टाटा संस की अर्जी रिजर्व बैंक ने की खारिज, अब शेयर बाजार में दस्तक देने के अलावा नहीं बचा कोई रास्ताबेंगलुरु की लापता छात्रा को खोजने में मददगार बना सरकारी योजना का ओटीपी, सहेली की तलाश में जुटी सीआईडीबाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए मसीहा बनी अंबाला की मेडिकल टीम, मुफ्त इलाज पाकर भावुक हुए पीड़ितवृषभ राशिफल 13 सितंबर: इस एक आदत से आज चमकेगा भाग्य, जानें अपना पूरा दैनिक भविष्यफलरसोई की काली और चिकनी छन्नी को चमकाने के 4 आसान घरेलू नुस्खे, ऐसे करें साफपश्चिम बंगाल में असली तृणमूल कांग्रेस पर संग्राम, ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के सामने 'जोड़ाफूल' चुनाव चिह्न पर जताया दावाकॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने जताई गहरी चिंता, गणित के क्षेत्र में एआई की तेज तरक्की से वैज्ञानिक सहमेदिल्ली में अफगानिस्तान के खिलाफ इतिहास रच सकते हैं वैभव सूर्यवंशी, वीरेंद्र सहवाग का यह बड़ा रिकॉर्ड निशाने परग्रैंड थेफ्ट ऑटो VI की रिलीज से पहले क्यों भड़क उठा है दक्षिणपंथी धड़ा? जानें सोशल मीडिया पर जारी इस विवाद की असल वजहमूलांक 8 के जातक: शनि की कृपा से जीवन में अपार सफलता पाने वाले लोगों के छिपे हुए गुण
सतना-मानिकपुर रेलखंड पर भारी बारिश का कहर, दो फीट पानी भरने से साढ़े चार घंटे थमा ट्रेनों का सफरमध्य प्रदेश
29 अग॰ 2026, 10:52 pm (14 दिन पहले)· 3

सतना-मानिकपुर रेलखंड पर भारी बारिश का कहर, दो फीट पानी भरने से साढ़े चार घंटे थमा ट्रेनों का सफर

मूसलाधार बारिश के चलते सरभंग नदी में उफान आ गया जिससे सतना-मानिकपुर रेलखंड पर ट्रैक दो फीट पानी में डूब गया। इस कारण करीब साढ़े चार घंटे तक रेल यातायात बाधित रहा और लगभग 12 ट्रेनों को विभिन्न स्टेशनों पर रोकना पड़ा।

शनिवार को हुई मूसलाधार बारिश के कारण सरभंग नदी में भारी उफान आ गया, जिसका सीधा असर सतना-मानिकपुर रेलखंड पर देखने को मिला। खुटहा और चितहरा के बीच रेलवे ट्रैक के ऊपर करीब दो फीट तक पानी बहने लगा, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने एहतियातन कदम उठाए। इस जलभराव के चलते करीब साढ़े चार घंटे तक रेल यातायात पूरी तरह से ठप रहा। इस दौरान लगभग 12 महत्वपूर्ण ट्रेनों को सतना, मानिकपुर, मझगवां और सगमा सहित अलग-अलग रेलवे स्टेशनों पर ही रोककर रखना पड़ा। इससे पहले भी 23 जुलाई 2026 को मूसलाधार बारिश के चलते रेलवे ने 23 जुलाई 2026 को अपने प्रारंभिक स्टेशनों से चलने वाली चार ट्रेनों को रद्द करने का फैसला लिया था।

मूसलाधार बारिश से अस्त-व्यस्त हुई रेलवे व्यवस्था

सुबह लगभग सात बजे के आसपास गोदान एक्सप्रेस और एक डाउन मालगाड़ी चितहरा के पास पहुँची। जब लोको पायलटों ने ट्रैक पर पानी का तेज बहाव और खतरनाक स्थिति देखी, तो उन्होंने सूझबूझ दिखाते हुए दोनों गाड़ियों को वहीं रोक दिया और तुरंत रेलवे कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी दी। इसके फौरन बाद सतना से रेलवे के तकनीकी अधिकारियों, अन्य कर्मचारियों और आरपीएफ की टीम को हालात का जायजा लेने के लिए मौके पर रवाना किया गया। हालाँकि, लगातार हो रही भारी बारिश और खराब सड़क मार्ग के कारण बचाव दल को घटनास्थल तक पहुँचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

ये भी पढ़ें

वंदे भारत समेत कई प्रमुख ट्रेनों पर पड़ी रोक

इस अप्रत्याशित जलभराव और रेल यातायात के बाधित होने का असर कई लंबी दूरी की महत्वपूर्ण ट्रेनों के संचालन पर भी साफ तौर पर दिखाई दिया। आनंद विहार-रीवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस को मानिकपुर स्टेशन पर लगभग ढाई घंटे तक रोककर रखा गया, जो बाद में हालात सामान्य होने पर दोपहर करीब एक बजे सतना पहुँची। इसके अलावा सारनाथ एक्सप्रेस को भी सतना स्टेशन पर लगभग दो घंटे तक रोककर रखा गया और सुबह 11:40 बजे आगे के लिए रवाना किया गया। रेलवे ट्रैक पर पानी भरने के कारण सतना-मानिकपुर मेमू ट्रेन का सुबह का फेरा भी रद्द करना पड़ा, जिसके विकल्प के तौर पर इसे सतना-कटनी स्पेशल गाड़ी के रूप में चलाया गया।

