गाजीपुर के उर्दू बाजार की गलियों में जब एक पुरानी साइकिल की घंटी बजती है, तो स्थानीय लोगों को समझ आ जाता है कि वासुदेव बारी का चटपटा नाश्ता उनके दरवाजे तक पहुंच चुका है। करीब 60 साल की उम्र में भी वासुदेव रोज अपनी साइकिल पर डिब्बे बांधकर निकलते हैं और लोगों तक अपने हाथ का पारंपरिक स्वाद पहुंचाते हैं। उनके लिए यह काम केवल आजीविका चलाने का माध्यम नहीं है, बल्कि उनकी पूरी दिनचर्या और जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। साइकिल पर सजे डिब्बे और खास मसालों की महक अब पूरे इलाके में उनकी एक अलग पहचान बना चुकी है।
साइकिल पर सजी सामग्री और स्वाद का अनोखा मेल
वासुदेव अपनी साइकिल पर नाश्ता तैयार करने के लिए जरूरी तमाम सामग्री करीने से सजाकर रखते हैं। उनकी साइकिल पर चने के साथ मूंग की दाल, तरह-तरह के मसाले और अन्य जरूरी सामान मौजूद रहता है। जब कोई ग्राहक आता है, तो उसकी व्यक्तिगत पसंद का पूरा ख्याल रखा जाता है। ग्राहक की मांग के अनुसार चने और दाल के मिश्रण में बारीक कटा टमाटर, प्याज, ताजा नींबू का रस और तीखे मसाले मिलाए जाते हैं। यही साधारण और ताजी चीजें मिलकर उनके चटपटे चने को ऐसा स्वाद देती हैं, जो हर उम्र के लोगों को अपनी ओर खींच लेता है।
गली-मोहल्लों में इंतजार और ग्राहकों का जमावड़ा
जैसे ही वासुदेव अपनी साइकिल लेकर उर्दू बाजार और आसपास के मोहल्लों से गुजरते हैं, स्थानीय निवासी उन्हें दूर से ही पहचानकर रोक लेते हैं। चाहे स्कूल जाने वाले बच्चे हों या घर के बुजुर्ग, हर कोई उनका चना चखने के लिए उत्सुक रहता है। वासुदेव का कहना है कि लोग अक्सर उनकी साइकिल रुकवा लेते हैं और देखते ही देखते उनके आसपास ग्राहकों की भीड़ जुट जाती है। हर रोज करीब तीन घंटे के लिए फेरी पर निकलने वाले वासुदेव के पास इस छोटे से अंतराल में ही कई ग्राहक अपनी मनपसंद प्लेट तैयार कराने पहुंच जाते हैं।
किफायती दाम और आधुनिक फास्ट फूड को देसी टक्कर
बदलते जमाने में जहां हर तरफ पिज्जा, बर्गर और चाइनीज स्नैक्स का चलन बढ़ रहा है, वहीं वासुदेव का यह ठेठ देसी नाश्ता अपनी लोकप्रियता बरकरार रखे हुए है। वासुदेव ग्राहक के सामने ही साइकिल पर ताजा प्लेट तैयार करते हैं, जिसकी कीमत मात्र 20 रुपये है। इतने किफायती दाम में मिलने वाला यह पौष्टिक और चटपटा नाश्ता लोगों को बहुत भाता है। वासुदेव का मानना है कि समय के साथ खानपान की आदतें जरूर बदली हैं, लेकिन शुद्ध और तीखे देसी स्वाद की जगह कोई दूसरा फास्ट फूड कभी नहीं ले सकता।
पांच दशकों का अटूट सफर और स्थानीय भरोसा
वासुदेव बारी पिछले करीब पचास सालों यानी पांच दशकों से लगातार इसी काम से जुड़े हुए हैं। उनके लिए हर एक ग्राहक उनकी कड़ी मेहनत और लगन की गवाही देता है। तैयार प्लेट में दिखने वाला चना, मूंग की दाल, टमाटर, प्याज और मसालों का संतुलन उनकी बरसों की महारत को दर्शाता है। यही कारण है कि गाजीपुर के इस इलाके में उनकी पुरानी साइकिल और हाथ का जायका आज भी पूरे विश्वास और सम्मान के साथ देखा जाता है।























