तमिलनाडु के सलेम जिले में मेट्टूर बांध से पानी छोड़ने की मात्रा सोमवार सुबह बढ़ाकर 12,000 क्यूसेक कर दी गई, क्योंकि कावेरी डेल्टा क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी की मांग लगातार बढ़ रही है. अधिकारियों ने सोमवार सुबह 6 बजे से यह नई मात्रा लागू की, जो 1 सितंबर को सांबा की खेती के लिए बांध खोले जाने के बाद से पानी छोड़ने में की गई बढ़ोतरी की श्रृंखला की सबसे ताजा कड़ी है.
महीने भर में कैसे बढ़ता गया पानी का बहाव
सितंबर की शुरुआत में जब मेट्टूर बांध के गेट खोले गए थे, तब पानी छोड़ने की दर सिर्फ 3,000 क्यूसेक रखी गई थी. लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर यह मात्रा बढ़ाकर 7,000 क्यूसेक कर दी गई और अगले लगातार छह दिनों तक इसी स्तर पर बनाए रखी गई. इसके बाद कावेरी डेल्टा में सिंचाई की जरूरत और तेज होने पर रविवार शाम 6 बजे अधिकारियों ने बहाव को 10,000 क्यूसेक तक पहुंचा दिया. महज कुछ घंटों बाद सोमवार सुबह एक और संशोधन करते हुए इसे 12,000 क्यूसेक कर दिया गया, यानी बांध खोले जाने के बाद से यह चौथी बार है जब जल निर्वहन की मात्रा बढ़ाई गई है.
जलाशय में जलस्तर और भंडारण की स्थिति
रविवार शाम को दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक मेट्टूर जलाशय का जलस्तर 92.39 फीट मापा गया. उसी समय बांध में पानी की आवक यानी अंतर्वाह 9,709 क्यूसेक दर्ज किया गया, जबकि जलाशय में उपलब्ध भंडारण करीब 55.35 हजार मिलियन घन फीट (टीएमसी) आंका गया. टीएमसी यानी हजार मिलियन घन फीट, जलाशय में बचे पानी को मापने की मानक इकाई है, और भंडारण की यह मात्रा आने वाले दिनों में रिलीज को और बढ़ाने या घटाने का फैसला तय करने में अहम भूमिका निभाएगी. गौर करने वाली बात यह है कि फिलहाल बांध से 12,000 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, जो दर्ज किए गए 9,709 क्यूसेक के अंतर्वाह से कहीं ज्यादा है, इसलिए आगे किसी भी नए फैसले से पहले अधिकारी अंतर्वाह के आंकड़ों पर बारीकी से नजर रखेंगे.
किसानों को मिलेगी राहत, फसल तैयार करने में जुटे
पानी की यह बढ़ी हुई निकासी सीधे कावेरी डेल्टा जिलों के उन किसानों के लिए है, जो सांबा धान की फसल के लिए बांध के पानी पर निर्भर हैं. इस समय ज्यादातर किसान अपने खेत तैयार करने और शुरुआती चरण की बुवाई में जुटे हैं, ऐसे में समय पर और पर्याप्त पानी मिलना उनके लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है. सांबा तमिलनाडु के बड़े धान सीजन में गिना जाता है, और बुवाई के वक्त पानी की कमी सीधे पूरे सीजन की पैदावार पर असर डाल सकती है, यही वजह है कि किसान हर बार पानी छोड़ने की मात्रा में हो रहे बदलाव पर करीबी नजर बनाए हुए हैं. डेल्टा क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि इस बढ़ोतरी से उनकी तत्काल पानी की जरूरत पूरी हो जाएगी और खेती के काम बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ते रहेंगे. अधिकारियों ने साफ किया है कि आगे पानी छोड़ने से जुड़ा कोई भी नया फैसला जलस्तर, अंतर्वाह, भंडारण क्षमता और सिंचाई की मांग, इन चारों पहलुओं को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा. फिलहाल के लिए बढ़ी हुई जलापूर्ति ने कावेरी नदी के पानी पर निर्भर डेल्टा किसानों को राहत जरूर दी है.


