मुख्तियारगंज फाटक के पास रोकना पड़ा पहिया

मुख्तियारगंज फाटक के निकट रेलवे ट्रैक पर पानी जमा होने के कारण रीवा-भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस को भी सुरक्षा कारणों से करीब 5 से 10 मिनट के लिए रोकना पड़ा। रेलवे के फील्ड कर्मचारियों ने तुरंत मौके पर पहुँचकर पानी की निकासी के प्रबंध किए, जिसके बाद ट्रेन को सुरक्षित आगे रवाना किया गया। इस पूरी स्थिति की पुष्टि स्टेशन मैनेजर अब्दुल मतीन ने की है। ट्रैक पर पानी का स्तर घटने और लगातार हो रही निगरानी के बाद रेलवे प्रशासन ने करीब चार घंटे के लंबे अंतराल के बाद रेल परिचालन को धीरे-धीरे सामान्य करना शुरू किया।

सतर्कता से टला बड़ा हादसा और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

सभी संवेदनशील और प्रभावित स्थानों पर रेलवे कर्मचारियों की गश्त और निगरानी को काफी बढ़ा दिया गया है। रेलवे ट्रैक और उसके आसपास के जलमग्न इलाकों पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। मूसलाधार बारिश के इस संकट के दौरान रेलवे की त्वरित सतर्कता और मुस्तैदी से एक बड़ा रेल हादसा टल गया। हालाँकि, इतने लंबे समय तक रेल यातायात के बाधित रहने के कारण यात्रियों को भीषण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और कई ट्रेनों का समय-सारणी चक्र पूरी तरह से प्रभावित हो गया।

सवाल-जवाब

सतना-मानिकपुर रेलखंड पर यातायात क्यों बाधित हुआ था?
मूसलाधार बारिश के कारण सरभंग नदी के उफान पर आने और खुटहा-चितहरा के बीच ट्रैक पर दो फीट पानी भरने से यातायात बाधित हुआ।
कितने समय तक रेल परिचालन प्रभावित रहा?
सुरक्षा कारणों से करीब साढ़े चार घंटे तक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहा और बाद में धीरे-धीरे स्थिति सामान्य की गई।
कितनी ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया था?
इस दौरान लगभग 12 ट्रेनों को सतना, मानिकपुर, मझगवां और सगमा जैसे स्टेशनों पर रोककर रखा गया था।
वंदे भारत एक्सप्रेस को कहाँ और क्यों रोका गया था?
मुख्तियारगंज फाटक के पास ट्रैक पर पानी भरने के कारण रीवा-भोपाल वंदे भारत एक्सप्रेस को 5 से 10 मिनट के लिए रोकना पड़ा था।
इस घटना की पुष्टि किसने की थी?
स्टेशन मैनेजर अब्दुल मतीन ने ट्रैक पर पानी कम होने और परिचालन बहाल होने की पुष्टि की थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·13 दिन पहले

यह घटना बुनियादी ढांचे और जलवायु परिवर्तन के बीच बढ़ते टकराव को उजागर करती है। सरभंग नदी के उफान और जल निकासी प्रणालियों की विफलता से पता चलता है कि हमारे परिवहन नेटवर्क को मौसम की चरम घटनाओं के अनुकूल ढालने के लिए नीतिगत स्तर पर भारी निवेश और दीर्घकालिक जल-प्रबंधन रणनीतियों की तत्काल आवश्यकता है, अन्यथा बार-बार होने वाले व्यवधान आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेंगे।

Ravikash Gupta@ravikash·13 दिन पहले

यह बार-बार होने वाला बुनियादी ढांचे का संकट देश के लॉजिस्टिक्स और आपूर्ति श्रृंखला को सीधे प्रभावित करता है, जिससे परिवहन लागत बढ़ती है और आर्थिक गतिविधियों पर दबाव पड़ता है। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच, परिवहन नेटवर्क को लचीला और आधुनिक बनाना अब केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा की एक अनिवार्य शर्त बन चुका है। इसके लिए नीति निर्धारकों को बजट आवंटन और दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश पर नए सिरे से विचार करना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 दिन पहले

सरभंग नदी के उफान और सतना-मानिकपुर रेलखंड पर दो फीट पानी भरने की यह घटना केवल मौसम की मार नहीं, बल्कि जल निकासी प्रणालियों और तटबंधों की सुदृढ़ता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। लोको पायलटों की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन मूसलाधार बारिश के दौरान बुनियादी ढांचे की यह कमजोरी सार्वजनिक सुरक्षा और रेलवे की आपातकालीन तैयारियों की उच्च-स्तरीय प्रशासनिक जाँच की मांग करती है।

Rohan Verma@rohan-verma·13 दिन पहले

यह घटना स्पष्ट करती है कि क्षेत्रीय बुनियादी ढाँचे और मानसून प्रबंधन में किस स्तर की लाचारी है। जब देश की महत्वपूर्ण वंदे भारत और एक्सप्रेस ट्रेनें कुछ सेंटीमीटर पानी या जलभराव के कारण रोकनी पड़ें, तो यह उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले इस सामरिक रेल मार्ग की इंजीनियरिंग पर प्रश्नचिह्न लगाता है। बार-बार इस प्रकार की बाधाओं से यात्रियों की जान जोखिम में पड़ती है और अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ता है। रेलवे और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से स्थायी जल निकासी नीति बनानी होगी, वरना भविष्य में यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR