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शिवाजी पार्क के पास अंजलि दमानिया और कई प्रदर्शनकारी हिरासत में, मुंबई में शुरू हुआ सियासी घमासानमहाराष्ट्र
11 अक्तू॰ 2026, 8:24 pm (15 दिन पहले)· 0

शिवाजी पार्क के पास अंजलि दमानिया और कई प्रदर्शनकारी हिरासत में, मुंबई में शुरू हुआ सियासी घमासान

मतदाता सूची में गड़बड़ियों के विरोध में शिवाजी पार्क पहुंचे प्रदर्शनकारियों और सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

मध्य मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क इलाके में कॉकरोच जनता पार्टी के आह्वान पर जमा हुए प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के विरोध में 11 अक्टूबर को आयोजित इस प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचीं सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया समेत दर्जनों लोगों को पुलिस ने धरना शुरू होने से पहले ही हिरासत में ले लिया। इलाके में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षाबलों का भारी जमावड़ा किया गया है और सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेड लगा दिए गए हैं।

सादे कपड़ों में पहुंची पुलिस, वाहन में बैठाकर ले गई

शिवाजी पार्क के निकट पहुंचते ही पुलिस अधिकारियों ने सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि दमानिया को आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें फौरन एक पुलिस वाहन में बैठा लिया। अपनी इस अचानक हुई हिरासत पर अंजलि दमानिया ने बताया कि वह जैसे ही प्रदर्शन के समर्थन में मौके पर पहुंचीं, सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और हिरासत में ले लिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं दी गई कि पुलिस दल उन्हें किस स्थान पर लेकर जा रहा है।

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पुलिस प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, आसपास के क्षेत्रों से पकड़े गए ज्यादातर प्रदर्शनकारियों को पास के शिवाजी पार्क पुलिस थाने पहुंचाया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य लोगों को स्थिति के अनुसार निकटवर्ती थानों में भी भेजा गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने साफ किया कि शिवाजी पार्क में बिना किसी पूर्व प्रशासनिक अनुमति के जमा होने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष का हमला: आदित्य ठाकरे ने उठाए सत्ता पर सवाल

इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तीखा आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और वर्ली से विधायक आदित्य ठाकरे ने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार किया। आदित्य ठाकरे ने कहा कि सरकार छात्रों और आम नागरिकों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से घबरा गई है, इसी वजह से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे लोगों को जबरन पकड़ा जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि उच्च स्तर पर बैठे लोगों के इशारे पर पुलिस बल काम करने के लिए मजबूर दिखाई दे रहा है। उन्होंने हिरासत में लिए गए सभी लोगों को हरसंभव कानूनी और राजनीतिक मदद का भरोसा दिया और कहा कि पुलिस के बैरिकेड्स के पीछे छिपने वालों के खिलाफ उनकी पार्टी प्रदर्शनकारियों के साथ डटकर खड़ी रहेगी।

मनसे के तीखे आरोप और नवरात्रि मंडलों का मुद्दा

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष अमित ठाकरे ने भी प्रदर्शनकारियों को रोके जाने और हिरासत में लिए जाने के प्रशासनिक आधार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने ऐलान किया कि 10 अक्टूबर से ही उनके कार्यकर्ता मौके पर मजबूती से डटे रहेंगे।

वहीं मनसे नेता संदीप देशपांडे ने इस मामले में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। देशपांडे का दावा है कि शिवाजी पार्क थाने के एक अधिकारी और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता मिलकर स्थानीय नवरात्रि मंडलों के पदाधिकारियों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ भड़का रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडलों के सदस्यों को यह तक आश्वासन दिया जा रहा था कि यदि वे विरोध करने वालों पर हमला करते हैं तो उन्हें पूरी कानूनी सुरक्षा दी जाएगी। देशपांडे ने प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब लोगों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जगह ही नहीं दी जा रही है, तो फिर यह कैसा लोकतंत्र है जहां पुलिस का काम अशांति रोकना नहीं बल्कि उसे बढ़ावा देना बन गया है।

मतदाता सूची का विवाद और लगातार दूसरे दिन धरपकड़

यह पूरा प्रदर्शन मतदाता सूची में सामने आई कथित गड़बड़ियों को लेकर हो रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी लगातार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है और इसी सिलसिले में शहरभर में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी संगठन को पूर्व अनुमति के बिना सार्वजनिक स्थलों पर भीड़ जुटाने की छूट नहीं दी जाएगी।

गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को भी महानगर के कई प्रमुख स्थानों से करीब 600 लोगों को बिना इजाजत प्रदर्शन करने के आरोप में पकड़ा गया था। उस दौरान अगस्त क्रांति मैदान और हुतात्मा चौक समेत कई संवेदनशील इलाकों में प्रदर्शनकारी जमा हुए थे, जिन्हें पुलिस ने तुरंत हटाकर हिरासत में भेज दिया था। फिलहाल शिवाजी पार्क और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई है ताकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।

सवाल-जवाब

अंजलि दमानिया को पुलिस ने कहां से हिरासत में लिया?
अंजलि दमानिया को मध्य मुंबई में शिवाजी पार्क के पास पहुंचते ही सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने हिरासत में ले लिया।
प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क में किस मांग को लेकर एकत्र हुए थे?
प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं के विरोध में जमा हुए थे और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
आदित्य ठाकरे ने इस पुलिसिया कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी?
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से डर गई है और उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों को कानूनी मदद देने की पेशकश की।
संदीप देशपांडे ने पुलिस और सत्तारूढ़ दल पर क्या गंभीर आरोप लगाया?
संदीप देशपांडे ने आरोप लगाया कि शिवाजी पार्क थाने के एक अधिकारी और भाजपा कार्यकर्ता स्थानीय नवरात्रि मंडलों के पदाधिकारियों को प्रदर्शनकारियों पर हमले के लिए उकसा रहे थे।
क्या 10 अक्टूबर को भी मुंबई में ऐसी ही गिरफ्तारियां हुई थीं?
हां, 10 अक्टूबर को भी अगस्त क्रांति मैदान और हुतात्मा चौक सहित विभिन्न इलाकों से करीब 600 लोगों को बिना अनुमति प्रदर्शन करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·15 दिन पहले

सिर्फ विरोध करने पर सीधे हिरासत में ले लेना सही नहीं लगता, लोकतंत्र में अपनी बात कहने का हक तो होना चाहिए।

Ravikash Gupta@ravikash·15 दिन पहले

मतदाता सूची में गड़बड़ी पर ऐसा हंगामा और अंजलि दमानिया की तुरंत गिरफ्तारी, साफ है कि सरकार किसी भी तरह का विरोध बर्दाश्त नहीं करना चाहती। पुलिस का इस तरह बिना अनुमति के नाम पर सबको उठाना गलत है।

Amit Patel@amit-patel·15 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात सही है लेकिन एक बात समझ नहीं आई कि पुलिस को अंजलि दमानिया को बिना बताए किसी अज्ञात जगह ले जाने की क्या जरूरत थी?

Rohan Verma@rohan-verma·15 दिन पहले

अंजलि जी को यूं बीच रास्ते उठाना बिल्कुल गलत है। पिछली बार जब दादर में ऐसा ही हंगामा हुआ था, तब भी आम लोगों को ही परेशानी उठानी पड़ी थी। लोकतंत्र में अपनी बात रखना सबका हक है, इस तरह जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 दिन पहले

रोहन जी, बात सही है आपकी लेकिन बिना परमिशन भीड़ जुटाना भी तो ठीक नहीं है। पुलिस को एक्शन लेना ही पड़ता है।

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