मूलांक 2 राशिफल 24 जुलाई 2026: संवेदनशीलता और काम के दबाव के बीच धैर्य से ही संभलेंगे सारे काममूलांक 8 राशिफल 24 अक्टूबर 2024 शनि की कृपा से सच बोलने का मिलेगा साहस और सुधरेंगे बिगड़े काममीन राशिफल 24 जुलाई 2026: आर्थिक समझदारी और रिश्तों में आपसी तालमेल से चमकेगा दिनमूलांक 7 दैनिक राशिफल: केतु के प्रभाव से सुलझेंगे पुराने विवाद, आज बड़ी योजनाओं के बजाय हिसाब-किताब की शुद्धि पर दें विशेष ध्यानमूलांक 5 राशिफल 24 जुलाई: नए रिश्तों में जल्दबाजी से बचें, जानें कैसा रहेगा आपका दिनतुला राशि चक्र 24 जुलाई: मंगल के प्रभाव से आ सकती है स्वभाव में उग्रता, हर बड़े फैसले को अभी टालेंमध्य पूर्व में गहराया युद्ध का संकट: क्रूड ऑयल की कीमतों में आया दस प्रतिशत का उछाल, WTI का भाव 90 डॉलर के पार निकलामध्य प्रदेश के रतलाम में अवैध खनन रोकने गए शासकीय कर्मचारी पर हमला, मारपीट में हाथ तोड़ाजॉर्जिया गवर्नर चुनाव में अरबपति रिक जैक्सन ने जीती रिपब्लिकन उम्मीदवारी, डोनाल्ड ट्रंप ने दिया खुला समर्थनइंफोसिस में बड़े बदलाव की तैयारी, 2027 से आशीष कुमार डैश होंगे कंपनी के नए CEO
समरडुंग टनल हादसा: मीथेन गैस धमाके के बाद 22 शव बरामद, रात भर चला रेस्क्यू ऑपरेशनभारत
23 जुल॰ 2026, 12:58 pm (20 घंटे पहले)· 0

समरडुंग टनल हादसा: मीथेन गैस धमाके के बाद 22 शव बरामद, रात भर चला रेस्क्यू ऑपरेशन

दक्षिण सिक्किम में तीस्ता स्टेज-6 प्रोजेक्ट के तहत बन रही सुरंग में मीथेन गैस विस्फोट और भूस्खलन के कारण 22 मजदूरों की मौत हो गई है। एनडीआरएफ और ईसीएल की टीमें जहरीली गैसों और जलभराव के बीच फंसे बाकी लोगों की तलाश कर रही हैं।

दक्षिण सिक्किम के समरडुंग टनल में हुए एक भीषण हादसे में मरने वाले मजदूरों की संख्या अब बढ़कर 22 तक पहुंच गई है। एनएचपीसी के तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के तहत बन रही इस सुरंग में फंसे बाकी कर्मचारियों को बाहर निकालने के लिए बचाव दल लगातार एक बेहद मुश्किल अभियान चला रहे हैं। जहरीली गैसों, धुएं और भारी मलबे के कारण यह रेस्क्यू ऑपरेशन अत्यधिक जटिल और जानलेवा हो गया है। आपातकालीन टीमें दिन-रात बिना रुके काम कर रही हैं ताकि मलबे में दबे आखिरी व्यक्ति तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके।

मीथेन गैस विस्फोट और अचानक हुआ भूस्खलन

यह खौफनाक दुर्घटना मंगलवार दोपहर करीब 3 बजे उस समय घटी, जब टनल के भीतर निर्माण कार्य पूरी गति से चल रहा था। यह महत्वपूर्ण ढांचा तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के अंतर्गत पटेल इंजीनियरिंग द्वारा तैयार किया जा रहा है। एनएचपीसी की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह भयंकर हादसा चट्टानों के बीच फंसी मीथेन गैस में अचानक हुए एक बहुत ही जोरदार धमाके की वजह से हुआ। इस भूमिगत विस्फोट की ताकत इतनी ज्यादा थी कि इसके तुरंत बाद टनल के अंदर एक बड़ा भूस्खलन हो गया, जिससे सुरंग का एक विशाल हिस्सा मिट्टी और भारी चट्टानों के मलबे से पूरी तरह भर गया। विस्फोट के कारण न सिर्फ मलबा गिरा, बल्कि पूरी सुरंग के भीतर घना धुआं और जानलेवा जहरीली गैसें भी तेजी से फैल गईं, जिससे अंदर काम कर रहे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकलने का कोई रास्ता या मौका ही नहीं मिल सका।

