भारत में नशीले पदार्थों के अवैध संजाल पर अंतिम प्रहार करने के लिए एक विस्तृत और सख्त कार्ययोजना तैयार की गई है। केंद्र सरकार ने पूरे देश को नशा मुक्त बनाने के संकल्प के तहत 31 दिसंबर 2029 तक नशे के गैरकानूनी कारोबार को पूरी तरह समाप्त करने की अंतिम तिथि घोषित की है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान को अब औपचारिक समीक्षा बैठकों या प्रशासनिक फाइलों तक सीमित रखने के बजाय धरातल पर कड़े फैसलों और प्रभावी परिणामों में बदलने की रूपरेखा तय की गई है। प्रशासनिक स्तर पर इसे सामान्य कामकाज के बजाय एक निर्णायक जंग की तरह आगे बढ़ाने का निर्देश जारी किया गया है।
पांच वर्षों के बुनियादी सुधार और संस्थागत ढांचा
नशे के खिलाफ इस जंग को मजबूती देने के लिए बीते पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए जा चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर तालमेल के लिए एनसीओर्ड की व्यवस्था स्थापित की गई है, जबकि नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के पूरे ढांचे का पुनर्गठन किया गया है। इसके साथ ही मौजूदा कानूनों में आवश्यक संशोधन किए गए हैं ताकि तस्करों के खिलाफ सख्त कानूनी शिकंजा कसा जा सके। जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक और पुख्ता बनाने के उद्देश्य से फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) के भीतर एक अलग वर्टिकल तैयार किया गया है। इन सभी प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी संचालित किए गए हैं, जिन्हें अब पूरी ताकत के साथ अमल में लाया जा रहा है।
आधुनिक तकनीकी खतरे और लीक से हटकर रणनीति
मादक पदार्थों की तस्करी अब पारंपारिक तौर-तरीकों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि तस्करों ने अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। सिंथेटिक ड्रग्स का बढ़ता प्रचलन, प्रीकर्सर केमिकल्स का गैरकानूनी डायवर्जन, डार्कनेट का गुप्त इस्तेमाल, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए वित्तीय लेनदेन, डेड ड्रॉप डिलीवरी की गुप्त प्रक्रियाएं और सीमा पार से संचालित होने वाले अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट इस समय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए बेहद जटिल चुनौतियां पेश कर रहे हैं।
इन नए युग के खतरों का मुकाबला करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के राष्ट्रीय सम्मेलन में सभी राज्य सरकारों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे लीक से हटकर सोचने वाले अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित करें जो आधुनिक तौर-तरीकों का तोड़ निकाल सके। इसके साथ ही यह रेखांकित किया गया कि जब तक प्रशासनिक तंत्र का हर हिस्सा एकजुट नहीं होगा, तब तक इस समस्या का पूर्ण समाधान संभव नहीं है। स्कूल के प्रधानाचार्य, गांव के पटवारी, थाने के उपनिरीक्षक से लेकर राज्यों के पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव और केंद्रीय गृह सचिव तक सभी को एक साझी दिशा में पूरी निष्ठा के साथ सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
अब तक हुई कार्रवाई के आंकड़े और आगे का लक्ष्य
इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत अब तक हासिल की गई प्रगति के आधिकारिक आंकड़े भी साझा किए गए हैं, जो व्यवस्थागत सख्ती को दर्शाते हैं
- देश के 100 लक्षित बड़े ड्रग कार्टेल में से 57 सिंडिकेट की पहचान की जा चुकी है और उन पर शिकंजा कसा जा रहा है।
- पीआईटी-एनडीपीएस के अंतर्गत चिन्हित 1000 मामलों में से 811 मामलों में कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
- अवैध रूप से उगाई जाने वाली नशीली फसलों को नष्ट करने के लिए निर्धारित लक्ष्य का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है।
मीटिंग से मिशन और जब्ती से नेटवर्क के खात्मे का संकल्प
इस पूरे मिशन के भावनात्मक और संकल्पबद्ध दृष्टिकोण को साझा करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपनी मां की दी हुई सीख का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को कभी यह सोचकर नहीं रुकना चाहिए कि वह किसी काम को पूरा कर पाएगा या नहीं, बल्कि केवल यह देखना चाहिए कि वह काम करने योग्य और सही है या नहीं, बाकी परिणाम ईश्वर के हाथ में छोड़ देने चाहिए।
इसी प्रेरणा के आधार पर इस अभियान को नई दिशा दी गई है। सरकारी तंत्र को अब केवल बैठकों से आगे बढ़कर मिशन मोड में काम करने, कागजी रिपोर्टिंग के स्थान पर ठोस परिणाम देने, महज जब्ती करने तक सीमित न रहकर पूरे तस्करी नेटवर्क को ध्वस्त करने और मुकदमा दर्ज करने से लेकर दोषियों को अदालत में कड़ी सजा दिलवाने तक पूरी तत्परता से आगे बढ़ने का स्पष्ट आदेश दिया गया है।























