कैरीबियाई देश हैती में सशस्त्र गिरोहों की हिंसा ने एक बार फिर भयानक रूप ले लिया है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। राजधानी पोर्ट-ऑ-प्रिंस के नजदीक स्थित केन्सकॉफ नामक पहाड़ी कस्बे में एक चर्च के भीतर शरण लिए हुए नागरिकों को हथियारबंद अपराधियों ने अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया। इस वीभत्स हमले में 50 से अधिक निर्दोष लोगों के मारे जाने की दुखद पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं और कुछ लोग अब भी लापता हैं जिनकी तलाश की जा रही है।
केन्सकॉफ में खौफ की रात और हिंसा का विस्तार
यह खूनी खेल रविवार की रात करीब 10:30 बजे शुरू हुआ, जब अत्याधुनिक हथियारों से लैस बदमाश विभिन्न इलाकों में अंधाधुंध घूमते रहे और आम नागरिकों को चुन-चुनकर अपना निशाना बनाने लगे। स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में अराजकता और हिंसा का यह दौर सोमवार तक लगातार जारी रहा, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हो गए।
अपराधियों के पास पुलिस से भी घातक हथियार
सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि हैती के इन आपराधिक गिरोहों के पास अब स्थानीय पुलिस बल की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक और आधुनिक हथियार आ चुके हैं। पिछले दो दशकों में देश ने ऐसी डरावनी स्थिति का सामना कभी नहीं किया था। जांच से यह बात सामने आई है कि ये तमाम हथियार मुख्य रूप से अमेरिका से गैरकानूनी तरीकों से देश के भीतर लाए जा रहे हैं। जैसे-जैसे इन गैंग्स की मारक क्षमता और हथियारों का जखीरा बढ़ रहा है, वे बंदरगाहों और प्रमुख राजमार्गों पर अपना आधिपत्य जमाते जा रहे हैं, जिससे हथियारों की इस अवैध तस्करी पर लगाम कसना सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगभग असंभव होता जा रहा है।
भुखमरी और विस्थापन का बढ़ता संकट
हथियारों की इस अंधी दौड़ और बेलगाम हिंसा के कारण देश में मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हैती की कुल लगभग 1.17 करोड़ की आबादी में से करीब आधी आबादी ऐसी है जिसे जीने के लिए भोजन की तत्काल और सख्त सहायता की आवश्यकता है। अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में आम लोग अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन करने को विवश हो रहे हैं।
राजधानी और प्रमुख मार्गों पर आपराधिक गिरोहों का शिकंजा
मौजूदा समय में हैती के भीतर 150 से लेकर 200 के आसपास छोटे-बड़े आपराधिक गिरोह पूरी सक्रियता के साथ अपनी आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। अकेले राजधानी पोर्ट-ऑ-प्रिंस के भीतर ही 23 बड़े गैंग काम कर रहे हैं, जिनमें जी-पेप और जी9 फैमिली एंड अलाइज नाम के दो प्रमुख और कुख्यात गुट शामिल हैं। हाल के दिनों में इन परस्पर विरोधी गुटों ने आपस में हाथ मिलाकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, सरकारी महलों, बड़े अस्पतालों, स्कूलों और पुलिस स्टेशनों को अपने हमलों का मुख्य केंद्र बनाया है। इन्होंने देश के कई महत्वपूर्ण रणनीतिक इलाकों और सीमाओं पर भी अपना पूर्ण कब्जा जमा लिया है।
हथियारों का काला बाजार और घोस्ट गन्स का खतरा
हैती के भीतर हथियारों की मांग आसमान छू रही है, जिसके चलते यह अवैध धंधा एक बेहद बड़ा और भारी मुनाफे वाला कारोबार बन चुका है। संयुक्त राज्य अमेरिका में महज कुछ सौ डॉलर की कीमत में मिलने वाली साधारण राइफलें हैती के काले बाजार में 5000 से 8000 डॉलर यानी लगभग 4 लाख से 7 लाख भारतीय रुपये तक की भारी भरकम कीमत पर बेची जा रही हैं। इसके अलावा, बिना किसी आधिकारिक सीरियल नंबर वाली घोस्ट गन्स भी ऑनलाइन माध्यमों से अलग-अलग पार्ट्स मंगवाकर घरों के भीतर ही तैयार की जा रही हैं, जिन्हें किसी भी कानून या तकनीक के जरिए ट्रैक करना पूरी तरह नामुमकिन साबित हो रहा है।
अमेरिका से इन हथियारों की खेप मुख्य रूप से वहां की खुदरा दुकानों, गन शो और अन्य माध्यमों से खरीदकर विभिन्न प्रकार की नावों, जहाजों और समुद्री जलपोतों के जरिए हैती के तटों तक पहुंचाई जा रही है। हथियार तस्कर इन खतरनाक साजो-सामान को बड़े कंटेनरों और आम घरेलू व व्यावसायिक सामान के बीच बड़ी चालाकी से छुपाकर लाते हैं, जिससे अमेरिका और हैती दोनों देशों की खुफिया और जांच एजेंसियों के लिए इन्हें धरदबोचना बेहद कठिन कार्य बन जाता है।
सरकारी कार्रवाई और लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता
इस भीषण नरसंहार की घटना के तुरंत बाद हैती सरकार हरकत में आई है और प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस दुखद घटना में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की गई है और साथ ही इलाके में जल्द से जल्द कानून-व्यवस्था व सुरक्षा पूरी तरह बहाल किए जाने का ठोस भरोसा दिलाया गया है।
यह देश लंबे अरसे से भीषण गैंग हिंसा, गहरी राजनीतिक अस्थिरता और चरम गरीबी की मार झेल रहा है। राजधानी पोर्ट-ऑ-प्रिंस का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरी तरह इन हथियारबंद गिरोहों के प्रत्यक्ष प्रभाव और नियंत्रण में है। ये गिरोह आए दिन हत्या, अपहरण, फिरौती, लूटपाट और यौन हिंसा जैसी जघन्य वारदातों को अंजाम देने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माने जाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 1.1 करोड़ की आबादी वाले इस देश में करीब 15 लाख लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि लाखों नागरिक इस खौफनाक हिंसा के चलते अपना घर छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं। इसके साथ ही, देश के 50 लाख से अधिक लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना करने को मजबूर हैं।
चुनावी अनिश्चितता और राजनीतिक संकट
हैती के भीतर राजनीतिक संकट भी अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। देश में वर्ष 2016 के बाद से एक बार भी कोई राष्ट्रीय स्तर का चुनाव आयोजित नहीं किया जा सका है। तत्कालीन राष्ट्रपति जोवेनेल मोइस की जुलाई 2021 में हुई निर्मम हत्या के बाद से देश का राजनीतिक ढांचा चरमरा गया है। अब जाकर आगामी दिसंबर 2026 में देश में नए आम चुनाव कराए जाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका पूरा देश बेसब्री से इंतजार कर रहा है।





















