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शास्त्री नगर में 44 लाख की लूट का पर्दाफाश, कारोबारी के बेटे ने ही रची थी साजिशदिल्ली
29 अग॰ 2026, 12:19 am (17 दिन पहले)· 2

शास्त्री नगर में 44 लाख की लूट का पर्दाफाश, कारोबारी के बेटे ने ही रची थी साजिश

दिल्ली के शास्त्री नगर में 44 लाख रुपये की लूट के मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी साजिश को रकम भेजने वाले कारोबारी के बेटे ने ही अपने कर्ज को चुकाने के लिए रचा था।

राजधानी दिल्ली के शास्त्री नगर इलाके में हाल ही में हुई 44 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। इस मामले में पुलिस ने दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, और जांच के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी आपराधिक साजिश का मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि उसी कारोबारी का बेटा निकला जिसने कैरियर को इतनी बड़ी रकम सौंपी थी। इस सनसनीखेज वारदात ने इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और आपसी भरोसे को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि अपनों ने ही इस खौफनाक घटना को अंजाम दिया।

बेटे ने ही रची थी रकम लूटने की साजिश

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, शास्त्री नगर के रहने वाले 52 वर्षीय जितेंद्र कुमार ने इस लूट की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका काम पैसों का लेन-देन संभालना था और घटना वाले दिन वह अवधेश तिवारी से 44 लाख रुपये लेकर राजकुमार तक पहुँचाने के लिए निकले थे। एमएस पार्क स्थित ई-49 पते से जैसे ही उन्होंने बाइक उठाई और आगे बढ़े, रास्ते में एक व्यक्ति ने उनकी बाइक रोक ली। इसके तुरंत बाद दूसरे बदमाश ने मौका पाकर उनका बैग छीन लिया, जिसमें करीब 44 लाख रुपये नकद रखे हुए थे। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों शातिर अपराधी मौके से तेजी से फरार हो गए।

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भारी कर्ज से परेशान होकर उठाया यह कदम

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत लूट की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी। जब तकनीकी और जमीनी स्तर पर जांच को आगे बढ़ाया गया, तो पुलिस के हाथ एक हैरान करने वाला सुराग लगा। जांच में यह साफ हो गया कि इस वारदात की पूरी पटकथा अवधेश तिवारी के बेटे प्रभय तिवारी ने ही लिखी थी। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि प्रभय भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ था। अपने ऊपर चढ़े इसी कर्ज को चुकाने के लिए उसने अपने ही पिता के जरिए कैरियर को भेजी गई भारी-भरकम नकदी को लूटने का नापाक षड्यंत्र रचा था।

पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

दिल्ली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में दो आरोपियों को धर दबोचा है। पकड़े गए पहले आरोपी की पहचान शाहदरा निवासी 26 वर्षीय प्रभय तिवारी के रूप में हुई है, जो इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है। वहीं, दूसरा आरोपी 21 साल का सरब तिवारी उर्फ प्रफुल है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामगंज का रहने वाला है। इन दोनों की गिरफ्तारी से पुलिस को यह समझने में आसानी हुई कि वारदात को किस तरह से सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था और किन लोगों ने इसमें प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया था।

अन्य आरोपियों और लूटी गई रकम की तलाश जारी

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी आगे की गहन छानबीन की जा रही है। लूटी गई पूरी रकम को बरामद करने और इस आपराधिक षड्यंत्र में शामिल अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी बारीकी से जाँच की जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी में इस तरह की वारदातें लगातार सामने आ रही हैं। इससे पहले हाल ही में दिल्ली के अशोक विहार इलाके में भी एक बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया था, जहाँ बदमाशों ने घर में जबरन घुसकर 75 लाख रुपये लूट लिए थे। उस घटना में चार हमलावरों ने एक महिला को चाकू की नोक पर धमकाया था, उसके हाथ-पैर बाँध दिए थे और नकदी लेकर फरार हो गए थे। इसके अलावा, दिल्ली के न्यू उस्मानपुर में भी दिनदहाड़े डकैती की ऐसी ही एक घटना सामने आई थी, जहाँ सात से आठ बदमाशों ने एक घर में घुसकर लोगों को बंधक बनाया था और नौ लाख रुपये नकद के साथ-साथ कीमती जेवरात भी लूट लिए थे। पुलिस इन सभी मामलों की कड़ियाँ जोड़कर अपराधियों पर नकेल कसने का प्रयास कर रही है।

