ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से लगभग 240 नॉटिकल मील की दूरी पर गहरे समुद्र में डूबे एमवी ओशियन विनर नामक जहाज से जुड़े रहस्यों से पर्दा उठने का नाम नहीं ले रहा है। इस पोत पर कुल 24 नाविक सवार थे, जिनमें 20 नागरिक चीन के, 3 म्यांमार के और 1 बांग्लादेश का रहने वाला था। हादसे के बाद इनमें से दो लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था, लेकिन शेष 22 व्यक्तियों का अब तक कोई आधिकारिक पता नहीं चल सका है। लापता लोगों की तलाश में जुटी बचाव टीमों को इस बीच जहाज की एक लाइफबोट जरूर मिली, जो अंदर से पूरी तरह खाली थी। इसके बावजूद राहत एवं बचाव एजेंसियों ने इस अभियान को रोकने के बजाय इसका दायरा काफी ज्यादा बढ़ा दिया है और अथाह समुद्र में लगातार खोजबीन जारी है। भारतीय तटरक्षक बल इस ऑपरेशन में अपनी अतिरिक्त संपत्तियों के साथ-साथ आसपास के व्यावसायिक जहाजों की भी मदद ले रहा है।
इमरजेंसी बीकन और लाइफबोट से मिले सुराग
लापता नाविकों की खोजबीन के दौरान भारतीय तटरक्षक जहाज वराड लगातार उस समुद्री क्षेत्र की निगरानी कर रहा था। इसी क्रम में आसमान से गश्त कर रहे एक नौसैनिक विमान को संकट का एक सिग्नल प्राप्त हुआ। इसके बाद खोजी टीमों को समुद्री सतह पर एक आपातकालीन बीकन मिला। जब इसकी तकनीकी जांच की गई, तो पुष्टि हुई कि यह उपकरण एमवी ओशियन विनर से ही संबंधित था। इस अहम सुराग के मिलने के बाद संबंधित इलाके में खोज अभियान को और अधिक तीव्र कर दिया गया, ताकि जल्द से जल्द कोई ठोस सफलता हाथ लग सके।
खाली मिली लाइफबोट ने बढ़ाई चिंता
बीती 25 अगस्त की सुबह करीब 7 बजे खोजबीन के दायरे में डूबे हुए पोत की एक लाइफबोट नजर आई। तटरक्षक बल की बोर्डिंग टीम ने बिना देर किए उस लाइफबोट तक पहुंच कर उसका मुआयना किया। हालांकि, जांच का यह नतीजा निराशाजनक रहा क्योंकि उस नाव के अंदर एक भी जीवित व्यक्ति मौजूद नहीं था। अधिकारियों के सामने अभी भी यह सवाल अनसुलझा है कि आखिर वह लाइफबोट उस स्थान तक कैसे पहुंची और चालक दल के लापता सदस्य उससे कैसे अलग हो गए।
भारतीय एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम के बीच बीजिंग स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। इस विशाल महासागरीय क्षेत्र में खोज के दायरे को व्यापक बनाने के लिए तटरक्षक बल के अन्य जहाजों को भी युद्धस्तर पर मैदान में उतार दिया गया है। इसके साथ ही समुद्र से गुजर रहे अन्य व्यावसायिक जहाजों को भी इस बचाव कार्य में सहयोग करने के लिए कहा गया है, ताकि सर्च एरिया के हर कोने को अच्छी तरह खंगाला जा सके।
व्यापक स्तर पर चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन
गौरतलब है कि इस पोत के संचालक विक्टरी स्टार ग्रुप ने दुर्घटना के बाद मदद की गुहार लगाई थी। इसके तुरंत बाद संबंधित कोऑर्डिनेशन सेंटर ने अंतरराष्ट्रीय खोज और बचाव नेटवर्क को सक्रिय किया और उस रूट से गुजर रहे एमटी आइसोपोस नामक मर्चेंट पोत को तुरंत मदद के लिए मोड़ दिया। इसी मर्चेंट जहाज ने रात करीब 8 बजे दो अलग-अलग लाइफराफ्ट के जरिए पानी में फंसे दो क्रू सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था।
इस बचाव अभियान को गति देने के लिए भारतीय तटरक्षक बल ने अपने पोत वराड और अनमोल को पहले ही तैनात कर रखा था, जबकि अभियान को और अधिक मजबूती देने के लिए श्री विजय पुरम से आईसीजीएस विजित को भी रवाना किया गया। हालांकि, खाली लाइफबोट और इमरजेंसी बीकन मिलने से जांचकर्ताओं को कुछ तकनीकी संकेत तो मिले हैं, लेकिन प्रतिकूल समुद्री हालात और अथाह जलराशि के बीच इतने सारे लोगों का कोई सुराग न मिलना अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।



