ये भी पढ़ें

राहत और बचाव अभियान में तेजी

हालात की गंभीरता और खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और अन्य स्थानीय आपातकालीन एजेंसियों ने तुरंत एक संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे की भारी मात्रा को देखते हुए बुधवार देर रात इस बचाव कार्य को और अधिक तेज कर दिया गया। इस विषम परिस्थिति से निपटने के लिए आसनसोल स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की एक दूसरी और अधिक प्रशिक्षित विशेषज्ञ टीम रात करीब 10 बजे घटनास्थल पर पहुंची। यह अतिरिक्त टीम अपने साथ अत्याधुनिक तकनीकी उपकरण और भारी मशीनरी लेकर आई है, जो इस खतरनाक वातावरण में सुरक्षित रूप से रास्ता बनाने के लिए बहुत जरूरी है। बचाव कर्मियों ने बड़ी मशीनों की मदद से मलबे को हटाने और फंसे हुए मजदूरों की तलाश में आधी रात के बाद भी अपना अभियान बिना थके जारी रखा।

जहरीले धुएं और जलभराव से निरंतर संघर्ष

क्षतिग्रस्त टनल के अंदर का माहौल राहत और बचाव कर्मियों के लिए भी बेहद जानलेवा बना हुआ है। गैस के प्रभाव और मलबे के गिरने के जोखिम के बीच काम करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। इसके अलावा, विस्फोट और मलबे के कारण सुरंग के भीतर भारी मात्रा में जलभराव भी हो गया है। तड़के के समय एनडीआरएफ और आसनसोल की ईसीएल टीम ने अपना पूरा ध्यान उच्च क्षमता वाले पंपों के जरिए टनल के भीतर जमा हो चुके पानी को बाहर निकालने (डीवाटरिंग) पर केंद्रित किया। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि सुरंग के उन गहरे और अंधेरे हिस्सों तक आसानी से पहुंचा जा सके, जहां मजदूरों के दबे होने की सबसे ज्यादा आशंका है। इन बेहद चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे हालात के बावजूद, विशेषज्ञ टीमें लगातार रास्ता बनाने की कोशिश में जुटी हुई हैं।

प्रशासनिक निगरानी और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था

राज्य सरकार और स्थानीय जिला प्रशासन इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन पर पल-पल की पैनी नजर बनाए हुए हैं। घटनास्थल के बिल्कुल बाहर कई एंबुलेंस और विशेष चिकित्सा दलों को चौबीसों घंटे तैनात रखा गया है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि मलबे से निकाले जा रहे पीड़ितों के साथ-साथ उन थके हुए बचाव कर्मियों को भी तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता दी जा सके, जो लगातार जहरीली गैसों के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने इस दर्दनाक औद्योगिक त्रासदी में जान गंवाने वाले मजदूरों के दुखी परिवारों को हर संभव आर्थिक और अन्य जरूरी मदद देने का कड़ा आश्वासन दिया है। प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी टीमों को भी हर आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है।

सवाल-जवाब

सिक्किम में यह हादसा कहां हुआ?
यह हादसा दक्षिण सिक्किम में स्थित समरडुंग टनल में हुआ, जो तीस्ता स्टेज-6 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का हिस्सा है।
हादसे का मुख्य कारण क्या था?
एनएचपीसी के अनुसार, यह घटना सुरंग की चट्टानों के बीच फंसी मीथेन गैस में हुए अचानक और जोरदार विस्फोट के कारण घटी।
सुरंग का निर्माण कौन सी कंपनी कर रही है?
इस सुरंग का निर्माण पटेल इंजीनियरिंग द्वारा किया जा रहा है।
बचाव अभियान में कौन सी टीमें शामिल हैं?
राहत और बचाव कार्य में राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और आसनसोल की ईसीएल (ECL) टीम मुख्य रूप से शामिल हैं।
अब तक कितने शव बरामद किए गए हैं?
इस भीषण हादसे के बाद अब तक मलबे से 22 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR