नागालैंड की मतदाता सूची पर विवाद, 1.57 लाख से अधिक नामों में गड़बड़ी का आरोपमहिला पहलवानों की अपील पर कोर्ट सख्त, बृजभूषण शरण सिंह को जवाब के लिए मिला अंतिम अवसरमहाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव परिणाम: बीजेपी ने जीती पुणे शिक्षक सीट, दो क्षेत्रों में शरद पवार गुट को बढ़तभीलवाड़ा में संपत्ति के लिए 72 वर्षीय कमला देवी की हत्या, शव जलाकर नदी में बहाए अवशेष; दो गिरफ्तारमिजो विरासत को सहेजने के लिए खुला मिजोरम स्टेट म्यूजियम, मंत्री सी. लालसाविवुंगा ने युवाओं से की खास अपीलAISA प्रमुख नेहा बोरा की बढ़ीं कानूनी मुश्किलें, SEM अदालत ने 20 नवंबर को दोबारा किया तलबमध्य प्रदेश के बालाघाट में प्रसव के बिल चुकाने के लिए बुजुर्ग महिला की हत्या, आरोपी गिरफ्तारदिल्ली में वोटर सूची पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से पूछा- पुराने मतदाताओं से फॉर्म 6 क्यों भरवाया जा रहाऋषिकेश के बाजारों में करवा चौथ की रौनक, 3डी प्रिंट से लेकर ऐपण कला वाले करवे-छलनी की भारी मांगगाड़ी की कंडक्टरी छोड़ गांव में शुरू किया बकरी पालन, उत्तराखंड के प्रेम सिंह बने मिसाल
बलिया की दिव्यांग ज्योति: दोनों पैरों से लाचार, टीचर बनने का सपना, जिलाधिकारी ने बढ़ाया मदद का हाथउत्तर प्रदेश
7 सित॰ 2026, 12:27 pm (52 दिन पहले)· 5

बलिया की दिव्यांग ज्योति: दोनों पैरों से लाचार, टीचर बनने का सपना, जिलाधिकारी ने बढ़ाया मदद का हाथ

बलिया के महुलानपार गांव की 18 वर्षीय दिव्यांग ज्योति टीचर बनना चाहती है, लेकिन गरीबी और स्कूल की दूरी ने उसकी पढ़ाई रोक दी थी। वीडियो वायरल होने के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद ने उसे ट्राई साइकिल, स्कूल बैग और दिव्यांगता प्रमाण पत्र देकर मदद पहुंचाई।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में रहने वाली 18 वर्षीय ज्योति जन्म से ही अपने दोनों पैरों से चलने में असमर्थ है, बावजूद इसके वह पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का सपना संजोए हुए है। महुलानपार गांव में रहने वाली इस बेटी की जिंदगी संघर्षों से भरी है, फिर भी वह स्कूल जाना चाहती है और अपने पैरों पर खड़े होकर कुछ बनना चाहती है। इससे पहले भी बलिया के मनियर इलाके से दिव्यांग बच्ची रागनी की एक क्लिप चर्चा में आई थी, अब उसी क्षेत्र से ज्योति की जिंदगी लोगों के सामने आई है।

घर की दूरी ने छुड़वाई पढ़ाई

ज्योति आठवीं कक्षा तक स्कूल गई, इसके बाद उसकी पढ़ाई थम गई। वजह थी घर से स्कूल की लंबी दूरी। शुरुआत में उसके पिता रोज साइकिल पर बिठाकर उसे स्कूल छोड़ने जाते थे, मगर उम्र बढ़ने के साथ उनके पैरों में भी तकलीफ रहने लगी और वह बेटी को स्कूल ले जाने में असमर्थ हो गए। नतीजा यह हुआ कि किताबों से नाता टूट गया और ज्योति के सपने घर की चारदीवारी में सिमट गए।

