कानून के लंबे हाथों से तीन दशकों तक बचते आ रहे दो सगे भाइयों के दुस्साहस का आखिरकार अंत हो गया है। दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने उत्तर प्रदेश और झारखंड में एक साथ छापेमारी करके उन दो इनामी अपराधियों को दबोच लिया, जिनकी तलाश दो राज्यों की पुलिस को करीब 30 वर्षों से थी। कपड़ों के एक मामूली विवाद में चाकूबाजी से शुरू हुआ यह अपराध आगे चलकर सुपारी किलिंग और शरीर के टुकड़े-टुकड़े करने की खौफनाक वारदात तक पहुंच गया। गिरफ्तार किए गए भाइयों की पहचान फिरासत अली और शाहनवाज के रूप में हुई है। दोनों आरोपी 1996 में दिल्ली के रघुबीर नगर में हुई एक व्यापारी की हत्या में दोषी ठहराए जा चुके थे। अदालत से जमानत मिलने के बाद दोनों फरार हो गए और पहचान छिपाकर मुंबई में एक और खौफनाक हत्याकांड को अंजाम दे डाला। वर्षों की छानबीन और गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने दोनों को एक ही समय अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया है।
साड़ी के विवाद में पश्चिमी दिल्ली में हुई थी पहली हत्या
इस सनसनीखेज आपराधिक कहानी की शुरुआत 27 सितंबर 1996 को पश्चिमी दिल्ली के रघुबीर नगर इलाके से हुई थी। उस दौरान वहां पुराने कपड़ों के कारोबार को लेकर व्यापारियों के बीच अक्सर कहासुनी हुआ करती थी। उसी दिन साड़ी खरीदने के मामूली मुद्दे पर शाहनवाज नामक व्यक्ति का कपड़ा व्यापारी इश्तियाक अहमद से तीखा विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ा कि शाहनवाज ने इश्तियाक को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दे दी। वारदात के कुछ ही घंटों बाद शाहनवाज अपने भाई फिरासत अली और अन्य साथियों के साथ इश्तियाक के कमरे में जबरन घुस गया। आरोपियों ने धारदार चाकू से इश्तियाक पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। खून से लथपथ इश्तियाक को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों भाइयों को गिरफ्तार किया और अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
जमानत का फायदा उठाकर फरार हुए और मुंबई में रची नई साजिश
रघुबीर नगर हत्याकांड की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फिरासत अली और शाहनवाज को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोनों भाइयों ने इस फैसले के खिलाफ उच्च अदालत में अपील दायर की। वर्ष 2000 में जब उनकी अपील लंबित थी, तब उन्हें अदालत से जमानत मिल गई। जमानत पर बाहर आते ही दोनों भाइयों ने कानून को चकमा दिया और अंडरग्राउंड हो गए। वर्ष 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, लेकिन आरोपियों ने आत्मसमर्पण करने के बजाय अपनी फरारी जारी रखी। फरार रहने के दौरान ही दोनों भाइयों के तार महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में हुई एक भयानक वारदात से जुड़ गए। मुंबई के चर्चित भिंडी बाजार इलाके में वर्ष 2006 में हुई एक हत्या ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए थे।
भिंडी बाजार के मटन मार्केट में मिला था बिना सिर और हाथ-पैर का धड़
14 मई 2006 की सुबह मुंबई के भिंडी बाजार स्थित मटन मार्केट में हड़कंप मच गया। वहां के एक स्थानीय फेरीवाले को अपने ठेले पर एक लावारिस प्लास्टिक बैग मिला। जब बैग को खोला गया तो उसमें से एक इंसान का धड़ बरामद हुआ। खौफनाक बात यह थी कि उस शव के सिर, दोनों हाथ और दोनों पैर काटे जा चुके थे। शरीर के बाकी हिस्से गायब होने के कारण मृतक की पहचान करना मुंबई पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया। पुलिस ने शहर भर के लापता लोगों के रिकॉर्ड खंगाले और फॉरेंसिक डीएनए जांच का सहारा भी लिया, लेकिन कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा। कई सालों तक यह मामला रहस्य बना रहा और जांच फाइलों में बंद पड़ा रहा।
