लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नई दिल्ली स्थित मिजोरम हाउस में मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा से शिष्टाचार भेंट की। दोनों नेताओं के बीच करीब डेढ़ घंटे तक चली इस विस्तृत बातचीत में क्षेत्रीय राजनीति, युवाओं से जुड़े मसलों और शांति बहाली के तौर-तरीकों पर चर्चा हुई। वांगचुक ने विशेष तौर पर उस ऐतिहासिक मिजो शांति समझौते की प्रक्रिया को समझने की इच्छा जताई जिसने दशकों पुराने उग्रवाद को खत्म कर क्षेत्र में स्थायी स्थिरता कायम की थी।
राष्ट्रीय राजनीति और युवाओं के मुद्दों पर मंथन
सोमवार को आयोजित इस बैठक के दौरान समकालीन राजनीतिक परिदृश्य और पूर्वोत्तर के विकास पर भी चर्चा हुई। पूर्व मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्होंने सोनम वांगचुक के साथ राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति, वैश्विक मामलों तथा देश के युवाओं से जुड़े कई गंभीर विषयों पर विस्तार से संवाद किया। उन्होंने वांगचुक के साथ इस मुलाकात को बेहद गर्मजोशी भरा बताया और देश भर के युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता को रेखांकित किया।
मिजो शांति समझौते की बारीकियों को समझने की पहल
एमएनएफ की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सोनम वांगचुक ने मिजोरम के शांति समझौते के दस्तावेज का अध्ययन करने में रुचि दिखाई है। वांगचुक ने कहा कि वह मिजोरम के सफल शांति समझौते का अध्ययन करना चाहते हैं और इस समझौते में अहम भूमिका निभाने वाले ज़ोरमथांगा के अनुभवों से सीखना चाहते हैं। मिजोरम में उग्रवाद समाप्त करने वाला मेमोरेंडम ऑफ सेटलमेंट देश के सबसे टिकाऊ शांति मॉडल्स में से एक माना जाता है, जिसे समझने के लिए वांगचुक ने इस संवाद की पहल की।
शांति वार्ता में केंद्र की भूमिका और सभी पक्षों का समन्वय
बातचीत के दौरान ज़ोरमथांगा ने रेखांकित किया कि मिजो शांति समझौता दुनिया भर में एक मिसाल के रूप में देखा जाता है और संघर्ष समाधान की दिशा में काम करने वाले कई लोग और संगठन इसका अध्ययन करने आते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक समझौते की सफलता में केंद्र सरकार की ओर से बातचीत को लगातार समर्थन और सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद निर्णायक साबित हुआ था। शांति समझौते को धरातल पर उतारने के लिए सभी संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाने के अथक प्रयास किए गए थे।
उग्रवाद के दौर से सत्ता तक का सफर और लद्दाख का न्योता
ज़ोरमथांगा ने अपने राजनीतिक सफर को भी साझा किया, जिसमें उग्रवाद के कठिन दौर में मिजो नेशनल फ्रंट का नेतृत्व करने से लेकर बाद में पार्टी अध्यक्ष और राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में लोकतांत्रिक व्यवस्था में योगदान देने के अनुभव शामिल रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि मिजोरम का शांति और सुलह का यह अनुभव देश के अन्य अशांत इलाकों के लिए भी एक मार्गदर्शक मॉडल साबित हो सकता है। बैठक के समापन पर सोनम वांगचुक ने पूर्व मुख्यमंत्री ज़ोरमथांगा को लद्दाख आने का आधिकारिक निमंत्रण भी दिया।





















