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शत्रुजीत ब्रिगेड का पराक्रम: दुश्मन के क्षेत्र में कैसे उतरे एमआई-17 से कमांडो?भारत
25 अग॰ 2026, 6:09 pm (1 घंटे पहले)· 2

शत्रुजीत ब्रिगेड का पराक्रम: दुश्मन के क्षेत्र में कैसे उतरे एमआई-17 से कमांडो?

भारतीय सेना की शत्रुजीत ब्रिगेड ने एक नए सैन्य अभ्यास के तहत हवा से जमीन पर सटीक हमले और सैन्य वाहनों की एयरलिफ्टिंग का सफल प्रदर्शन किया है।

भविष्य के युद्धों की रणनीतिक तैयारियों के तहत भारतीय सेना ने अपनी हेलिबोर्न युद्धक क्षमताओं का एक उन्नत प्रदर्शन प्रस्तुत किया है। एक विशेष युद्धाभ्यास में सेना की प्रतिष्ठित शत्रुजीत ब्रिगेड ने आसमान के रास्ते दुश्मन के इलाके में तेजी से उतरने और कड़ा प्रहार करने की अपनी असाधारण दक्षता दिखाई। इस पूरे सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य युद्ध की परिस्थितियों में सैनिकों और भारी साजो-सामान को बिना किसी देरी के सीधे लक्ष्य के करीब पहुंचाना था, ताकि दुश्मन को संभलने का मौका न मिले।

इस युद्धाभ्यास के दौरान सैनिकों ने एसटीआईई और स्लिदरिंग जैसी अत्यंत कठिन और जोखिम भरी तकनीकों का उपयोग किया। इन उन्नत तरीकों के माध्यम से कमांडो चलते हेलीकॉप्टरों से रस्सियों के सहारे पलक झपकते ही सीधे ज़मीन पर उतर आए। नीचे उतरते ही जवानों ने फौरन मोर्चा संभाला और इलाके को घेरकर आक्रामक कार्रवाई का अभ्यास किया। सेना का यह ऑपरेशन इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि किसी भी आपात मोर्चे पर हमारे जवान दुश्मन के घर में घुसकर त्वरित कार्रवाई करने में पूरी तरह सक्षम हैं।

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इसके अलावा, अभियान के दौरान बदलती परिस्थितियों के हिसाब से तुरंत निर्णय लेने और कार्रवाई करने की क्षमता का भी कड़ाई से परीक्षण किया गया। इस अभ्यास की सबसे बड़ी सफलता भारतीय वायु सेना के साजो-सामान और शत्रुजीत ब्रिगेड के बीच बेहतरीन तालमेल का दिखना रहा। थल सेना और वायु सेना के इस एकीकृत संचालन से यह साबित हुआ कि हवाई मार्ग से सैनिकों को कितनी तेजी और सटीकता के साथ युद्धक्षेत्र में तैनात किया जा सकता है। आधुनिक युद्धों में इस तरह का तालमेल बेहद अहम माना जाता है।

इस पूरे युद्धाभ्यास का सबसे बड़ा आकर्षण एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टरों का वह कारनामा रहा जिसके जरिए पहली बार लाइट स्ट्राइक व्हीकल और रैपिड टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को हवा में नीचे लटकाकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाया गया। इस अनूठी तकनीक के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों और अग्रिम चौकियों तक कम समय में जरूरी सैन्य वाहन और भारी उपकरण पहुंचाना अब और अधिक सुगम हो गया है।

यह विशेष क्षमता उन अभियानों में गेम-चेंजर साबित हो सकती है जहां सैनिकों को उतारने के साथ-साथ उन्हें तुरंत वाहन और परिवहन के साधन मुहैया कराना बेहद जरूरी होता है। इससे युद्धक्षेत्र में सेना की प्रतिक्रिया गति और ऑपरेशनल प्रभावशीलता में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी। शत्रुजीत ब्रिगेड का यह सफल अभ्यास इस बात की पुष्टि करता है कि भारतीय सेना भविष्य के संघर्षों के लिए लगातार अपनी मारक क्षमता को आधुनिक और तेज बना रही है। सेना की यह प्रतिबद्धता बदलते युद्ध हालातों में सैनिकों और हथियारों की तुरंत हवाई तैनाती को और अधिक प्रभावी बनाती है।

सवाल-जवाब

शत्रुजीत ब्रिगेड के इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस अभ्यास का मुख्य मकसद जंग के मैदान में सैनिकों और भारी हथियारों को बिना एक पल गंवाए सीधे दुश्मन के सिर पर उतारना था।
अभ्यास के दौरान किन विशेष तकनीकों का प्रदर्शन किया गया?
जवानों ने एसटीआईई और स्लिदरिंग जैसी बेहद खतरनाक तकनीकों का प्रदर्शन किया जिसके जरिए वे हेलीकॉप्टर से सीधे टारगेट एरिया में उतरे।
अभ्यास में किस हेलीकॉप्टर का मुख्य रूप से आकर्षण रहा?
अभ्यास का सबसे बड़ा आकर्षण एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर रहा जिसके जरिए लाइट स्ट्राइक व्हीकल और रैपिड टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम को हवा में लटकाकर ले जाया गया।
इस ऑपरेशन में किस बल ने महत्वपूर्ण समन्वय दिखाया?
इस अभियान में भारतीय वायु सेना के संसाधनों के साथ शत्रुजीत ब्रिगेड का निर्बाध समन्वय देखने को मिला।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

शत्रुजीत ब्रिगेड का यह युद्धाभ्यास महज एक सैन्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि भविष्य के सामरिक संघर्षों के लिए एक मजबूत सुरक्षा संदेश है। एमआई-17 हेलीकॉप्टरों द्वारा सैन्य वाहनों की एयरलिफ्टिंग और एसटीआईई जैसी कठिन तकनीकों का उपयोग यह साबित करता है कि अब भारतीय सेना दुर्गम क्षेत्रों में भी दुश्मन पर त्वरित और निर्णायक बढ़त बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Ravikash Gupta@ravikash·44 मिनट पहले

यह सैन्य अभ्यास सिर्फ सामरिक शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भविष्य के रक्षा बजट, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए एक बड़ा आर्थिक संकेत है। जब सेना एमआई-17 जैसे प्लेटफार्मों के जरिए उन्नत तकनीक और भारी साजो-सामान का त्वरित परिवहन करती है, तो यह रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण और 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत बन रहे लाइट स्ट्राइक व्हीकल्स की माँग को और तेज़ी से बढ़ावा देता है। आने वाले समय में इस तरह की आधुनिक युद्धक तैयारियाँ रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में भारी निवेश और कॉर्पोरेट विकास के नए रास्ते खोलेंगी।

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