भारत में रहकर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा की गई एक लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ढाका की राजनीति में भारी हलचल देखने को मिली है। इस घटनाक्रम के कारण भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक तनाव काफी बढ़ गया। शेख हसीना की बयानबाजी पर बांग्लादेश की ओर से कड़ी आपत्तियां दर्ज कराई गईं और सवाल उठाए गए। इसके बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान पूरे मामले पर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि इस आयोजन से भारत सरकार का कोई संबंध नहीं है और भारत का रुख इस विषय पर पूरी तरह पारदर्शी है।
शेख हसीना के बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर विदेश मंत्रालय की सफाई
शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर ढाका द्वारा व्यक्त किए गए विरोध पर जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने तीन प्रमुख बिंदुओं के माध्यम से स्थिति सामने रखी। भारत ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन से सरकार का दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है
- सरकार की शून्य सहभागिता: विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि शेख हसीना के इस कार्यक्रम को आयोजित करने में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी।
- निजी आयोजन: भारतीय पक्ष ने यह रेखांकित किया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से व्यक्तिगत स्तर पर आयोजित किया गया था और इसमें सरकारी मशीनरी या प्रशासन का कोई हस्तक्षेप नहीं था।
- बयानों का समर्थन नहीं: भारत ने दोटूक शब्दों में कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने जो भी विचार या बातें कही हैं, भारत सरकार उनका किसी भी प्रकार से समर्थन नहीं करती है।
अमेरिकी सांसद द्वारा एफसीआरए विधेयक पर उठाए गए सवालों का जवाब
साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट यानी एफसीआरए (FCRA) कानून को लेकर एक अमेरिकी सांसद द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं और सवालों को भी भारत ने खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में भारत की विधायी संप्रभुता को रेखांकित किया
- पूरी तरह आंतरिक विषय: विदेश मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा कि एफसीआरए (FCRA) से जुड़ा विधेयक भारत का पूरी तरह से आंतरिक मामला है।
- संसद का संप्रभु अधिकार: प्रवक्ता ने दोहराया कि देश के कानूनों और विधायी प्रक्रियाओं के संबंध में निर्णय लेने की सर्वोच्च शक्ति भारत की संसद के पास है, और इसमें किसी भी बाहरी देश या प्रतिनिधि के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- वैश्विक व्यवस्था का दिया तर्क: अमेरिकी चिंताओं का जवाब देते हुए भारत ने कहा कि खुद संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया के कई देश अपनी सीमाओं के भीतर आने वाले विदेशी धन और अनुदान को नियंत्रित करने के लिए नियम बनाते हैं। इसलिए भारत द्वारा विदेशी योगदान को विनियमित करना पूरी तरह न्यायसंगत और तर्कसंगत कदम है।
सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के रक्षा समझौते पर भारत का रुख
प्रेस ब्रीफिंग में सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए त्रिस्तरीय रक्षा और रणनीतिक समझौतों का मुद्दा भी उठा। इन देशों के बीच बढ़ते सैन्य और कूटनीतिक संबंधों पर भारत की भावी रणनीति के बारे में पूछे जाने पर विदेश मंत्रालय ने अपनी सतर्कता व्यक्त की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस पूरे घटनाक्रम और क्षेत्र में आकार ले रहे नए रक्षा व रणनीतिक समीकरणों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। भारत अपनी क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक हितों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक और पड़ोसी घटनाक्रमों का लगातार मूल्यांकन करता रहता है।



