सवाल-जवाब

शास्त्री नगर लूट मामले में कुल कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है?
इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इस लूट की पूरी साजिश किसने रची थी?
इस लूट की साजिश अवधेश तिवारी के बेटे प्रभय तिवारी ने रची थी।
कैरियर जितेंद्र कुमार कितने रुपये लेकर जा रहा था?
कैरियर जितेंद्र कुमार 44 लाख रुपये की नकदी लेकर जा रहा था।
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के नाम क्या हैं?
गिरफ्तार आरोपियों के नाम प्रभय तिवारी और सरब तिवारी उर्फ प्रफुल हैं।
आरोपी प्रभय तिवारी ने इस वारदात को क्यों अंजाम दिया?
प्रभय तिवारी पर भारी कर्ज था जिसे चुकाने के लिए उसने यह साजिश रची।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·16 दिन पहले

आयशा खान की रिपोर्टिंग के लिहाज़ से, यह घटना किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है जहाँ वित्तीय दबाव और पारिवारिक विश्वासघात मिलकर एक आपराधिक थ्रिलर का रूप ले लेते हैं। दिल्ली में इस तरह के मामलों से यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों तक पहुँचने में तकनीकी सर्विलांस और कॉल डिटेल्स की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे मामलों में आगे की जांच से यह देखना होगा कि बाकी रकम की बरामदगी कितनी जल्दी होती है और क्या इस साजिश में कोई और अंदरूनी व्यक्ति भी शामिल था।

Arjun Mehta@arjun-mehta·16 दिन पहले

यह घटना राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ते वित्तीय दबाव और पारिवारिक स्तर पर टूटते भरोसे के खतरनाक मिश्रण को उजागर करती है। जब युवा भारी कर्ज के जाल में फंसकर इस तरह के सुनियोजित षड्यंत्र रचते हैं, तो यह न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने और आर्थिक तनाव के प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·16 दिन पहले

वित्तीय संकट और अत्यधिक कर्ज युवाओं में गंभीर मानसिक दबाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन का कारण बन रहे हैं, जिससे उनकी निर्णय लेने की क्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है। इस घटना से यह स्पष्ट है कि बढ़ते मानसिक तनाव और आर्थिक संकट के बीच समय पर मनोवैज्ञानिक परामर्श और वित्तीय प्रबंधन की काउंसलिंग न मिलना कितना घातक साबित हो सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में वित्तीय अपराधों का यह नया पैटर्न गहरी चिंता का विषय है। पारिवारिक और कारोबारी रिश्तों की आड़ में इस तरह की सुनियोजित साजिशें यह दर्शाती हैं कि आर्थिक तंगी और भारी कर्ज का दबाव किस हद तक युवाओं को अपराध की ओर धकेल रहा है। आगे की पुलिस जांच में यह देखना अहम होगा कि लूटी गई पूरी 44 लाख रुपये की नकदी की बरामदगी किस प्रकार होती है और इस षड्यंत्र में किसी अन्य वित्तीय मददगार की संलिप्तता है या नहीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

इस मामले में तकनीकी सर्विलांस और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स की भूमिका निर्णायक रही होगी, क्योंकि अपनों द्वारा रची गई ऐसी साजिशों में अक्सर अंदरूनी संपर्कों का सुराग डिजिटल फुटप्रिंट से ही मिलता है। अब अदालत में यह साबित करना अभियोजन पक्ष के लिए एक कानूनी चुनौती होगी कि वित्तीय दबाव और पूर्व नियोजित षड्यंत्र के बीच क्या कड़ियां थीं।

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