प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की रडार पर अब आईएएस अधिकारी अनुराग वर्मा आ गए हैं। निजी बिल्डर्स को अवैध रूप से फायदा पहुंचाने के गंभीर आरोपों के बीच जांच एजेंसी ने उन्हें पूछताछ के लिए तलब किया है। यह पूरा कानूनी पेंच सनटेक सिटी और अल्टस स्पेस बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े प्रोजेक्ट्स के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
जमीन के इस्तेमाल और लेआउट में फेरबदल के आरोप
जांच के दायरे में आए इन प्रोजेक्ट्स पर आरोप है कि इन्हें अनुचित लाभ देने के लिए नियमों को ताक पर रखा गया। न सिर्फ जमीनों के लैंड यूज यानी उपयोग में बदलाव किया गया, बल्कि उनके लेआउट में भी सुनियोजित तरीके से हेरफेर की गई। इसके अलावा, म्यूरवुड्स इकोसिटी की ग्रुप हाउसिंग साइट्स के ट्रांसफर के प्रस्ताव को ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी GMADA ने पहले ही खारिज कर दिया था। इसके बावजूद नियमों को दरकिनार करते हुए इन साइट्स को गौरव धीर की कंपनी धीर कंस्ट्रक्शन के नाम ट्रांसफर कर दिया गया।
नीतिगत बदलाव और मंत्रियों के कार्यकाल पर सवाल
इस पूरे प्रकरण में सरकारी नीतियों में किए गए बदलावों को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, साल 2022 में उस समय के मंत्री अमन अरोड़ा के कार्यकाल के दौरान नीति नियमों में फेरबदल किया गया था। अब वित्तीय मामलों की जांच करने वाली एजेंसी इसी विवादास्पद फैसले और उसके बाद हुए तमाम साइट्स के ट्रांसफर की गहराई से पड़ताल कर रही है।
गलत जानकारियों और धाराओं के फेरबदल की जांच
सनटेक सिटी से जुड़े मामले में यह भी सामने आया है कि बिल्डर की तरफ से अथॉरिटी के सामने कई तथ्य गलत तरीके से पेश किए गए थे। आरोप है कि इसके बावजूद पीआरटीपीडी एक्ट की धारा 90 के तहत सख्त कार्रवाई करने के बजाय केवल धारा 85 के तहत हल्की कार्रवाई की गई। अब ईडी इस बात की तह तक जाने का प्रयास कर रही है कि लेआउट और लैंड यूज में किए गए इन कथित बदलावों का असली लाभार्थी कौन था। साथ ही उन प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है जिनकी मदद से ये फैसले लिए गए। हालांकि, इस मामले में अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।



