शराबी पति के उत्पीड़न से तंग आकर पत्नी ने दी थी दो लाख की सुपारी
हत्याकांड के करीब 10 साल बीत जाने के बाद पुलिस के एक गुप्त मुखबिर ने इस ठंडे बस्ते में पड़े मामले में अहम सुराग दिया। मुखबिर की खबर के आधार पर जब जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि वह धड़ किशन खारवा नाम के व्यक्ति का था। पुलिस ने जब किशन की पत्नी बंसीबेन को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो एक चौंकाने वाली साजिश का पर्दाफाश हुआ। पूछताछ में खुलासा हुआ कि किशन अत्यधिक शराब पीने का आदी था और आए दिन अपनी पत्नी के साथ बुरी तरह मारपीट और प्रताड़ना करता था। रोज-रोज के दुर्व्यवहार से तंग आकर बंसीबेन ने अपने पति को रास्ते से हटाने का फैसला किया। उसने किशन की हत्या कराने के लिए दो लाख रुपये की सुपारी दी थी। यह सुपारी फिरासत अली और उसके साथियों को दी गई थी। फिरासत और उसके सहयोगियों ने किशन की बेरहमी से हत्या की, उसके शरीर के कई टुकड़े किए और साक्ष्य मिटाने के लिए टुकड़ों को अलग-अलग सुनसान जगहों पर फेंक दिया।
फरारी के दौरान फैलाया कपड़ों का बड़ा नेटवर्क, 2021 में फिर चकमा दिया
मुंबई पुलिस की पड़ताल में जब फिरासत अली का नाम सामने आया तो यह खुलासा हुआ कि वह दिल्ली के रघुबीर नगर हत्याकांड का वही पुराना भगोड़ा मुजरिम है। मुंबई पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया था, लेकिन कानूनी दांव-पेचों के चलते वर्ष 2021 में बॉम्बे हाईकोर्ट से उसे दोबारा जमानत मिल गई। जमानत मिलते ही फिरासत अली एक बार फिर गायब हो गया। फरारी के दौरान दोनों भाइयों ने बड़ी ही होशियारी से सामान्य नागरिकों की तरह रहना शुरू कर दिया और अपने पुराने कपड़ों के बिजनेस को देश के कई राज्यों में फैला लिया। फिरासत अली तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से पुराने कपड़ों की आपूर्ति का प्रबंधन देखता था, जबकि शाहनवाज झारखंड और महाराष्ट्र के इलाकों में व्यापार की देखरेख करता था। दोनों भाई सोचते थे कि अब कानून की नजरें उन तक कभी नहीं पहुंच पाएंगी।
मुरादाबाद और गोड्डा में एक साथ छापेमारी कर तिहाड़ भेजे गए दोनों भाई
दोनों भाइयों की फरारी का खेल हाल ही में तब समाप्त हुआ जब दिल्ली पुलिस की एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल को उनके ठिकाने की सटीक गुप्त सूचना मिली। पुलिस को पता चला कि एक भाई उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में छुपा हुआ है और दूसरा झारखंड के गोड्डा में व्यापार चला रहा है। दोनों आरोपियों को सतर्क होने का मौका न मिले, इसके लिए पुलिस ने दो अलग-अलग विशेष टीमों का गठन किया। दोनों टीमों ने मुरादाबाद और गोड्डा में एक ही समय पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस की इस समन्वित कार्रवाई में दोनों भाई रंगे हाथों दबोच लिए गए। गिरफ्तारी के बाद दोनों को दिल्ली लाया गया और तिहाड़ जेल भेज दिया गया। दिल्ली पुलिस ने मुंबई पुलिस को भी इस गिरफ्तारी की आधिकारिक जानकारी दे दी है, जिससे 2006 के मुंबई हत्याकांड में कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।



