ये भी पढ़ें

वीडियो सामने आते ही हरकत में आया प्रशासन

ज्योति की तकलीफ जब कैमरे में कैद होकर लोगों तक पहुंची, तो बलिया के जिलाधिकारी मंगला प्रसाद खुद उसके घर जा पहुंचे। उन्होंने बैटरी से चलने वाली ट्राई साइकिल, स्कूल बैग, हेलमेट, चॉकलेट और दिव्यांगता प्रमाण पत्र सौंपा। साथ ही खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिया कि ज्योति के घर में शौचालय बनवाया जाए और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसे पक्का मकान भी दिलाया जाए।

टीचर बनने का सपना, गैस भरवाने तक के पैसे नहीं

ज्योति टीचर बनना चाहती है, लेकिन घर के हालात उसकी राह में रोड़ा हैं। उसकी बहन पूजा के मुताबिक घर में गैस सिलेंडर तो रखा है, मगर उसे दोबारा भरवाने के लिए पैसे नहीं जुट पाते। बरसात के दिनों में सड़क का पानी घर के अंदर घुस आता है, ऐसे में परिवार को कई बार खाली पेट भी सोना पड़ता है।

मां खेतों में मजदूरी करती है, पिता ट्यूशन पढ़ाकर गुजारा करते हैं

ज्योति की मां देवंती देवी खेतों में मजदूरी करती है और साथ ही बकरियां व भैंस पालकर घर चलाने में हाथ बंटाती है। बेटी को पढ़ा न पाने का मलाल आज भी उन्हें कचोटता है। पिता गुलाब चंद्र प्रसाद पहले एक निजी स्कूल में पढ़ाया करते थे, मगर पैरों के दर्द ने उनसे यह नौकरी भी छीन ली। अब वह बच्चों को घर पर ट्यूशन देकर महीने के महज 4 से 5000 रुपये कमा पाते हैं। इतनी तंगी के बावजूद उन्होंने अपनी एक बेटी को एम.एड बी.एड तक पढ़ाया है।

गांव में दिव्यांगों के लिए कोई सुविधा नहीं

गांव के मंगलदीप बताते हैं कि यहां दिव्यांगों के आने-जाने का कोई इंतजाम नहीं है। बचपन में कुछ लोगों ने ज्योति को एक ट्राई साइकिल दी थी, मगर वह उसे चला नहीं पाई थी। गांव वालों का कहना है कि ज्योति को अगर सही मदद मिल जाए तो वह पढ़-लिखकर अपने पैरों पर खड़ी हो सकती है। ग्रामीण ज्ञानदीप और अभिषेक कुमार ने सरकार से अपील की है कि ज्योति की हर मुमकिन मदद की जाए ताकि उसके सपनों को पंख लग सकें।

सवाल-जवाब

ज्योति कौन है और कहां की रहने वाली है?
ज्योति बलिया जिले के महुलानपार गांव की 18 वर्षीय लड़की है, जो जन्म से दोनों पैरों से दिव्यांग है।
ज्योति की पढ़ाई क्यों रुक गई थी?
घर से स्कूल की दूरी ज्यादा थी और उम्र बढ़ने पर पिता के पैरों में भी दर्द रहने लगा, जिससे वह उसे स्कूल नहीं ले जा पाते थे।
जिलाधिकारी ने ज्योति की क्या मदद की?
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद ने उसे बैटरी वाली ट्राई साइकिल, स्कूल बैग, हेलमेट, चॉकलेट और दिव्यांगता प्रमाण पत्र दिया।
प्रशासन ने और क्या निर्देश दिए हैं?
खंड विकास अधिकारी को ज्योति के लिए शौचालय और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
ज्योति का सपना क्या है?
ज्योति टीचर बनना चाहती है।
ज्योति के परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है?
पिता ट्यूशन पढ़ाकर महीने के 4 से 5000 रुपये कमाते हैं और मां खेतों में मजदूरी व पशुपालन करती हैं, घर में गैस भरवाने तक के पैसे नहीं होते।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp