेदपाठी और अन्य आचार्यगण पूरी पवित्रता के साथ शामिल होते हैं और वर्षों से चली आ रही इस परंपरा का पूरी विधि-विधान से निर्वहन करते हैं।
बदरीनाथ धाम के वेदपाठी डॉ. रविंद्र भट्ट ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस बार बदरीनाथ धाम में दीपावली का पर्व इसलिए भी अधिक विशेष बन गया है, क्योंकि कपाट बंद होने में अब केवल कुछ ही दिनों का समय शेष बचा है। यही कारण है कि श्रद्धालु दीपावली के उत्सव और उल्लास के साथ-साथ भगवान बद्रीविशाल के अंतिम दर्शन भी एक साथ कर पा रहे हैं। आस्था, प्राचीन परंपराओं और दीपोत्सव के इस अद्भुत संगम के कारण बदरीनाथ धाम का पूरा वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो चुका है। संक्षेप में कहें तो बदरीनाथ धाम में दीपावली का यह पर्व पूरी श्रद्धा और आनंद के साथ मनाया जा रहा है और कपाट बंद होने से ठीक पहले उमड़ रही श्रद्धालुओं की यह भारी भीड़ इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि हिमालय की कठिन परिस्थितियों में भी भगवान बद्रीविशाल के प्रति देश-विदेश के भक्तों की अटूट आस्था बनी हुई है।



















